द्वितीय विश्वयुद्ध 1939 (Second World War in hindi)

Second World War in hindi)

History Of Second World War in hindi 

द्वितीय विश्वयुद्ध (Second World War History in hindi ) –

प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्ति के उपरांत यह कहा गया कि युद्ध को समाप्त करने वाला युद्ध था! परंतु इस युद्ध के महज 20 वर्षों के पश्चात ही विश्व को दूसरे महायुद्ध का सामना करना पड़ा, जो अपने स्वरूप, विस्तार एवं प्रभाव में प्रथम महायुद्ध से भी अधिक विध्वंशक व विनाशकारी था! द्वितीय विश्वयुद्ध (Second World War) का प्रारंभ 1 सितंबर 1939 ई. में जर्मनी द्वारा पोलैंड पर आक्रमण के साथ हुआ, जबकि इसका अंत 14 अगस्त, 1945 ई. को हुआ ! 

द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण ( Cause of Second World War )

(1) वर्साय संधि – 

वर्साय की संधि में जर्मनी प्रथम विश्वयुद्ध का दोषी मानकर उस पर भारी आर्थिक दंड थोप दिया गया था! उस समय असहाय जर्मनी के पास अपमानजनक संधि पर हस्ताक्षर करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था, किंतु स्पष्ट था कि जर्मनी किसी भी तरह इस संधि की शर्तो को तोड़ने का प्रयास करेगा! इस संधि पर चुंकि जर्मनी की लोकतांत्रिक सरकार ने हस्ताक्षर किए थे, अत: लोकतंत्र के प्रति जर्मन जनता का विश्वास उठ गया!

जर्मन जनता युद्धोंपरांत निर्मित आर्थिक दुर्दशा व वर्साय संधि के कलंक से मुक्त होने के लिए किसी भी तानाशाह को समस्त शक्ति देने हेतु सहमति थी! इन्हीं परिस्थितियों में तानाशाह हिटलर का उदभव हुआ! हिटलर ने वायसराय की संधि की शर्तों को तोड़ने की एक ऐसी प्रक्रिया प्रारंभ की, जिसकी परिणाम द्वितीय विश्वयुद्ध (Second World war) के रूप में हुआ

(2) वैश्विक आर्थिक मंदी – 

प्रथम विश्व युद्ध के बाद सभी देशों की आर्थिक स्थिति जर्जर हो गई थी! युद्ध के दौरान युद्धरत राष्ट्रों को मुख्यतः अमेरिका के द्वारा ऋण दिया गया था! अत: युद्ध के उपरांत संपूर्ण यूरोप की अर्थव्यवस्था अमेरिकी ऋणों पर निर्भर थी! 1929 ई. में अमेरिका स्टॉक एक्सचेंज के पतन ने अमेरिका सहित तमाम देशों को आर्थिक संकट में डाल दिया! इसे इतिहास में ‘1929 की वैश्विक आर्थिक मंदी’ के नाम से जाना जाता है!

इस आर्थिक मंदी का सबसे बुरा प्रभाव लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर पड़ा, क्योंकि इससे उपजी बेकारी, असंतोष, असुरक्षा एवं अस्थिरता को लोकतांत्रिक सरकारें सही तरीके से सुलझा नहीं पाई! परिणामस्वरूप जनता ने समस्याओं से त्वरित निदान हेतु किसी एक व्यक्ति को सर्वोच्च पद देना स्वीकार किया, इससे विभिन्न राष्ट्रों (इटली, स्पेन, जर्मनी) आदि में अधिनायकवादी सरकार की स्थापना हो गई! 

इन अधिनायकवाद सरकारों ने बेरोजगारी को दूर करने हेतु अस्त्र-शस्त्र का निर्माण तथा जनता का समर्थन प्राप्त करने हेतु आक्रमक विदेश नीति को अपनाया! इस तथ्य को इटली द्वारा अबीसीनिया,जापान द्वारा मंचूरिया, जर्मनी द्वारा ऑस्ट्रिया,चेकोस्लोवाकिया और पोलैंड पर आक्रमण के संदर्भ में समझा जा सकता है! 

(3) तुष्टिकरण की नीति – 

द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के लिए बहुत कुछ ब्रिटेन के तुष्टीकरण की नीति उत्तरदाई थी! ब्रिटेन पूंजीवादी पद्धति का समर्थक था तथा साम्यवादी सोवियत संघ के प्रसार को रोकना चाहता था! इस कार्य हेतु ब्रिटेन ने फासीवादी एवं नाजीवादी शक्तियों को सोवियत संघ के विरुद्ध ढाल के रूप में प्रयोग करना चाहा! ब्रिटेन, जापान, इटली, जर्मनी जैसे साम्यवादी विरोधी देशों द्वारा की गई कार्रवाई को नजरअंदाज करता रहा! 

जापान द्वारा चीन के मंचूरिया क्षेत्र पर तथा इटली द्वारा अबीसीनिया पर किए गए आक्रमण पर चुप्पी साध रखी! ब्रिटेन की इस तुष्टीकरण कि नीति की पराकाष्ठा म्यूनिख सम्मेलन 1938 में दिखाई देती है, जिसमें चेकोस्लोवाकिया से सुडेनटेनलैण्ड का क्षेत्र जर्मनी को दे दिया गया! 

ब्रिटेन इस तुष्टीकरण की नीति को हिटलर ने उसकी कमजोरी समझा फलस्वरुप हिटलर की महत्वकांक्षी और बढ़ गई तथा उसने पोलैंड  पर आक्रमण कर द्वितीय विश्वयुद्ध को आरंभ कर दिया! 

