सरोगेसी (surrogacy) क्या है? इसके प्रकार, चुनौतियां, लाभ

सरोगेसी क्या है (surrogacy kya hai) –

सरोगेसी (surrogacy) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कोई निसंतान दंपत्ति संतान सुख की प्राप्ति कर सकता है! जब कोई महिला ऐसे दंपत्ति के बच्चे को अपने पेट में पालती है जो शारीरिक या चिकित्सकीय कारणों से या तो गर्भधारण करने में या तो उसे पेट में पालने असमर्थ है, तो इसे ‘सरोगेसी’ की संज्ञा दी जाती है! 

दूसरे शब्दों में सरोगेसी से तात्पर्य ‘किराए की कोख’ से है क्योंकि इसमें उस महिला और दंपत्ति के बीच एग्रीमेंट होता है जिसके तहत महिला बच्चे को अपने कोख में पालती है और बच्चे को जन्म देने के बाद वह उसे दंपत्ति को सौंपा देती है! इस तरह बच्चे को जन्म देने वाली महिला को सरोगेट मदर कहा जाता है! 

सरोगेसी के प्रकार (Types of surrogacy in hindi) – 

(1) परंपरागत सरोगेसी (Traditional surrogacy in hindi) –

परंपरागत सरोगेसी में प्राकृतिक और कृत्रिम निषेचन किया जाता है, जिसमें बच्चे के पिता के शुक्राणुओं का सरोगेट मदर के अंडाणुओं के साथ निषेचन कराया जाता है, जिसकी वजह से जन्म लेने वाले बच्चों का जेनेटिक रूप से संबंध अपने पिता और सरोगेट मदर के साथ होता है! 

लेकिन यदि इस प्रक्रिया के लिए दाता शुक्राणु का प्रयोग किया जाता है तो जन्म लेने वाले का संबंध अपने पिता से तो नहीं होगा, लेकिन सरोगेट मदर से होगा! इसलिए इस तरीके को अपनाने के लिए पिता के शुक्राणु का इस्तेमाल बेहतर समझा जाता है!  

(2) जेस्टेशनल सरोगेट – 

इस प्रक्रिया के अंतर्गत जन्म लेने वाले बच्चे के माता-पिता के अंडाणु और शुक्राणु का आईवीएफ ट्रीटमेंट के जरिए मेल करवा कर ढूंढ को सरोगेट मदर के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है जिसके परिणाम स्वरूप जन्म लेने वाले बच्चे का जेनेटिक संबंध अपने माता-पिता दोनों से होता है! लेकिन इस विधि के द्वारा जन्म लेने वाले बच्चे का कोई संबंध सरोगेट मदर से नहीं होता है! 

सरोगेसी की चुनौतियां (challenges of surrogacy in hindi) – 

(1) यदि किसी कारणवश जन्मजात संतान में कोई दोष हो तो, वास्तविक माता-पिता बच्चे को अपनाने से मना कर सकते हैं! 

(2) अकेली महिला, पुरुष और समलैंगिकों द्वारा सरोगेसी द्वारा बच्चे प्राप्त करने का प्रचलन बढ़ सकता है! 

(3) बच्चे के जन्म के बाद सेरोगेट मदर के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव एवं उनका निराकरण, खर्च आदि की अनदेखी की जा सकती हैं! 

(4) सरोगेसी की 9 महीने की अवधि के दौरान दंपत्ति में किसी कारणवश तलाक होने पर दोनों द्वारा बच्चे की दावेदारी या दोनों के द्वारा बच्चे की दावेदारी न करना!  

(5) बच्चे पैदा करने योग्य होने पर भी जानबूझकर सरोगेसी का उपयोग करना, जैसे – भारतीय सिनेमा में! 

(6) चिकित्सकों एवं दलालों द्वारा धन का लालच देकर गरीब महिलाओं का शोषण किया जा सकता है! 

सरोगेसी के लाभ (Benefits of Surrogacy in hindi) –

(1) बांझपन से जूझ रहे दंपति और व्यक्ति अपने परिवार का विकास करने में सक्षम हो सके।

(2) गर्भकालीन सरोगेसी गोद लेने की तुलना में बच्चे के जन्म के आसपास की परिस्थितियों पर अधिक नियंत्रण प्रदान करती है।

(3) सरोगेट के साथ काम करने का चयन करने से कुछ अवशिष्ट तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है, जो स्वाभाविक रूप से बांझपन उपचार के दौरान होता है।

(4) LGBTQ समुदाय में आशावान माता-पिता को गोद लेने का विकल्प दिया जा सकता है।

(5) सरोगेट मदर और इच्छित माता-पिता के बीच एक बंधन स्वाभाविक रूप से विकसित हो सकता है, जैसे- अनुभव के लिए समर्थन और साझेदारी की परतें जोड़ना।

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