हिमालय पर्वत श्रृंखला एवं हिमालय के प्रादेशिक विभाजन का विस्तार से वर्णन कीजिए

हिमालय पर्वत श्रृंखला का विस्तार से वर्णन कीजिए Himalaya parvat

हिमालय पर्वत (Himalaya Parvat) –

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भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, जहां आज हिमालय पहाड़ है वहां टेथिस नामक का उथला समुद्र था! हिमालय की उत्पत्ति के संबंध में आधुनिक प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत प्रचलित है! हिमालय पर्वत (himalaya parvat) श्रेणियों का ढाल प्रायद्वीपीय पठार की ओर उत्तल एवं तिब्बत की ओर अवतल है! 
 
हिमालय विश्व का सर्वोच्च पर्वत है. जिसकी सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई  लगभग 8848.86 मीटर है! भू वैज्ञानिकों के अनेक वर्षों के शोध के बाद पता चला कि हिमालय जीवित पर्वत है यह हर वर्ष कुछ मिलीमीटर इसका आकार बढ़ रहा है!
 
माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 1954 में मापी गई थी. सर्वे ऑफ इंडिया (Indian survey) ने 66 साल पहले 1954 में माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8848 मीटर मापी थी! 15 साल पहले नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई अब 8848.86 मीटर हो गई है! 
 
हिमालय की भू आकृतिक एवं उच्चावच का क्रमबद्ध अध्ययन करने के लिए, इसे उत्तर से दक्षिण की ओर निम्न चार प्रदेशों में विभाजित किया जाता है –
 

हिमालय पर्वत श्रृंखला का विस्तार से वर्णन (Himalaya Parvat Sankhrla ka Vistar Se Varnan) –

 
(1) ट्रांस हिमालय क्षेत्र 
(2) हिमाद्री अर्थात सर्वोच्च या वृहद हिमालय 
(3) लघु या मध्य हिमालय 
(4) शिवालिक अर्थात निम्न या बाहय हिमालय
 

(1) ट्रांस हिमालय क्षेत्र (Trans Himalaya parvat)  –  

हिमालय पर्वत का सबसे उत्तरी भाग है ट्रांस हिमालय की चौड़ाई लगभग 40 किमी तथा ऊंचाई 3,000 से 4,300 मी. है!इस क्षेत्र में कैम्ब्रियन युग से लेकर टरशरी युग तक की चट्टाने पाई जाती है तथा ये जीवाश्म से युक्त क्षेत्र है! 
 
ट्रांस हिमालय के अंतर्गत काराकोरम, लद्दाख, जाॅस्कर, आदि पर्वत श्रेणी आती है! K-2 या गाॅडविन ऑस्टिज काराकोरम पर्वत की सर्वोच्च चोटी है,  जो भारत की सबसे ऊंची चोटी है! 
 

(2) हिमाद्री अर्थात सर्वोच्च या वृहद हिमालय (Grater Himalaya parvat) –

हिमालय की सबसे ऊंची श्रेणी है इसकी औसत ऊंचाई 6000 मीटर और चौड़ाई लगभग 25 किमी.है. यह श्रेणी अनेक नदियों तथा हिम नदियों का उदगम क्षेत्र है इस श्रेणी को सेंट्रल हिमालय भी कहा जाता है! इस श्रेणी में पाए जाने वाले चट्टानों में ग्रेनाइट, नीस, तथा शिष्ट प्रमुख है. अत्याधिक संपीड़न के कारण इस क्षेत्र की चट्टाने पूर्णतया कायांतरित हो चुकी हैं! 
 
संसार की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट इसी पर्वत श्रेणी में स्थित है कंचनजंगा, नंगापर्वत,नंदादेवी, कामेट, नामचाबरवा आदेश के प्रमुख सीकर है! वृहद हिमालय लघु हिमालय से मैन सेंट्रल थ्रस्ट के द्वारा अलग होती है! 
 

(3) लघु या मध्य हिमालय(Mid Himalaya parvat) – 

इस श्रेणी का विस्तार महान हिमालय के दक्षिण में है, लघु हिमालय की औसत चौड़ाई लगभग 80 किमी है तथा औसत ऊंचाई 1300 से 1500 मी. के बीच है परंतु इस श्रेणी की अनेक चोटियों को ऊंचाई 5000 मीटर से भी अधिक है! 
 
लघु हिमालय सामान्यतः जीवाश्मरहित, परतदार अथवा परिवर्तित चट्टाने पाई जाती है स्लेट, चुना-पत्थर और क्वार्ट्ज इसकी प्रमुख चट्टाने हैं. भारी मात्रा में वनों की कटाई व नगरीकरण के कारण इस प्रदेश में बड़े पैमाने पर अपरदन होता है! 
 
