कोयला(Koyla), कोयला निर्माण प्रक्रिया , प्रकार, नकारात्मक प्रभाव

Koyla
 

कोयला क्या हैं (koyla kya hai) –

कोयला (koyla) एक ठोस कार्बनिक पदार्थ है जिसको इंधन के रूप में प्रयोग में लाया जाता है ! ऊर्जा के प्रमुख स्रोत के रूप में कोयला अत्यंत महत्वपूर्ण है! कुल प्रयुक्त ऊर्जा का 35% से 40% भाग कोयले से प्राप्त होता है ! कोयले से अन्य दहनशील तथा उपयोगी पदार्थ भी प्राप्त किए जाते हैं ! कोयला आधुनिक औद्योगीकरण का आधार स्तंभ है ! विभिन्न प्रकार के कोयलो में कार्बन की मात्रा अलग-अलग होती है! 

कोयला कैसे बनता है (koyla kaise banta hai) –

प्राचीन समय में किसी स्थान पर कोई जंगल, भूकंप या अन्य किसी कारण से भूगर्भ में धस गये जिससे धीरे-धीरे कोयले की उत्पत्ति हुई! जिस युग में कोयले का निर्माण हुआ, उससे कार्बोनिफेरस महाकल्प कहा जाता है ! इस काल में निर्मित कोयले में 3000 से अधिक प्रकार की वनस्पतियां पाई गई है! भारत में कोयला मुख्यतः ऑस्ट्रेलिया से आयात किया जाता है! (coal manufacturing process)

लगभग 300 मिलयन वर्ष पूर्व पृथ्वी के निचले के जलीय क्षेत्रों में घने वन थे! बाढ़ जैसे प्राकृतिक कारणों की वजह से यह वन मृदा के नीचे दब गए! उनके ऊपर अधिक मृदा जम जाने के कारण वे संपीडित हो गए! जैसे-जैसे वह गहरे होते गए उनका ताप भी बढ़ता गया!

उच्च दाब और उच्च तापमान के कारण पृथ्वी के भीतर मृत पेड़-पौधे धीरे-धीरे कोयले में परिवर्तित होने लगे. कोयले में मुख्य रूप से कार्बन होता है! मृत वनस्पति के, धीरे धीरे प्रक्रम द्वारा कोयले में परिवर्तन की प्रक्रिया को कार्बनीकरण कहते हैं! चूंकि कोयला वनस्पति के अवशेषों से बना होता हैं अतः इसलिए कोयले (koyla)को जीवाश्म ईधन भी कहते हैं! 

कोयला के प्रकार / वर्गीकरण (koyla ke prakar) –

ऐंथ्रासाइट कोयला (Anthracite Coal) – 

ऐंथ्रासाइट कोयले की सर्वोत्तम किस्म होती है ! इसमें कार्बन की मात्रा 85% से अधिक होती है! यह कोयला मजबूत ,चमकदार ,काला होता है ! ये कोयला नीली ज्वाला के साथ जलने पर बहुत ऊर्जा देता है उसका प्रयोग घरों तथा व्यवसायों में किया जाता है! 

बिटुमि्न्स कोयला (Bitumins Koyla) –

शुद्धता में ऐंथ्रासाइट के बाद इसी का स्थान है इसे मुलायम कोयला के नाम से भी जाना जाता है ! इसमें कार्बन की मात्रा 70% से 85 % तक होती है ! इसका उपयोग भाप तथा विद्युत संचालित ऊर्जा के इंजनों में होता है! भारत में मध्य प्रदेश में इस प्रकार की कोयले के सर्वाधिक भंडार है ! 

लिग्नाइट कोयला (Lignite Koyla) –

इसे भूरा कोयला भी कहा जाता है! जिसमें कार्बन की मात्रा 60% से 70% तक होती है ! इसमें जलवाष्प की मात्रा अधिक होती है! इसका उपयोग विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है ! यह स्वास्थ्य के लिए अधिक हानिकारक है ! तमिलनाडु के नेवेली से इस का सर्वाधिक उत्पादन होता है! 

पीट कोयला किसे कहते हैं (Pit Koyla ) –

यह कोयला निर्माण की प्रारंभिक अवस्था है इसमें कार्बन की मात्रा 50% से 60% तक होती है! इसे जलाने पर अधिक राख एवं धुआँ निकलता है! यह सबसे निम्न कोटि का कोयला है! इसका इस्तेमाल घरेलू ईंधन के रूप में किया जाता है! 

कोयला के नकारात्मक प्रभाव (Negative Effects Of Koyla in hindi) –

(1) कोयला से निकलने वाले निलंबित कण वायु प्रदूषण का प्रभावी कारक है ! 

(2) कोयले के धान से उस मासों पी के सो जैसे CO2 ch4 को बढ़ावा मिलता है! 

(3) वैश्विक तापन का अकेला सबसे बड़ा जन्मदाता कोयला है ! 

 (4) कोयला जलाने पर उत्पन्न ने बड़ी मात्रा में फ्लाई एस (अपशिष्ट ) के भंडारण को ठिकाने लगाने में काफी लागत आती है!

(5) कोयले से निकलने वाले निलंबित कण श्वसन संबंधी विकारों जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस आदि के लिए जिम्मेदार है! 

(6) कोयला दहन अम्लीय वर्षा के लिए जिम्मेदार है! 

कोयले (Koyla) से संबंधित प्रश्न उत्तर –

प्रश्न:- सबसे बेस्ट क्वालिटी या सबसे अच्छी किस्म का कोयला कौन सा है?

उत्तर :- इसमें कार्बन की मात्रा 85% से अधिक होती है! यह कोयला मजबूत ,चमकदार ,काला होता है ! ये कोयला नीली ज्वाला के साथ जलने पर बहुत ऊर्जा देता है उसका प्रयोग घरों तथा व्यवसायों में किया जाता है!

प्रश्न :- formation of coal in hindi

उत्तर :-प्राचीन समय में किसी स्थान पर कोई जंगल, भूकंप या अन्य किसी कारण से भूगर्भ में धस गये जिससे धीरे-धीरे कोयले की उत्पत्ति हुई! जिस युग में कोयले का निर्माण हुआ, उससे कार्बोनिफेरस महाकल्प कहा जाता है ! इस काल में निर्मित कोयले में 3000 से अधिक प्रकार की वनस्पतियां पाई गई है! भारत में कोयला मुख्यतः ऑस्ट्रेलिया से आयात किया जाता है!

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