संघीय मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) का वर्णन कीजिए

संघीय मंत्रिपरिषद (federal council of ministers in hindi)-

भारत में संसदीय व्यवस्था को अपनाया गया है, जिसमें राष्ट्रपति औपचारिक प्रमुख होता है तथा प्रधानमंत्री एवं उसकी मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) वास्तविक कार्यपालिका होती है! मंत्रिपरिषद पद्धति को उत्तरदाई सरकार भी कहते हैं! संविधान 74 (1) के अनुसार राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी! 

औपचारिक रूप से समस्त कार्यकारी शक्ति राष्ट्रपति में निहित होने के बावजूद वास्तविक रूप से शासन की समस्त शक्तियां का प्रयोग मंत्रिपरिषद (mantri parishad) द्वारा होता है!  दोहरी कार्यपालिका, राजनीतिक एकता, प्रधानमंत्री का नेतृत्व, सामूहिक उत्तरदायित्व, गोपनीयता, एक सबके लिए एवं सब एक के लिए मंत्रिपरिषद शासन व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं हैं मंत्रिपरिषद में निम्नलिखित प्रकार के मंत्री होते हैं –

(1) कैबिनेट मंत्री (Cabinet Minister in hindi)  – 

मूल संविधान में कहीं भी कैबिनेट शब्द का उल्लेख नहीं किया गया है! 44  वें संविधान संशोधन अधिनियम 1978,के माध्यम से इस शब्द का अनुच्छेद 352 में जोड़ा गया! कैबिनेट मंत्री मंत्रिपरिषद के सबसे महत्वपूर्ण मंत्री होते हैं! यह अपने अपने विभाग के प्रमुख होते हैं! 

कैबिनेट मंत्रियों को ही मंत्रिमंडल की प्रत्येक बैठक में भाग लेने का अधिकार होता है वस्तुत: यही वास्तविक नीति निर्धारक संस्था है! कैबिनेट मंत्रियों के पास केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालय जैसे – गृह, रक्षा, वित्त, विदेश एवं अन्य मंत्रालय होते हैं! 

(2) राज्यमत्री (Minister of State in hindi) –

यह मंत्रिमंडलीय स्तर के नीचे का मंत्री होता है! यद्यपि तकनीकी तौर पर कैबिनेट मंत्री व इनमें कोई अंतर नहीं होता है, उनके उनके वेतन, भत्ते आदि में कोई अंतर नहीं है! किंतु व्यवहार में इन्है कैबिनेट मंत्रियों की तुलना में कम महत्वपूर्ण होते हैं! इन्हें मंत्रिमंडल की बैठक में भाग लेने का अधिकार नहीं होता है! 

राज्यमंत्री भी दो प्रकार के होते हैं – स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री तथा वे राज्य मंत्री जी ने स्वतंत्र प्रभार नहीं दिया गया हो! स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री अपने विभाग के प्रमुख होते हैं तथा कैबिनेट बैठक में बुलाए जाने पर भाग लेते हैं! जबकि दूसरे प्रकार के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार नहीं दिया जाता है, प्राय: किसी कैबिनेट मंत्री के अधीन कार्य करते हैं!  

(3) उपमंत्री (Vice Minister in hindi) – 

उपमंत्री तीसरे स्तर के मंत्री होते हैं! यह या तो कैबिनेट मंत्री के अधीन या राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अधीन कार्य करते हैं! यह विभागों में प्रशासनिक कार्यों को भार उठाएं रहते हैं! इन्हें मंत्रिमंडल की बैठक में भाग लेने का कोई अधिकार नहीं होता! उपमंत्री कैबिनेट अथवा राज्य मंत्रियों को उनके प्रशासनिक, राजनीतिक और संसदीय कार्य में सहायता के लिए नियुक्त किया जाता!  

(4) संसदीय सचिव (Parliamentary secretary in hindi) – 

यह मंत्रिपरिषद (mantri parishad) के अंतिम श्रेणी में आते हैं! इनके पास कोई विभाग नहीं होता है! इन्है कैबिनेट मंत्री व राज्य मंत्री के साथ उनके संसदीय कार्यो में सहायता के लिए नियुक्त किया जाता है! हालांकि 1967 से, राजीव गांधी की सरकार के प्रथम विस्तार को छोड़कर कोई भी संसदीय सचिव नियुक्त नहीं किया गया है! 

मंत्रिपरिषद का आकार (Size of council of ministers in hindi) – 

मूल संविधान में मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या निर्धारित नहीं की गई थी! प्रधानमंत्री अपने विवेकाधिकार के आधार पर मंत्रिपरिषद के आकार को सुनिश्चित करते थे! 

परंतु 91 वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2004 के द्वारा यह निर्धारित किया गया कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा के सदस्यों के 15% से अधिक नहीं होगी, इसमें प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे! इस प्रकार प्रधानमंत्री अब मंत्रिपरिषद में सदस्यों की अधिकतम संख्या के मामले में अपने विवेक का प्रयोग नहीं कर सकते! 

मंत्रियों की नियुक्ति (Appointment of ministers in hindi) – 

संविधान के अनुच्छेद 75 (1) के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर करेगा! इसका तात्पर्य है कि राष्ट्रपति केवल उन्हीं व्यक्तियों को ही मंत्री नियुक्त कर सकता है, जिनकी सिफारिश प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है! इस संबंध में राष्ट्रपति के पास कोई विवेकाधिकार शक्ति नहीं है! 

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