पीरपंजाल, धौलाधार, मसूरी, नागटीबा एवं महाभारत लघु हिमालय की प्रमुख श्रेणियां है. वृहद एवं लघु हिमालय के मध्य कश्मीर घाटी लाहुल- स्फीति,कांगड़ा और कुल्लू  की घाटियां मिलती है! शिमला, कुल्लू, मनाली, मसूरी  दार्जिलिंग आदि लघु हिमालय में है. यहां अल्पाइन चारागाह है जिसे कश्मीर में घाटी में मर्ग (गुलमर्ग, सोनमर्ग) तथा उत्तराखंड में वुग्याल या पयार कहा जाता है! 
 
उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में हिमशिखरों की तलहटी में जहाँ टिम्बर रेखा अर्थात पेडों की पंक्तियाँ समाप्त हो जाती हैं, वहाँ से हरे भरे मखमली घास के मैदान आरम्भ होने लगते हैं। आमतौर पर ये 7 से 10 हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित होते हैं। गढ़वाल हिमालय में इन मैदानों को बुग्याल कहा जाता है।
 

(4) शिवालिका या निम्न या बाहय हिमालय (Shivalika Himalaya parvat) – 

यह हिमालय का नवीनतम भाग है, शिवालिका श्रेणी की चौड़ाई 10 से 50 किमी. है तथा उसकी ऊंचाई लगभग 1200 मी. है इसकी कुल लंबाई 24 किमी. है! यह जम्मू कश्मीर राज्य के जम्मू डिवीजन से लेकर असम तक फैला हुआ है! 
 
शिवालिक पर्वत में अपर टर्शियरी युग की चट्टाने पाई जाती है! इन चट्टानों में बलुआ पत्थर, चिकनी मिट्टी, कांगलोमिरेट तथा चूने का पत्थर आदि मुख्य  रूप से पाए जाते हैं! शिवालिका एवं लघु हिमालय के मध्य बहुत-सी देशांतरीय घाटियाँ स्थित है! 
 
शिवालिका एवं लघु हिमालय के बीच कई घाटियाँ है, जैसे- काठमांडू की घाटी! पश्चिम में दून या द्वार कहते हैं. जैसे- हरिद्वार और देहरादून! शिवालिका के निचले भाग को तराई कहते हैं लघु हिमालय, शिवालिका से मेन बाउंड्री फॉल्ट के द्वारा अलग होती है! 
 

हिमालय पर्वत की उत्पत्ति कैसे हुई (himalaya parvat ki utpatti kaise hui) –

हिमालय की उत्पत्ति के संबंध में आधुनिक सिद्धांत प्लेट विवर्तनिक प्रचलित हैं! इस सिद्वांत के अनुसार लगभग 65 मिलियन वर्ष पूर्व आज के हिमालय के स्थान पर एक विस्तृत टेंथिस सागर फैला हुआ था! टेंथिस सागर वास्तव में एक भारी भू-सन्नति के रूप में फैला हुआ था! 
 
इस प्रक्रिया द्वारा टेंथिस भू-सन्नति में पार्श्विक संपीड़न आरंभ हुआ! संपीड़न के फलस्वरुप टेंथिस सागर में निक्षेपित अवसाद से संकुचन एवं वलन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई! जिससे अंतत: हिमालय की तीन समांतर श्रेणीयों का उद्भव हुआ! हिमालय पर्वत के शिखर का उत्थान आज भी हो रहा है!  
 

हिमालय का प्रादेशिक विभाजन (Himalaya ka Padeshik Vibhajan)-

       भाग   लंबाई                 विस्तार
पंजाब हिमालय 560km सिंधु एवं सतलज नदियों के मध्य
कुमायूँ हिमालय 320km सतलाज एवं काली नदियों के मध्य
नेपाल हिमालय 800km काली एवं तीस्ता नदियों के मध्य
असम हिमालय 720km तीस्ता एवं ब्रह्मपुत्र नदियों के मध्य
 

प्रादेशिक विभाजन के आधार पर हिमालय को चार भागों में बांटा जाता है, हिमालय का प्रादेशिक विभाजन (Himalaya ka Padeshik Vibhajan) इस प्रकार है –

 

(1) पंजाब हिमालय (Panjab Himalaya) –

पंजाब हिमालय, हिमालय का सबसे पश्चिमी भाग है, जो सिंधु और सतलज नदियों के मध्य में लगभग 560 किमी.लंबाई में विस्तृत पर्वतीय भाग है. यह पर्वतीय भाग कश्मीर तथा हिमाचल हिमालय में विभक्त है. पीरपंजाल, लद्दाख काराकोरम, जास्कर व धोलावीरा पंजाब हिमालय की प्रमुख श्रेणियां हैं!

