दबाव समूह क्या है?(Pressure Group) दबाव समूह के प्रकार,कार्य,दोष और महत्व

Pressure group in hindi

दबाव समूह क्या है (Pressure Group in hindi) –

दबाव समूह (Pressure Group) से आशय समान हित वाले ऐसे लोगों के संघ या संगठन से है जिनका उद्देश्य अपने संगठन प्रयासों के द्वारा अपने हितों की पूर्ति के लिए राजनीति सत्ता को प्रभावित करना है और अपने हितों पूर्ति के लिए उस पर दबाव डालना है!

दबाव समूह को हितैषी समूह या हितार्थ समूह भी कहा जाता है! यह राजनीतिक दलों से भिन्न होते हैं ये न तो चुनाव में भाग लेते हैं और न ही राजनीतिक शक्तियों को प्राप्त करने की कोशिश करते हैं! यह कुछ खास कार्यक्रमों और मुद्दों से संबंधित होते हैं और इनकी इच्छा सरकार में प्रभाव बनाकर अपने सदस्यों की रक्षा और हितों को बढ़ाना होता है! 
 

दबाव समूह के उद्देश्य या लक्षण (dabav samuh ka pramukh uddeshya) –

दबाव समूह के लक्षण इस प्रकार हैं –

(1) दबाव समूह (Pressure Group) का उद्देश्य सार्वजनिक हित के स्थान पर अपने सदस्यों का हित कल्याण करना होता है! 
(2) दबाव समूह का उद्देश्य सीमित होता है, किसी वर्ग विशेष के हितों की रक्षा करना इनका उद्देश्य होता है! 
 
(3) दबाव समूह अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संवैधानिक और असवैधानिक साधनों का प्रयोग आवश्यकतानुसार करते हैं! 
 
(4) Pressure Group का स्वरूप संगठित या असंगठित प्रकार का हो सकता है! 
 
(5) दबाव समूह पूंजीवादी राष्ट्र तथा लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में अधिक फलीभूत होते हैं! 
(6) दबाव समूह विधि और तर्कसंगत तरीकों द्वारा सरकार की नीति निर्माण और नीति निर्धारण को प्रभावित करते हैं!
 

 दबाव समूह के कार्य करने की पद्धति –

दबाव समूह का प्रमुख उद्देश्य अपने हितों के अनुकूल सरकारी निर्णय को प्रभावित करना होता है जिसके लिए वह कई तरीके अपनाता है जिनको निम्न बिंदु के अंतर्गत रखा जा सकता है –

(1) दबाव समूह जन अभियान द्वारा अनुकूल जनमत का निर्माण करने का प्रयास करता है जिसके लिए वह समाचार-पत्र, विज्ञापन, पंपलेट, इस्तहार, विचार गोष्ठियों का आयोजन आदि का प्रयोग करता है जिससे वह सरकार पर दबाव डाल सके!

(2) यह सरकारी नीति को प्रभावित करने के लिए नैतिक प्रदर्शन एवं हिंसक उपद्रव (हड़ताल) आदि का आयोजन करता है!

(3) दबाव समूह नीति निर्णायकों के साथ व्यक्तिगत संपर्क स्थापित करके भी अपने हितों के पक्ष में निर्णय करवाने का प्रयास करता है!

 दबाव समूह के कार्य या गुण (Positive effect of pressure Group in hindi) – 

dabav samuh ke karya निम्नलिखित हैं –

(1) अपने हितों के संरक्षण के दौरान सरकार की निरंकुशता से जनता की रक्षा करना दबाव समूह का लक्षण हैं! 
 
(2) सरकार को आंकड़े मुहैया कराना, जिससे विवेकपूर्ण नीति और कानून बनाना संभव हो पाता है! 
 
(3) जनमत को शिक्षित करना और आंकड़े एकत्र करना! 
 
(4) निर्वाचन के लिए उम्मीदवारों के चयन में हस्तक्षेप करना जिससे अधिकांश सदस्य उनके वर्गों के लिए जाएं जिसके कारण वह अपने हितों की रक्षा कर सकें! 
 
(5) समाज के विभिन्न वर्गों के मध्य सामंजस्य स्थापित करना, जिससे समाज को विघटन से बचाया जा सके! 
 
(6) शासन की नीतियों एवं कानूनों को प्रभावित करने का प्रयास करना तथा उसे अपने पक्ष में करवाना! 
 
(7) जनता की समस्याओं को अन्य अधिकारियों तक पहुंचा कर दबाव समूह जनहित में कार्य करते हैं! 
 

दबाव समूह के दोष या नकारात्मक प्रभाव (Negative Effects Of Pressure Group in hindi) –

(1) दबाव समूह क्षेत्रीय हित को महत्व देते हैं जो राष्ट्रीय एकता के हित में नहीं है! 

(2) दबाव समूह संकीर्ण विचारधारा को जन्म देते हैं! 

(3) यह समूह हिंसा, अनशन,  हड़ताल आदि जैसे असंवैधानिक तरीकों का प्रयोग करते हैं! 

(4) दबाव समूह राजनेताओं को रिश्वत देकर अपनी और कर लेते हैं और अपने हित में नीतियां बनवाते हैं! 
 
(5) दबाव समूह की कार्यशैलीओ को जनता से गुप्त रखा जाता है! 
 

दबाव समूह के दोषों को दूर करने के उपाय (Measures to overcome the defects of pressure group in hindi)-

(1) दबाव समूहों को आवश्यक रूप से पंजीकृत करवाना चाहिए! 
 
