सुदूर संवेदन(Remote Sensing Hindi)क्या है,विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम किसे कहते हैं?

Remote Sensing Hindi

सुदूर संवेदन(Remote Sensing Hindi) क्या है-

सर्वप्रथम रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing Hindi) शब्द का प्रयोग 1960 के दशक में किया गया था,परंतु बाद में सुदूर संवेदन की परिभाषा इस प्रकार दी गई –

सुदूर संवेदन एक ऐसी प्रक्रिया है जो भूपृष्ठीय वस्तुओं एवं घटनाओं की सूचनाओं का संवेदक, युक्तियों के द्वारा बिना वस्तु के संपर्क में आए मापन व अभिलेखन करता है! सुदूर संवेदन की उपयुक्त परिभाषा में मुख्यता धरातलीय पदार्थ, अभिलेखन युक्तियों तथा ऊर्जा तरंगों के माध्यम से सूचनाओं की प्राप्ति सम्मिलित किया गया है! 

सुदूर संवेदन किसी लक्ष्य के सीधे संपर्क में आए बिना उसके बारे में जानकारी प्राप्त करने का विज्ञान है इसमें लक्ष्य से परावर्तित या उत्सर्जित ऊर्जा का संवेदन किया जाता है ,इसके पश्चात उसका विश्लेषण करके उसे प्राप्त जानकारी को उपयोग में लाया जाता है,

 सुदूर संवेदन (Remote Sensing Hindi) प्रक्रिया का आरंभ एक ऊर्जा स्त्रोत द्वारा लक्ष्य को प्रदीप्त करने से होता है, आपत्तित ऊर्जा लक्ष्य के साथ मिलती है इसका परिणाम लक्ष्य और विकिरण के गुणों पर निर्भर करता है, प्रत्येक लक्ष्य के परावर्तन और उत्सर्जन लक्षण  अद्वितीय तथा भिन्न होते हैं  (Remote Sensing Hindi)

सुदूर संवेदन प्रणाली का विकास करने वाला भारत विश्व का पांचवा देश है! भारत में इस प्रणाली का विकास राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन प्रणाली की सहायता के लिए किया गया है! प्राकृतिक संसाधन के अंतर्गत मृदा, जल, भूजल, सागर, वन इत्यादि आते हैं! अतः इन प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, सर्वेक्षण तथा निगरानी के साथ-साथ भारतीय योजनाओं के निर्माण में सुदूर संवेदन प्रणाली का उपयोग किया जाता है!( Remote sensing hindi)

सुदूर संवेदन (Remote Sensing hindi) के उपयोग /अनुप्रयोग –

(1) किसी जगह पर या समुद्र में पानी का स्तर या बर्फ की मात्रा आदि का पता भी इन संवेदी उपग्रह की मदद से लगाया जाता है
 
(2) किसी शहर, आपातकालीन स्थिति का सर्वे या जानकारी आदि का पता भी रिमोट सेंसिंग के द्वारा  लगाया जाता है ! 
 
(3) किसी युद्ध क्षेत्र में दुश्मनों की स्थिति या उनकी गतिविधियों का पता भी रिमोट सेंसिंग  से लगाया जा सकता है ! 
 
(4) रिमोट सेंसिंग के द्वारा किसी प्राकृतिक घटनाओं का पता लगाने या स्थिति का अर्थात घटना में क्षति आदि का सर्वे कर भी पता  लगाया जाता है ! 
 
(5) इनके आंकड़ों का उपयोग करके मौसम विभाग द्वारा आने वाली मौसम परिवर्तन और घटनाओं के बारे में जानकारी देता है, जैसे यह पृथ्वी के किसी कोने में चलने वाली किसी खतरनाक चक्रवात या  हवा आदि के बारे में उसके शुरू होते ही आगामी हिस्से सतर्क कर देते हैं ! 
 
(5) रिमोट सेंसिंग का प्रयोग भू-आवरण भूमि उपयोग, मृदा संसाधन और कृषि के विकास के लिए किया जाता है 
 

विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम –

विद्युत चुंबकीय विकिरण को उनकी आवृत्ति या तरंगदैर्घ्य के आधार पर वितरित करना अर्थात बांट देना विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम कहलाता है! 
सभी विद्युत चुंबकीय तरंगे प्रकाश के वेग से गति करते हैं इसलिए इन तरंगों में विभिन्न प्रकार की आवृत्तियों या तरंगदैर्ध्य और फोटाॅन ऊर्जा की विस्तृत श्रृंखला के रूप में पाई जाती है! इसलिए विद्युत चुंबकीय तरंगों या विकिरणों को अलग-अलग आवृत्तियों, तरंगदैर्घ्य और फोटाॅन ऊर्जा के आधार पर अलग अलग रखा जाता है
जिससे अलग अलग आवृत्तियों, तरंगदैर्घ्य और फोटाॅन ऊर्जा के आधार पर पट्टियां बन जाती है जो एक विशेष आवृत्तियों, तरंगदैर्ध्य ,फोटोन की ऊर्जा को प्रदर्शित करती है इन्हें विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं! 
 
विद्युत चुंबकीय वर्णक्रम का परास लघु तरंगदैर्ध्य ( गामा, X-Ray ) से  दीर्घ परास ( सूक्ष्म तरंग और रेडियो तरंग) के बीच होता है, विद्युत चुंबकीय वर्णक्रम के कई क्षेत्र सुदूर संवेदन के लिए उपयोगी होते हैं हमारे आसपास  बहुत सी विकिरण है जो हमारी आंखों के लिए अदृश्य है, परंतु विकिरण सुदूर संवेदी उपकरणों द्वारा पता लगाया जा सकता है!
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