कश्मीर हिमालय जम्मू कश्मीर राज्य में लगभग 3.5 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला है. कश्मीर हिमालय का लद्दाख प्रदेश एक शीत मरुस्थल है! हिमाचल हिमालय का क्षेत्रफल 4,500 वर्ग किमी है, हिमाचल प्रदेश में दीर्घ हिमालय, लघु हिमालय तथा शिवालिक तीनों को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है! 

(2) कुमायूॅं हिमालय (Kumayu Himalaya) – 

कुमायूॅं हिमालय सतलज तथा काली नदियों के मध्य में लगभग 320 किमी.की लंबाई में विस्तृत पर्वतीय है, जिसका क्षेत्रफल 38,000 वर्ग किमी. है! नंदादेवी कुमायूॅं हिमालय सर्वोच्च शिखर है.जिसकी ऊंचाई 7,817 किमी. है! सतलज एवं काली नदिया इसकी पश्चिमी तथा पूर्वी सीमाएं बनाती हैं!

मसूरी, नैनीताल, रानीखेत, अल्मोड़ा, बागेश्वर आदि प्रसिद्ध पर्यटन स्थल तथा बद्रीनाथ, केदारनाथ, हरिद्वार तथा हेमकुंड साहिब आदि तीर्थस्थल कुमायूं हिमालय में स्थित है! 

(3) नेपाल हिमालय (Nepal Himalaya) – 

यह हिमालय का सबसे लंबा भाग है, जो काली एवं तीस्ता नदियों के मध्य में लगभग 800 किमी.की लंबाई में स्थित है. इसका अधिकांश भाग नेपाल देश में विस्तृत है तथा कुछ भाग भारत के सिक्किम राज्य में है तथा कुछ क्षेत्र प. बंगाल में है! विश्व का सबसे ऊंचा पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट नेपाल हिमालय में स्थित है.माउंट एवरेस्ट के अलावा कंचनजंगा, मकालू, धौलागिरि, तथा अन्नपूर्णा यहां की प्रमुख पर्वतीय चोटियां है! 

(4) असम हिमालय (Aasam Himalaya) – 

हिमालय का सबसे पूर्वी भाग है तथा इसका विस्तार पश्चिम में तिस्ता से लेकर पूर्व में ब्रह्मपुत्र के मध्य में 720 किमी.और क्षेत्रफल 67,500 वर्ग किमी. है.इस भाग में हिमालय की ऊंचाई अन्य भागों से कम है!

हिमालय पर्वत के प्रमुख ग्लेशियर (himalaya parvat ke pramukh glacieri) –

 हिमनद का नाम (name of glacier in hindi) 

         स्थिति

लंबाई ( KM ) 

       सियाचिन

     काराकोरम

         75

       सासैनी

     काराकोरम

         68

       हिस्पारा

     काराकोरम

         61

       बियाफो

     काराकोरम

         60

       बाल्टोरो

     काराकोरम

         58

       चोगो लूंगमा

     काराकोरम

         50

       कोडोंपिन

     काराकोरम

         47

       रिमो

     काराकोरम

         40

       पिंडारी

     उत्तराखंड

         30

       पुन्माहा

     कश्मीर

         27

       गंगोत्री

     उत्तराखंड

         26

       जेमू

     सिक्किम/नेपाल

         25

       मिलम

     उत्तराखंड

         16

       रूपल

     कश्मीर

         16

       सोना पानी

     हिमाचल प्रदेश

         15

       यमनोत्री

     उत्तराखंड

         14

       सतोपंथ

     उत्तराखंड

         13

      बंदरपूछ

     उत्तराखंड

         12

      दियामीर

     कश्मीर

         11

     
     

हिमालय पर्वत का भारत के लिए महत्व या लाभ (Importance of himalaya in hindi) –

हिमालय पर्वत भारत के लिए भौगोलिक दृष्टि से निम्नलिखित महत्व रखता है –
 
(1) शीतकालीन अवधि में उत्तर में साइबेरिया से आने वाली ठंडी हवाएँ भारत में प्रवेश नहीं कर पाती, जिसके कारण तापमान में अधिक गिरावट नहीं होती है!
 
(2) हिमालय पर्वत श्रेणियां देश की प्रहरी के रूप में खड़ी हैं, जिसके कारण उत्तर की ओर से विदेशी आक्रमण आसान नहीं है!
 
(3) क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में बहुमूल्य वनों, जडी- बुटीया, वन उत्पाद तथा खनिजों के भंडार हैं तथा जल विद्युत उत्पादन की असीम संभावना है!
 
