क्लाउड कंप्यूटिंग क्या है? क्लाउड कंप्यूटिंग के प्रकार एवं लाभ

क्लाउड कंप्यूटिंग क्या है? (What Is Cloud computing in hindi) –

क्लाउड कंप्यूटिंग का सामान्य अर्थ डिजिटल रूप में डाटा के संग्रहण से है! क्लाउड कंप्यूटिंग ऐसी तकनीक है, जो नेटवर्क पर आभासी संसाधनों को उपलब्ध कराती है! क्लाउड कंप्यूटिंग तकनीक में कंप्यूटिंग डाटा एक्सेस से लेकर डेटा स्टोर तक का सारा काम नेटवर्क (सामान्यतः इंटरनेट) पर ही होता है! 

क्लाउड कंप्यूटिंग द्वारा उपलब्ध कराए गए उपयोगी डाटा, प्लेटफॉर्म, सॉफ्टवेयर आदि उपयोगकर्ता के कंप्यूटर सिस्टम में न होकर उस कंपनी के सर्वर पर संग्रहित होते हैं, जो क्लाउड कंप्यूटिंग की सुविधा उपलब्ध करवाती है!

कंप्यूटिंग को तेज और सरलता से उपलब्ध करवाने के लिए पैरेलल कंप्यूटिंग और डिस्ट्रीब्यूटेड कंप्यूटिंग का उपयोग किया जा रहा था,परंतु इनमें उपकरणों और डाटा को अलग-अलग स्थानों पर शेयर करना सबसे कठिन कार्य था! इस समस्या को हल करने के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग का उपयोग किया जाता है

क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) में सबसे पहला शब्द क्लाउड है जिसका अर्थ है यहां नेटवर्क या इंटरनेट से है दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि क्लाउड वह डाटा या टूल है जो किसी दूरस्थ स्थान पर स्थित है! क्लाउड कंप्यूटिंग विभिन्न प्रकार की कंप्यूटर की सेवाओं को जैसे – सर्वर, नेटवर्क, स्टोरेज, डेटाबेस, एनालिटिक्स सॉफ्टवेयर आदि को इंटरनेट के माध्यम से किसी भी स्थान पर सरलता से उपलब्ध करवाता है! 

वर्तमान में जैसे-जैसे कंप्यूटर और मोबाइल के उपयोगकर्ता की संख्या बढ़ती जा रही है, उसके साथ ही डाटा को स्टोर करने की क्षमता को बढ़ाना भी जरूरी हो गया है! इसी कमी को क्लाउड कंप्यूटिंग का उपयोग करके आसानी से पूरा किया जा सकता है!

वर्तमान समय में लघु और मध्यम उद्योगों में डाटा को स्थिर और सुरक्षित रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, सभी व्यवसाय इतने सक्षम नहीं हैं, कि वह स्वयं अपनी आईटी संरचना को बना सकें! इस प्रकार के सभी व्यवसायों के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग सस्ता और विश्वसनीय विकल्प होता है!

क्लाउड कंप्यूटिंग को विकसित करने के लिए निम्न तकनीकी संसाधन आवश्यक होते हैं- (1) डाटा सेंटर्स  (2) डिसटीब्युटेड सर्वर (3) क्लाइंट! 

क्लाउड कंप्यूटिंग को निम्न 3 तरीकों से उपयोग में लाया जाता है- (1) कंप्यूट क्लाउड  (2) क्लाउड स्टोरेज  (3) क्लाउड एप्लीकेशन ! 

Cloud Computing क्लाउड कंप्यूटिंग के लाभ

 

क्लाउड कंप्यूटिंग के प्रकार (Types of cloud computing in hindi) – 

(1) प्राइवेट क्लाउड (Private Cloud Computing in hindi)- 

प्राइवेट क्लाउड एक ऐसा स्टोरेज या कंप्यूटिंग सर्वर होता है जो किसी भी उपयोगकर्ता के लिए आरक्षित सेवाओं को प्रदान करता है जिसका उपयोग केवल वही उपयोगकर्ता कर सकता है! उदाहरण – गूगल ड्राइव जहां आपके सारे डॉक्यूमेंट आपके ईमेल या पासवर्ड से सुरक्षित रहते हैं, आपके अलावा कोई और उपयोग नहीं कर सकता है, यह कुछ हद तक ज्यादा सुरक्षित माना जाता है! 

(2) पब्लिक क्लाउड (Public Cloud Computing in hindi)- 

पब्लिक क्लाउड हर सामान्य व्यक्ति के लिए उपलब्ध है! जिस पर बनाई गई फाइल सभी उपयोगकर्ता के लिए ओपन रहती है जिसमें उस क्लाउड से जुड़े सभी यूजर आसानी से उपयोग कर सकते हैं और उसमें परिवर्तन भी कर सकते हैं! 

