भौतिक भूगोल क्या है? भौतिक भूगोल की प्रकृति, परिभाषा, महत्व, शाखाएँ (bhautik bhugol)

भौतिक भूगोल क्या है (bhautik bhugol kya hai) –

भौतिक भूगोल (bhautik bhugol),भूगोल की दो मुख्य शाखाओं में से एक है! जिसका अध्ययन भूगोल के विषय वस्तु को प्रदर्शित करना अथवा पृथ्वी का वर्णन करना है! आरंभ में भूगोल को Geography अर्थात Geo Earth अर्थात पृथ्वी तथा Graphy=Description अर्थात वर्णन करना मात्र माना जाता था अर्थात् भूगोल का अर्थ पृथ्वी का अध्ययन करने वाला विषय था और आरंभ में इसे पृथ्वी का वर्णन करना मात्र समझा जाता था! यही नहीं पृथ्वी के भौतिक पर्यावरण जैसे उच्चावच, जल तथा वायु के क्रमबद्ध अध्ययन को ही भौतिक भूगोल समझा जाता रहा है!

भौतिक भूगोल की परिभाषा (bhautik bhugol ki paribhasha) – 

आर्थरहोम्स के अनुसार,”भौतिक पर्यावरण का अध्ययन ही भौतिक भूगोल है जो कि ग्लोब के धरातलीय उच्चावच, सागर और महासागरों तथा वायु के विवरणों का ज्ञान कराता है!

कांन्ट के अनुसार,” भौतिक भूगोल विश्व के ज्ञान का प्रथम भाग है, यह वास्तव में सारभुत प्रारंभिक तथ्य है जिसके द्वारा विश्व के वास्तु- बोध को समझा जा सकता है! 

भौतिक भूगोल की प्रकृति एवं विषय क्षेत्र (bhautik bhugol ki prakriti avn vishay vastu) –

भूगोल में पृथ्वी का वर्णन होता है! पृथ्वी ही भूगोल का अध्ययन क्षेत्र है! पृथ्वी का अध्ययन वैसे तो कई अन्य विषय भी करते हैं, किंतु भूगोल में पृथ्वी का अध्ययन क्षेत्र वहां तक सीमित है जहां स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल और जैव मंडल परस्पर मिलते हैं!

भौतिक भूगोल में भूमंडल (भू-आकृतियॉं, प्रवाह, उच्चावच) , वायुमंडल (इसकी बनावट, संरचना, तत्व एवं मौसम तथा जलवायु, तापक्रम, वायुदाब, वायु, वर्षा, जलवायु के प्रकार इत्यादि) जलमंडल (समुद्र, सागर, झीलें तथा जल परिमंडल से संबद्भ तत्व) जैव मंडल (जीव के स्वरूप – मानव तथा वृहद जीव उसके पोषक प्रक्रम, जैसे – खाद्य श्रृंखला, पारिस्थैतिक प्राचल एवं पारिस्थैतिक संतुलन आदि का अध्ययन किया जाता है!

भौतिक भूगोल की शाखाऍ (bhautik bhugol ki shakha) – 

भौतिक भूगोल (bhautik bhugol) की शाखाऍ निम्न प्रकार से है 

1भु-आकृति विज्ञान (bhuaakriti vigyan) –

भू आकृति विज्ञान का फिजिकल ज्योग्राफी से घनिष्ठ संबंध है! पृथ्वी की संरचना, पृथ्वी के अभ्यंतर तथा कोर, भूपटल तथा पृथ्वी की आंतरिक शक्ति और चुंबकत्व शक्ति का प्रभाव स्थलाकृतियो पर पड़ता है! स्थलाकृतियों का अध्ययन भू आकृति विज्ञान के अंतर्गत किया जाता है! जो कि फिजिकल ज्योग्राफी से संबंधित है अतः भौतिक भूगोल और भु-आकृति विज्ञान में घनिष्ठ संबंध है! 

2. जलवायु विज्ञान (jalvayu vigyan)-   

फिजिकल ज्योग्राफी में स्थलाकृतियों के निर्माण पर तापक्रम, वर्षा, वायुमंडल की आर्द्रता, शुष्कता, पवन की दिशा और मौसम का सीधा प्रभाव होता है! जैसे- उष्णकटिबंधीय प्रदेशों में अधिक वर्षा के कारण भूमि की कटाव की क्रिया होती रहती है ! समशीतोष्ण जलवायु की पेटियों में साधारण ताप और बर्फ होने से, सामान्यत नदियो द्वारा स्थलाकृतियो मैं अत्यंत धीमे परिवर्तन आते हैं, क्योंकि तापमान, वर्षा, वायुमंडल की आर्द्रता, शुष्कता, पवन की दिशा और मौसम का अध्ययन जलवायु विज्ञान तथा भौतिक भूगोल दोनों में किया जाता है, इसलिए दोनों विषयों का परस्पर संबंध है 

3. जल विज्ञान (jal vigyan) –  

स्थलाकृतियों के निर्माण तथा विकास में नदियों की घाटियों, झीलो, समुद्र तटों और हिमानी घाटियों का प्रमुख प्रभाव रहता है! किसी देश की भू आकृति का विश्लेषण करते समय उस प्रदेश में बहने वाली नदियों की घाटियों की लम्बाईयो को नापा जाता है और उनकी घाटियों में ढालो, प्रपातों तथा जलधाराओं के वेगों को भी नापा जाता है! इन तथ्यों का अध्ययन जल विज्ञान में होता है, अतः भौतिक भूगोल एवं जल विज्ञान दोनों आपस में सह-संम्बंधित है 

4. मृदा विज्ञान (mrida vigyan) –

मृदा विज्ञान के अध्ययन में मिट्टियों का विश्लेषण किया जाता है, उनमें रेत, बालू और चीका मिट्टी का वर्गीकरण करते समय कणों के आकार के अनुसार उनका विभेदन करते हैं! मिट्टियों में लवण युक्त तत्वों और अम्लीय तत्व की मात्राऍ नापते हैं! मिट्टियों के रासायनिक गुणों को परखते समय, उसमें सिलिका, फास्फोरस, ह्यूमस, चुना आदि तत्वों की मात्राऍ मालूम की जाती है! अतः (bhautik bhugol) फिजिकल ज्योग्राफी एवं मृदा विज्ञान का घनिष्ठ सम्बन्ध है!

भौतिक भूगोल का महत्व (bhautik bhugol ka mahtav) –

प्रसिद्ध भूगोलविद् (Hardshonue) के अनुसार” भूगोल का उद्देश्य पृथ्वी की वैज्ञानिक व्याख्या मानव विश्व के रूप में करना है।”अर्थात पृथ्वी का मानवीय संसार के रूप में वैज्ञानिक रीति से अध्ययन तथा विकास में योगदान करना भूगोल का मूल उद्देश्य माना गया है, किंतु मानवीय संसार के रूप में पृथ्वी का वैज्ञानिक रीति से वर्णन तब तक संभव नहीं हो सकता है।

जब तक कि मनुष्य और भौतिक पर्यावरण के पारस्परिक संबंधों को ना समझ लिया जाए, क्योंकि पृथ्वी की भौतिक परिस्थितियाॅ मानव जीवन को प्रभावित करती है। मानव की उन्नति पृथ्वी की भौतिक परिस्थितियाॅ ही निर्धारित करती है। अर्थात मनुष्य भौतिक पर्यावरण से परे नहीं रह सकता है।

प्रश्न :- भौतिक भूगोल का जनक किसे कहा जाता है?

उत्तर :- भौतिक भूगोल (bhautik bhugol) का जनक पोलोडोनियन कहा जाता है!

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