स्टेम सेल क्या है? Stem Cell के प्रकार एवं उपयोग

स्टेम सेल क्या है (what is stem cell in hindi) –

क्लोनिंग के विकास के साथ ही प्रौद्योगिकी ने एक और नए क्षेत्र का पैदा किया जो कि चिकित्सा विज्ञान के नाम से जाना जाता है! इसके अंतर्गत ऐसी कोशिका का अध्ययन किया जाता है जिसमें वृद्धि, विभाजन एवं विभेदन कर नए ऊतकों से चिकित्सा पर विचार व प्रयोग शुरु हुए! अस्थि मज्जा से प्राप्त ये कोशिकाएं शरीर में रक्त को पैदा करती हैं और कैंसर आदि रोगों में उनका प्रत्यारोपण कर पूरी रक्त प्रणाली को पुनर्सचित किया जा सकता है! ऐसी कोशिकाओं को स्टेम सेल (Stem Cell) कहते हैं! 

ऐसी कोशिकाएं जिनमें शरीर के किसी भी अंग की कोशिका के रूप में विकसित होने की क्षमता विद्यमान होती है, स्तंभ कोशिका या स्टेम सेल (Stem Cell) कहलाती है! स्तंभ कोशिकाओं में ऐसे लक्षण पाए जाते हैं कि यह विभाजन द्वारा अपनी संख्या को दीर्घकाल तक बढ़ाती रहती है! साथ ही, ये कुछ निश्चित रासायनिक संकेतों को ग्रहण करने के बाद विशेषीकृत कोशिकाओं में विभेदित या रूपांतरित हो सकती है! स्तंभ कोशिका बहुकोशिकीय जीवो में पाई जाती है! 

स्टेम सेल के प्रकार (Types of Stem Cell in hindi) – 

स्टेम सेल शरीर के क्षतिग्रस्त भागों को ठीक करने में उपयोगी होती है! यह दो प्रकार की होती है -(1) भ्रूणीय स्तंभ कोशिकाएं (Embryonic Stem Cells) (2) वयस्क स्तंभ कोशिकाएं (Adult Stem cells) 

(1) भ्रूणीय स्तंभ कोशिकाएं (Embryonic Stem Cells in hindi) – 

भ्रूण की शुरुआती अवस्था से प्राप्त की गई कोशिकाएं ‘भ्रूणीय स्तंभ कोशिकाएं’ कहलाती है! इस प्रकार की स्तंभ कोशिकाओं से शरीर के लगभग प्रत्येक भाग का निर्माण किया जा सकता है! यह कोशिकाएं कई बार विभाजित होकर ऐसी कोशिकाएँ बनाती है जो पूर्ण रूप से सक्षम होती है! 

(2) वयस्क स्तंभ कोशिकाएं (Adult Stem cells in hindi) –

यह स्तंभ कोशिका संपूर्ण शरीर में पाई जाती है यह बच्चों में वृद्धों की अपेक्षा अधिक संख्या में उपस्थित होती है शरीर की टूट-फूट होने पर क्षतिपूर्ति के लिए आवश्यक होती है वयस्क स्टेम सेल को अस्थि मज्जा, पेरीफेरल, रक्त, ऊतक, मांसपेशी, कार्डियक   टिश्यूज,कार्टिलेज, ब्रेन टिश्यूज इत्यादि से प्राप्त किया जाता है! 

स्टेम सेल के लाभ एवं उपयोग (Benefits or uses of Stem cell in hindi)- 

(1) दांत की समस्या से निजात पाने के लिए स्टेम सेल (stem koshika) द्वारा को तैयार कर उन्हें मसूड़ों में इंप्लांट कर दिया जाता है जिससे दांत निकल आता है! 

(2) इसके द्वारा अल्जाइमर, पार्किंसंस, ल्यूकीमिया, गठिया, ब्रेन की चोट, हदय रोग व मधुमेह जैसी बीमारियों का इलाज अत्यंत आसान हो जाएगा! 

(3) वैज्ञानिकों ने एंब्रायोनिक स्टेम सेल के द्वारा प्रयोगशाला में टोटीपोटेंट स्टेम सेल की पतली चादर विकसित कर ली है! इस चादर को क्षतिग्रस्त रोगियों में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है! इसके बाद नजर को ठीक प्रकार से काम करने लग जाती है! 

(4) स्टेम सेल कोशिकाओं के द्वारा मानव विकास की प्रक्रिया के उस प्रत्येक चरण को समझा जा सकेगा, जिससे गर्भाशय में विकसित हो रहे भ्रूण को समझना कठिन है!

 (5) स्टेम सेल के द्वारा नई अस्थियों का विकास कर अस्थि संबंधी रोगों के उपचार को सरल बनाया जा सकेगा! 

(6) भविष्य में दवाओं का परीक्षण स्तंभ कोशिका से बने भ्रूण पर किया जाना संभव हो सकेगा, जिससे बंदरो एवं शोध की आवश्यकता नहीं पडेगा! 

(7) अस्थि मज्जा की स्तंभ कोशिकाओं से रक्त कोशिकाएँ बनाई जा सकती है. जिससे रक्त संचार प्रणाली से संबंधित बीमारियों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा! 

(8) HIV  संक्रमण से नष्ट हुई कोशिकाओं को फिर से बनाया जा सकेगा! 

भारत में स्टेम सेल अनुसंधान (Stem Cell Research in India in hindi) – 

केंद्र सरकार ने हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी परिसर में 25 नवंबर, 2007 को देश के पहले स्टेम सेल तकनीक और पुनरुत्पादक औषधि पर चिकित्सकीय अनुसंधान सुविधा केंद्र की स्थापना की है! इस केंद्र का उद्देश्य स्टेम सेल पर आधारभूत अनुसंधान करना तथा अनुवांशिक एवं जीवन के लिए गंभीर रोगों का निदान ढूंढना है! 

केंद्र सरकार का जैव-प्रौद्योगिकी विभाग स्टेम सेल अनुसंधान को बढ़ावा देने पर काफी गंभीर है! इसमें शामिल कार्यक्रम के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभिन्न समितियां बनाई गई है और भ्रूण एवं वयस्क स्टेम सेल दोनों मामलों के लिए कई परियोजनाएं क्रियान्वित की गई है! 

प्रश्न :- स्तंभ कोशिका किसे कहते हैं (stem koshika kise kahate hain)

उत्तर :- ऐसी कोशिकाएं जिनमें शरीर के किसी भी अंग की कोशिका के रूप में विकसित होने की क्षमता विद्यमान होती है, स्तंभ कोशिका या स्टेम सेल (Stem Cell) कहलाती है! स्तंभ कोशिकाओं में ऐसे लक्षण पाए जाते हैं कि यह विभाजन द्वारा अपनी संख्या को दीर्घकाल तक बढ़ाती रहती है!

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