भारत में मिट्टी या मृदा के प्रकार बताइए (Types of soil in india in hindi)

भारत में मृदा (मिट्टी) के प्रकार (Types of soil in india in hindi) –

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के हाल के वर्गीकरण में भारतीय मृदा को निम्न 10 मृदा समूहों में विभाजित किया गया है! भारत में पाए जाने मिट्टी (soil) के प्रकार इस प्रकार है-

(1) जलोढ़ मिट्टी किसे कहते हैं (Alluvial soil in hindi) –

कृषि के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण यह मिट्टी भारत के 43% भाग पर पाई जाती है! यह नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी है! इस मिट्टी में पोटाश की बहुलता होती है, लेकिन नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं हयूमस की कमी होती है! जलोढ़ मिट्टी को कहां पर दोमट कटारिया जी का मिट्टी भी कहा जाता है! 

यह मिट्टी मुख्यतया पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय  राजस्थान, नर्मदा तथा ताप्ती की घाटियों में पाई जाती है! इसमें धान, गेहूं, मक्का, तिलहन, दलहन, आलू आदि फसलें उगाई जाती है! 

(2) लाल मिट्टी किसे कहते हैं (Red Soil in hindi) – 

लाल मिट्टी का निर्माण जलवायु परिवर्तनों का परिणामस्वरूप रवेदार एवं कायांतरित शैलों के टूट-फूट से होता है! इस मिट्टी में सिलिका एवं आयरन की बहुलता होती है! इसका लाल रंग लोहा ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण होता है! यह अम्लीय प्रकृति की मिट्टी है!

इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं हयूमस की कमी होती है, प्राय बंजर भूमि के रूप में पाई जाती है! यह कपास, गेहूं, दाले, व मोटे अनाज के लिए उपयुक्त है! यह नागालैंड, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और मध्यप्रदेश के पूर्वी भाग में पाई जाती है! 

(3) काली मिट्टी किसे कहते हैं (Black Soil in Hindi)- 

इस मिट्टी को रेगड़ (रेगुलर) या काली कपास वाली मिट्टी भी कहते हैं! इसका रंग गहरा काला और कणों की बनावट बारीक और घनी होती है! इसका निर्माण बेसाल्ट चट्टानों की टूट-फूट से होता है! 

इसमें आयरन, चूना, एलुमिनियम एवं मैग्नीशियम की बहुलता होती है परंतु जीवाश्म, नाइट्रोजन एवं फास्फोरस की कमी होती है! इसकी जल ग्रहण एवं नमी धारण करने की क्षमता अधिक होती है! इसे स्वत: जुताई की मिट्टी भी कहते हैं! यह मिट्टी कपास, दालों के लिए उपयुक्त है! यह मिट्टी गुजरात, महाराष्ट्र के दक्षिण भाग, उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड, मध्यप्रदेश आदि अनेक स्थान में पाई जाती है! 

(4) मरुस्थलीय मिट्टी किसे कहते हैं (Desert Soil in hindi)- 

यह बालू प्रदान मिट्टी है, जिसमें बालू के कण मोटे होते हैं, इसमें खनिज नमक अधिक मात्रा में पाया जाता है! इसमें नमी कम होती है तथा वनस्पति के अंश कम होते हैं परंतु सिंचाई करने पर उपजाऊ हो जाती है, इसमें फास्फेट की प्रधानता व नाइट्रोजन एवं जैविक पदार्थ का अभाव रहता है. इसमें प्रमुखता गेहूं व चावल उगाए जाते हैं! यह पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, दक्षिणी पंजाब, दक्षिणी हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पाई जाती है! 

(5) लैटेराइट मिट्टी किसे कहते हैं (laterite Soil in hindi) – 

लैटेराइट मिट्टी का निर्माण मानसूनी जलवायु की आर्द्रता एवं शुष्कता के क्रमिक परिवर्तन के परिणामस्वरूप उत्पन्न विशिष्ट परिस्थितियों में होता है! इसमें आयरन एवं सिलिका की बहुलता होती है. यह गहरी लाल लैटेराइट , सफेद लैटेराइट तथा भूमिगत जलवायी प्रकार की होती है!

केओलिन के कारण मिट्टी का रंग सफेद होता है! यह मिट्टी चाय,चावल, रागी, कहवा के लिए उपयुक्त है! यह तमिलनाडु के पहाड़ी एवं निचले क्षेत्रों, राजमहल की पहाड़ियों, प्रायद्वीपीय पठार के ऊपरी भाग, केरल आदि अनेक स्थानों पर पाई जाती है! 

(6) पर्वतीय मृदा किसे कहते हैं (Mountain Soil in hindi) – 

पर्वती मृदाएं भारत के लगभग 18.2 मिलियन हेक्टेयर भू-भाग में फैली है तथा समस्त मृदाओं में इनकी हिस्सेदारी लगभग 5.5% है! ये मृदा हिमालय की घाटियों में ढलानों पर 2,700 से 3,000 मीटर की ऊंचाई के बीच में पाई जाती है! 

यह मृदा साधारणतया अप्रोढ़ है तथा इनका क्रमबद्ध अध्ययन अभी बाकी है! इनका रंग गहरा भूरा है! यह मृदा में मक्का, चावल, दलहन, तिलहन, फलियां, फलों व चारे की खेती की जाती है! 

(7) लवणीय एवं क्षारीय मृदा (Saline and Alkaline Soils in hindi) –

इसे रेह, कल्लर और ऊसर मिट्टी भी कहते हैं! इनमें सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम का अनुपात अधिक होता है! क्षारीय मिट्टियों को जिप्सम के प्रयोग से और लवणीय मिट्टीयो को सिंचाई की उचित सुविधा द्वारा उपजाऊ बनाया जा सकता है! यह शुष्क एवं अर्द्ध शुष्क प्रदेशों जैसे कि राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं बिहार के कुछ भागों में पाई जाती है! 

(8) लाल एवं काली मृदाएं (Red and Black soil in hindi) –

लाल एवं काली मृदा का विस्तार एकाकी टुकड़ों में हैं जिन्हें बुंदेलखंड तथा अरावली के पूर्वी राजस्थान और गुजरात में देखा जा सकता है! इन मृदाओं का विकास आर्कियन और पूर्व कैम्ब्रियन कालों के ग्रेनाइट, नीस और क्वार्टजाइट पर हुआ है! ये अपेक्षाकृत कम उर्वरक है परंतु सिंचाई के बाद इन्हें उर्वरक बनाया जा सकता है! इन मृदाओं में मक्का, बाजरे, जुवार, दलहन एवं तिलहन की खेती की जाती है! 

(9) धूसर एवं भूरी मृदाएं  

(10) उप पर्वतीय मृदाएं 

(11) करेवा मृदाएं 

(12) पीटमय एवं दलदली मृदाएं 

प्रश्न :- जलोढ़ मिट्टी कितने प्रकार की होती है?

उत्तर :-जलोढ़ मिट्टी दो प्रकार की होती है! पुरानी जलोढ़ मिट्टी को बांगर तथा नयी जलोढ़ मिट्टी को खादर कहा जाता है!

Leave a Comment

error: Content is protected !!