महासागरीय लवणता क्या है? महासागरीय लवणता को प्रभावित करने वाले कारक एवं वितरण

महासागरीय लवणता क्या है (Salinity of ocean water in hindi) – 

सागरीय जल के भार एवं उसमें घुले में पदार्थों के भार के अनुपात को सागरीय लवणता कहते हैं! सामान्य रूप से सागरीय लवणता को प्रति हजार ग्राम जल में लवण की मात्रा के रूप में दर्शाया जाता है! जैसे 30% या 30,  अर्थात – 1000 ग्राम सागरीय जल में 30 ग्राम लवण की मात्रा है! 

महासागरीय लवणता का प्रभाव न केवल उस में रहने वाले जीवो व वनस्पतियों और पड़ता है अपितु महासागर की भौतिक विशेषताएं तापमान, घनत्व, धाराएँ, दबाव आदि भी इससे प्रभावित होती हैं! 

समान लवणता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समलवण रेखा (Isohaline) कहा जाता है और लवणता या खारापन को मापने वाले यंत्र को लवणता मापी कहा जाता है! सागरीय लवणता के कारण जल का घनत्व भी बढ़ता जाता है! 

महासागरीय लवणता का वितरण (mahasagariya lavanta ka vitran) – 

सामान्यतः भू-मध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर सागरीय लवणता में कमी आती है, परंतु भू-मध्य रेखीय भागों में उचित तापक्रम और अधिक वाष्पीकरण होते हुए भी वहां लवणता उतनी अधिक नहीं हो पाती, क्योंकि अधिक जलवृष्टि के कारण सागरों में जल की वापसी होती रहती है! 

पृथ्वी पर उच्च लवणता उत्तरी गोलार्ध में 20° से 40° अक्षांशों तथा दक्षिण गोलार्ध में 10° से 30° अक्षांश के मध्य पाई जाती है! भू-मध्य रेखा पर गहराई के साथ लवणता बढ़ती है तथा पुनः अधिक गहराई होने पर घटने लगती है! उच्च अक्षांशों में भी गहराई के साथ लवणता बढ़ती है! 

इसी प्रकार नदियों के मुहाने वाले भागों में भी लवणता कम पाई जाती है! सागरीय धाराएं भी निश्चित रूप से लवणता को बढ़ाने या घटाने का कार्य करती है! जैसे – गल्फस्ट्रीम की गर्म धारा यूरोप के उत्तर-पश्चिमी तट पर लवणता को बढ़ा देती है और वही लैब्राडोर की ठंडी धारा के कारण उत्तरी अमेरिका के उत्तर-पूर्वी भाग में लवणता घट जाती है! विश्व में सर्वाधिक लवणता टर्की की वॉन झील (330) में पाई जाती है! इसके पश्चात क्रमशः जार्डन का मृत सागर (238) और अमेरिका की ग्रेट साल्ट लेक (220) का स्थान आता है!  

महासागरीय लवणता को प्रभावित करने वाले कारक (mahasagariya lavanta ko prabhavit karne wale karak) –

(1) तापमान और घनत्व में परिवर्तन किसी क्षेत्र की लवणता को प्रभावित करता है क्योंकि जल की लवणता, घनत्व तथा तापमान परस्पर संबंधित होते हैं! 

(2) ध्रुवीय क्षेत्रों में जल की लवणता जल के जमने और पिघलने की प्रक्रिया से प्रभावित होती है! 

(3) समुद्र में कम लवणता विभिन्न जलीय जीवो एवं प्लैंकटन के अस्तित्व को खतरे में डाल सकती है जो पूरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकता है! 

(4) महासागरों की सतह के जल की लवणता मुख्यतः वाष्पीकरण एवं वर्षण पर निर्भर करती है! वाष्पीकरण के द्वारा संबोधित जल वाष्प बनकर उड़ता रहता है और शेष जल में नमक की मात्रा बढ़ती रहती है!

(5) समुद्री धाराएं भी समुद्री जल के खारे पानी की मात्रा को प्रभावित करती है! सामान्य रूप से समुद्री जल की ऊपरी सतह में नीचे की सतह की अपेक्षा अधिक खारापन होता है!

(5) हवाओं की शुष्कता एवं तीव्रता का समुद्री जल के खारेपन पर बहुत प्रभाव पड़ता है! गर्म एवं शुष्क हवाएं वाष्पीकरण अधिक करती है, जिसके परिणामस्वरूप गर्म एवं शुष्क हवाओं वाले क्षेत्र में मिलने वाले समुद्रों के जल में खारेपन की मात्रा में वृद्धि हो जाती है! 

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