वायुमंडल की संरचना (Structure of Atmosphere) का वर्णन कीजिए

वायुमंडल की संरचना (Structure of Atmosphere in hindi)-

वायुमंडल का विस्तार 10,000 किमी.की ऊंचाई तक मिलता है, जो वायुमंडल की अलग-अलग घनत्व तथा तापमान वाली विभिन्न परतों में विभक्त होता है! तापमान की स्थिति तथा अन्य विशेषताओं के आधार पर इसे पॉच विभिन्न स्तर में बांटा गया है! जो इस प्रकार है –

 (1) क्षोभमंडल (Troposphere in hindi) – 

क्षोभमंडल वायुमंडल की सबसे निचली परत है! जिसकी ऊंचाई ध्रुवों पर 8 किमी.तथा विषुवत रेखा पर लगभग 18 किमी.तक होती है! समस्त मौसम संबंधित परिवर्तन जैसे – बादल, आंधी एवं वर्षा आदि इसी मंडल में होते हैं! क्षोभमंडल में तापमान की गिरावट की दर प्रति 165 मीटर की ऊंचाई पर 1°C अथवा 1 किमी की ऊंचाई पर 6.4°C होती है! इसे सामान्य हास दर कहा जाता है! 

क्षोभमंडल को संवहन मंडल कहते हैं, क्योंकि संवहन धारा इसी मंडल की सीमा तक सीमित होती है! इस मंडल को अधोमंडल भी कहते हैं! क्षोभमंडल की ऊपरी सीमा पर अत्यधिक तीव्र गति से चलने वाली पवनों को जेटस्ट्रीम कहा जाता है! 

(2) समताप मंडल (Stratosphere in hindi) – 

इस मंडल में तापमान समान रहता है, इसलिए इसे समताप मंडल कहते हैं! समताप मंडल की ऊंचाई 18 से 32 किमी. तक है! समताप मंडल की मोटाई ध्रुवों पर सबसे अधिक होती है, कभी-कभी विषुवत रेखा पर का लोप हो जाता है! समताप मंडल की ऊपरी सीमा को स्ट्रेटोपाज कहते हैं! 

समताप मंडल में मौसमी घटनाएं जैसे- आंधी, बादलों की गरज, बिजली कड़कना, धूल-कण एवं जलवाष्प आदि कुछ नहीं होती हैं! इस मंडल में वायुयान उड़ाने की आदर्श दशाएँ पाई जाती है! कभी-कभी समताप मंडल में विशेष प्रकार के मेघों का निर्माण होता है, जिसे मूलाभ मेघ कहते हैं! 

समताप मंडल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ओजोन परत की उपस्थिति है, जिसका विस्तार 32 से 60 किमी की ऊंचाई तक पाया जाता है! 

(3) मध्य मंडल (Mesosphere in hindi) –

60 से 80 किमी ऊंचाई वाला वायुमंडलीय भाग मध्यमंडल कहलाता है! इसमें तापमान में अचानक गिरावट आती है, जो वायुमंडल का न्यूनतम तापमान होता है! इस न्यूनतम तापमान की सीमा को मिजोपास (Mesopause) कहते हैं! इसके ऊपर जाने पर तापमान में वृद्धि होती है! 

(4) आयनमंडल (Ionosphere in hindi) –  

आयनमंडल की ऊंचाई 80 से 640 किमी. के मध्य है! आयनमंडल में विस्मयकारी विद्युतीय एवं चुंबकीय घटनाएं होती रहती है, क्योंकि इस मंडल में विद्युत आवेशित कणों की अधिकता होती है! वायुमंडल की इस परत से विभिन्न आवृत्तियों की रेडियो तरंगे परावर्तित होती हैं! यह भाग कम वायुदाब तथा पराबैंगनी किरणों द्वारा आयनीकृत होता रहता है! 

(5) बाह्यमंडल (Exosphere in hindi) – 

640 किमी. से ऊपर के भाग को बाह्यमंडल कहा जाता है! इसकी कोई ऊपरी सीमा निर्धारित नहीं है! बाह्य मंडल में हाइड्रोजन एवं हीलियम गैस की प्रधानता होती है! अज्ञात शोधों के अनुसार यहां नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हीलियम एवं हाइड्रोजन की अलग-अलग परतें  विद्ममान रहती हैं! इस मंडल में 1,000 किमी. की ऊंचाई के बाद वायुमंडल अत्यंत विरल हो जाता है और अंततः 10,000 किमी की ऊंचाई के बाद क्रमशः अंतरिक्ष में विलीन हो जाता है! 

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