(4) राष्ट्रसंघ की असफलता – 

प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात राष्ट्रसंघ की स्थापना 10 जनवरी 1920 ई. को की गई थी! इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति व स्थिरता को बनाए रखना तथा युद्ध को जन्म देने वाले कारणों को समाप्त करना था! राष्ट्रसंघ 1920 ई.- 1930 ई. तक तो प्रायः अपने उद्देश्य में सफल रहा! इस दौरान राष्ट्र संघ ने अनेक छोटे राज्यों के विवादों सफलतापूर्वक सुलझाया! उदाहरणार्थ – 1921 ई. अल्देनिया का विवाद, आलैंड के टापूओं का विवाद, लेटसिया नगर का विवाद आदि! 

परंतु जब बड़े राष्ट्रों से संबंधित मामले राष्ट्र संघ के समक्ष आए, तो राष्ट्रसंघ निष्क्रिय बना रहा! उदाहरणार्थ – 1931 ई. में जापान द्वारा चीन के मंचूरिया पर अधिकार, 1936 में इटली द्वारा अबीसीनिया पर अधिकार एवं 1938 में जर्मनी दारा ऑस्ट्रिया व चेकोस्लोवाकिया पर अधिकार कर लिया गया और राष्ट्र संघ इन आक्रमक राष्ट्रों के विरुद्ध कोई कार्रवाई न कर सका! 

राष्ट्र संघ की असफलता से प्रेरित होकर जब जर्मनी ने 1 सितंबर 1939 ई. मैं पोलैंड पर आक्रमण किया तो द्वितीय विश्वयुद्ध (Second World War) आरंभ हो गया! 

(5) नि:शस्त्रीकरण की असफलता – 

प्रथम विश्व युद्ध के उपरांत वैश्विक स्तर पर नि:शस्त्रीकरण हेतु प्रयास किए गए जैसे – 1920 -21 ई. में वाशिंगटन सम्मेलन, 1932 ई. में जेनेवा सम्मेलन आदि! नि:शस्त्रीकरण हेतु किए गए समस्त प्रयास असफल रहे! विभिन्न राष्ट्रों के मध्य सदस्य की बोर्ड प्रारंभ हो गई! परिणामस्वरूप संपूर्ण वातावरण पुन: युद्बजनित हो गया! ऐसे ही वातावरण में जर्मनी द्वारा पोलैंड पर आक्रमण की घटना ने द्वितीय विश्वयुद्ध (Second World War) का रूप ले लिया! 

Second World War in hindi)

द्वितीय विश्व युद्ध के परिणाम या प्रभाव ( Effect of Second World War )

प्रथम विश्वयुद्ध की तुलना में द्वितीय विश्वयुद्ध (Second World War) का परिणाम व्यापक एवं भयंकर थे! जनधन की हानि तो सभी युद्धों में होती है परंतु द्वितीय विश्वयुद्ध में परमाणु हथियारों के प्रयोग ने मानव के अस्तित्व ही संकट में डाल दिया था! 

(1) इंग्लैंड का पतन – 

द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व विश्व इतिहास में इंग्लैंड का प्रभुत्व था किंतु युद्ध के उपरांत इंग्लैंड की स्थिति दुर्बल हो गई तथा उसके तमाम उपनिवेश देश धीरे धीरे स्वतंत्र होने लगे! विश्व पटल पर अमेरिका एवं रूस का दबदबा कायम होने लगा! 

(2) जर्मनी के मानचित्र में परिवर्तन –

द्वितीय सत्र की समाप्ति तक जर्मनी के पश्चिम और पूर्वी भागों पर क्रमशः पूंजीवादी देश (अमेरिका, फ्रांस व इंग्लैंड ) तथा साम्यवादी देश (रुस) का अधिकार हो गया था! इस प्रकार युद्ध के उपरांत जर्मनी का विभाजन पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी में हो गया! पूर्वी जर्मनी को ‘जर्मन संघीय गणराज्य’ जबकि पश्चिमी ‘जर्मन जनतांत्रिक संघ’ का नाम दिया गया ! 

(3) दो महाशक्तियों का उदय – 

युद्ध के पश्चात अंतरराष्ट्रीय मंच पर सोवियत संघ और अमेरिका नामक दो महाशक्तियों का उदय हुआ! युद्धकाल में अमेरिका के औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि हुई जिससेे आर्थिक उन्नति ने अमेरिका को सैन्य शक्ति को भी मजबूती प्रदान की इसी क्रम में अमेरिका ने परमाणु शस्त्र का विकास किया था विभाग में स्थापित किया! 

(4) शीतयुद्ध का आरंभ –

युद्ध के उपरांत महाशक्तियों के रूप में उदित हुए राष्ट्र सोवियत संघ और अमेरिका अलग-अलग विचारधाराओं में क्रमशः पूंजीवादी व साम्यवादी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते थे! दोनों देशों के बीच विभिन्न समस्याओं के संबंध में तीव्र मतभेद उत्पन्न हो गए!

यद्यपि इन मतभेदों ने सशस्त्र संघर्ष का रूप धारण नहीं किया, इन दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तथा परस्पर विरोधी राजनीतिक प्रचार के माध्यम से युद्ध प्रारंभ हो गया! इस ही शीत युद्ध के नाम से जाना जाता है! 

(5) उपनिवेशवाद का पतन –

द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) में भाग लेने कारण साम्राज्यवादी एवं उपनिवेशवादी देश कमजोर हो गए, जिससे उनके उपनिवेशों में स्वतंत्रता आंदोलन प्रारंभ हो गए! शीघ्र ही भारत, म्यांमार, श्रीलंका ब्रिटिश साम्राज्य के आधिपत्य से हिन्दचीन, कंबोडिया व लाओस फ्रांस के आधिपत्य से मुक्त हो गए! इन नव-स्वतंत्र राष्ट्रों को ही तृतीय विश्व के नाम से जाना जाता है! 

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