(4) हिमालय विभिन्न प्रकार के वन्य जीवो का प्राकृतिक शरण स्थल है!
 
(5) इस पर्वत में अनेक स्थान धार्मिक तथा पर्यटन की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण माने जाते हैं. जैसे- कैलाश मानसरोवर, केदारनाथ, बद्रीनाथ आदि!
 
(6) हिमालय पर्वत से अनेक सदानीरा नदियां निकलती है, जिससे सिंचाई पेयजल, परिवहन, मत्स्य पालन आदि कार्य किए जाते हैं!
 
(7) हिमालय पर्वत श्रेणियां भारत एवं चीन के मध्य जल विभाजक का कार्य भी करती है!
 
(8) भारत की जलवायु को प्रभावित करने में हिमालय पर्वत श्रेणियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है! जहां वर्षा काल में यह पर्वत श्रंखला एक दीवार बनकर मानसूनी हवा को रोकती है, यही मानसूनी हवाएं इन श्रृंखला से टकराकर वहां वर्षा करती है! 
 

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प्रश्न :- हिमालय की सबसे ऊंची चोटी का क्या नाम है 

उत्तर :- हिमालय की सबसे ऊंची चोटी का माउंट एवरेस्ट है, जो नेपाल हिमालय में स्थित है.माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 1954 में मापी गई थी. सर्वे ऑफ इंडिया ने 66 साल पहले 1954 में माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8848 मीटर मापी थी! 

 

 

इन्हें भी पढ़ें – 
 
 

प्रश्न :-हिमालय पर्वत की ऊंचाई कितनी है

उत्तर :- माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 1954 में मापी गई थी. सर्वे ऑफ इंडिया (Indian survey) ने 66 साल पहले 1954 में माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8848 मीटर मापी थी! 
 

प्रश्न :-वुग्याल (बुग्याल) किसे कहते हैं?

उत्तर :- उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में हिमशिखरों की तलहटी में जहाँ टिम्बर रेखा अर्थात पेडों की पंक्तियाँ समाप्त हो जाती हैं, वहाँ से हरे भरे मखमली घास के मैदान आरम्भ होने लगते हैं। आमतौर पर ये 7 से 10 हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित होते हैं। गढ़वाल हिमालय में इन मैदानों को बुग्याल कहा जाता है।

प्रश्न :- हिमालय पर्वत के लाभ या फायदे बताइए?

उत्तर :- हिमालय पर्वत श्रेणियां देश की प्रहरी के रूप में खड़ी हैं, जिसके कारण उत्तर की ओर से विदेशी आक्रमण आसान नहीं है! क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में बहुमूल्य वनों, जडी- बुटीया, वन उत्पाद तथा खनिजों के भंडार हैं तथा जल विद्युत उत्पादन की असीम संभावना है!

हिमालय विभिन्न प्रकार के वन्य जीवो का प्राकृतिक शरण स्थल है!
इस पर्वत में अनेक स्थान धार्मिक तथा पर्यटन की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण माने जाते हैं. जैसे- कैलाश मानसरोवर, केदारनाथ, बद्रीनाथ आदि!

प्रश्न :- कुमायूं हिमालय की सबसे ऊंची चोटी कौन सी है?

उत्तर :- नंदादेवी कुमायूं हिमालय सर्वोच्च शिखर है, जिसकी ऊंचाई 7,817 किमी. है!

प्रश्न :- पंजाब हिमालय किन दो नदियों के बीच स्थित है

उत्तर :- पंजाब हिमालय, हिमालय का सबसे पश्चिमी भाग है, जो सिंधु और सतलज नदियों के मध्य में लगभग 560 किमी.लंबाई में विस्तृत पर्वतीय भाग है. यह पर्वतीय भाग कश्मीर तथा हिमाचल हिमालय में विभक्त है. पीरपंजाल, लद्दाख काराकोरम, जास्कर व धोलावीरा इसकी प्रमुख श्रेणियां हैं!

2 thoughts on “हिमालय पर्वत श्रृंखला एवं हिमालय के प्रादेशिक विभाजन का विस्तार से वर्णन कीजिए”

  1. सर पर्वत की ऊंचाई तो 2010 की बाद तो कई बार मापी जा चुकी है जिसमें उसकी ऊंचाई को कई बार यह बताया गया कि यह बढ़ चुकी है तो क्या अभी इसकी ऊंचाई 8848 ही मानी जाएगी या फिर कुछ और

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    • हिमालय पर्वत की ऊंचाई तो बढ रही है, परंतु वह बहुत धीमी गति से बढ रही हैं! अभी नयी जानकारी के अनुसार हिमालय की ऊंचाई 8848.86 मी. है

      Reply

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