उदाहरण – अगर किसी साइट पर कोई ई-बुक फ्री डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराई गई हो और आप उसे एक ही क्लिक में बिना अकाउंट बनाए डाउनलोड कर पाते हैं, तो यह पब्लिक क्लाउड है. यह कम सुरक्षित माना जाता है! 

(3) कम्युनिटी क्लाउड (Community Cloud Computing in hindi)-

कम्युनिटी क्लाउड केवल एक ग्रुप के सदस्यों के लिए उपलब्ध रहता है, इसके अलावा कोई बाहरी व्यक्ति डाटा को उपयोग नहीं कर सकता! उदाहरण – किसी कंपनी के कर्मचारी केवल कंपनी साइट पर उपलब्ध डाटा का ही इस्तेमाल कर सकते हैं या किसी स्कूल द्वारा बनाई गई वेबसाइट और उस पर उपलब्ध सामग्री का उपयोग केवल स्कूल या स्कूल के छात्र ही कर सकते हैं! 

(4) हाइब्रिड क्लाउड (Hybrid Cloud Computing in hindi)- 

यह क्लाउड पब्लिक क्लाउड और प्राइवेट क्लाउड दोनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है! ऐसी किसी साइट पर कुछ सामग्री उपलब्ध हो और कुछ सामग्री केवल रजिस्टर्ड यूजर के लिए ही उपलब्ध हो ऐसी क्लाउड को हाइब्रिड क्लाउड कहते हैं! 

क्लाउड कंप्यूटिंग के अनुप्रयोग (cloud computing ke anuprayog) –

(1) सॉफ्टवेयर सेवा (2) प्लेटफार्म सेवा (3) हार्डवेयर सेवा!

क्लाउड कंप्यूटिंग के लाभ (Benefits of cloud computing in hindi) – 

cloud computing के लाभ इस प्रकार हैं –

(1) क्लाउड कंप्यूटिंग ऑनलाइन डेवलपमेंट एंड डेप्लॉयमेंट टूल उपलब्ध कराता है सर्विस मॉडल की तरह प्लेटफार्म के माध्यम से प्रोग्रामिंग के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है! 

(2) क्लाउड कंप्यूटिंग मांग आधारित सेल्फसर्विस प्रस्तावित करता है! संसाधनों को क्लाउड सेवा प्रदाता से संपर्क साधे बिना इस्तेमाल किया जा सकता है!

 (3) यूटिलिटी इंटरनेट पर कोई भी व्यक्ति एप्लीकेशन तक पहुंच सकता है

(4) क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) की लागत अधिक प्रभावी है क्योंकि व्यापक उपयोगिता के साथ इसका संचालन उच्चतम दक्षता से किया जा सकता है, जिसके लिए केवल एक इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होती है! 

(5) एप्लीकेशन को किसी भी समय ऑनलाइन बदला जा सकता है और उसे अपने अनुकूल बनाया जा सकता है! 

(6) सभी फाइल का ऑनलाइन या ऑफलाइन बैकअप रहता है! फाइल को किसी भी स्थान पर ओपन करके काम किया जा सकता है! 

(7) फाइल को एक साथ कई स्थानों पर शेयर किया जा सकता है! यहां 5GB से लेकर 1TB तक का डाटा ऑनलाइन स्टोर किया जा सकता है!

 (8) फाइल को एक साथ मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप, टेबलेट आदि में एक्सेस किया जा सकता है!

 (9) कंप्यूटर खराब होने की स्थिति में किसी अन्य कंप्यूटर से भी फाइल का आसानी से बेकअप लिया जा सकता है! 

क्लाउड कंप्यूटिंग के नुकसान (Disadvantages of cloud computing in hindi) –

(1) तकनीकी समस्या के कारण क्लाउड प्रोवाइडर के सर्वर डाउन हो सकते हैं, जिससे कई समस्याएं आ सकती है! 

(2) क्लाउट क उपयोग करने के लिए इंटरनेट एक अनिवार्य तत्व है, बिना इंटरनेट के इस टेक्नोलॉजी का उपयोग नहीं किया जा सकता है! 

(3) इस सिस्टम में संगठन अपना डाटा किसी थर्ड पार्टी सर्वर पर संग्रहित करते हैं, यदि कोई प्रॉब्लम आ जाए तो उपयोगकर्ता ज्यादा कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि उसके हाथों में पूरा कंट्रोल नहीं होता! 

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