(2) दबाव समूह के कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी चाहिए! 
 
(3) सरकार और समाज दोनों की बेहतरी के लिए दबाव समूह की निरंकुशता पर लगाम लगाने की जरूरत है! 
 
(4) दबाव समूह की अपने सदस्यों की संख्याओं का विवरण भी प्रकाशित करना चाहिए! 
 
(5) दबाव समूह का अपना संविधान होना चाहिए और उन्हें अपने आय-व्यय का विवरण भी देना चाहिए! 
 

दबाव समूह के प्रकार (Types Of Pressure Group in hindi) – 

दबाव समूह के अनेक प्रकार होते हैं परंतु यहां कुछ महत्वपूर्ण प्रकारों का वर्णन किया जा रहा है! dabav samuh ke prakar निम्न हैं –
 

(1) संस्थागत दबाव समूह –  

औपचारिक संगठन होते हैं जो संस्थागत दबाव समूह राजनीतिक दलों, विधानमंडलों, सेना, नौकरशाही में प्रभावशील होते हैं!  यहां स्वतंत्र रूप से क्रियाशील रहकर अपने हितों के साथ-साथ अन्यसामाजिक समुदायों का प्रतिनिधित्व भी करते हैं! यह दबाव समूह निर्णय प्रक्रिया का अभिन्न अंग होते हैं! 
 

(2) समुदायात्मक दबाव समूह – 

इस प्रकार के दबाव समूह विशेष खेतों की पूर्ति के लिए बनाए जाते हैं यह आधुनिक भारत में भारतीय राजनीति मैं सक्रिय होते हैं! व्यवसायिक संघ, श्रमिक संघ, कृषक समुदाय, छात्र संघ, कर्मचारी संघ, सांप्रदायिक संघ आदि समुदायात्मक दबाव समूह है! 

लोकतंत्र में दबाव समूह की भूमिका (Role of pressure group in democracy in hindi) –

लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में लोकतंत्र को सुदृढ बनाने में एक सांगठनिक शक्ति के रूप में दबाव समूह की भूमिका कई रूपों में महत्वपूर्ण होती है जिनको निम्नलिखित बिंदुओं के अंतर्गत समझा जा सकता है –
(1) दबाव समूह कभी-कभी संयुक्त रूप से भी जनसामान्य के हितों के लिए सरकार पर दबाव डालकर लोकतंत्र को मजबूत करते हैं!
(2) दबाव समूह समाजिक एकता के प्रतीक हैं क्योंकि ये व्यक्तियों के सामान्य हितों की अभिव्यक्ति के लिए न केवल जनसाधारण और निर्णय देने वालों के बीच अंतर को कम करते हैं अपितु पूरे समाज में परंपरागत विभाजन को भी घटाने का काम करते हैं!
(3) दबाव समूह जनसाधारण एवं सरकार के बीच एक कड़ी एवं संचार के साधन के रूप में कार्य करते हैं तथा लोकतंत्र में भागीदारी के क्षेत्र में विस्तार को संभव को बनाते हैं!
(4) दबाव समूह एक संगठित है जो समूह है जो अपने समूह के हितों के अनुरूप सरकारी निर्णयों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं! जैसे – श्रमिक संगठन या व्यवसायिक संगठन अपने-अपने समूह के हितों के पक्ष में सरकारी नीतियों को प्रभावित करते हैं, यह सदस्यों के लाभार्थ सरकार से मांग करते हैं तथा राजनीतिक जागरूकता एवं सदस्यों की सहभागिता में वृद्धि करके लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं!
 

भारत में दबाव समूह (Indias Pressure Group in hindi)- 

(1) व्यवसायिक समूह – 

व्यवसायिक समूह का प्रमुख उद्देश्य व्यवसायिक समूहों के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक हितों की रक्षा करना है. इन संगठनों द्वारा सर्वाधिक सरकारी नीतियों को प्रभावित किया जाता है! जैसे – फिक्की, एसोचैम आदि! 
 

(2) श्रमिक संघ – 

सैमसंग का उद्देश्य श्रमिकों के आर्थिक सामाजिक राजनीतिक और सांस्कृतिक सीटों की रक्षा करना है इस संगठन ने भी सरकार की नीतियों का आंशिक रूप से प्रभावित किया है  भारतीय मजदूर संघ, यूनाइटेड कांग्रेस, इंडियन नेशनल यूनियन ट्रेड कांग्रेस, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस आदि प्रमुख श्रमिक संघ है! 
 

(3) पेशेवर समितियां – 

पैसे बार समितियां ऐसे लोगों की समितियां होती है जो डॉक्टर वकील पत्रकार और अध्यापक और संबंधित मांगों को उठाती है तमाम औरतों के साथ ही यह समितियां सरकार को विभिन्न तरीकों से अपनी सेवा शर्तों में सुधार के संबंध में दबाव डालती है! 
 
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ़ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर आदि प्रमुख पेशेवर समितियां हैं! 
 

(4) जातीय समूह – 

भारतीय राजनीति में जाति का महत्वपूर्ण स्थान रहा है जातियां अपने आप को संगठित करके अपने निजी हितों की पूर्ति करवाना चाहती है! हरिजन सेवक संघ, मारवाड़ी एसोसिएशन, क्षत्रिय महासभा, कायस्थ समूह आदि प्रमुख है! 
  
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