न्यूटन के गति के नियम(Newton’s laws of motion)

न्यूटन के गति के नियम (Newton’s laws of motion)-

भौतिकी के पिता कहे जाने वाले न्यूटन ने सन 1687 में अपनी पुस्तक ‘प्रिंसिपिया’ में सबसे पहले गति के नियम को प्रतिपादित किया था

(1) न्यूटन का प्रथम गति नियम(Newton’s first laws of motion)-

यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में है,तो वह विराम अवस्था में रहेगी या यदि वह एकसमान चाल से सीधी रेखा में चल रही है तो वैसे ही चलती रहेगी जब तक उस पर कोई बाहय बल लगाकर उसकी वर्तमान अवस्था में परिवर्तन ना किया जाए

प्रथम नियम को गैलीलियो का नियम या जड़त्व का नियम भी कहते  हैं! बाहय बल के अभाव में किसी वस्तु की अपनी विराम अवस्था या समान गति की अवस्था को बनाए रखने की प्रवृत्ति को जड़त्व कहते हैं! प्रथम नियम से बल की परिभाषा भी मिलती है! 

(2) न्यूटन का द्वितीय गति नियम (Newton’s second law sof motion) –

किसी वस्तु का संवेग में परिवर्तन की दर उस वस्तु पर लगाए गए बल के समानुपाती होता है तथा संवेग में परिवर्तन बल की दिशा में होता है! यदि आरोपित बल F, बल की दिशा में उत्पन्न त्वरण a एवं वस्तु का  द्रव्यमान m हो तो, न्यूटन के गति के दूसरे नियम से                                    

F=ma

अर्थात – न्यूटन के दूसरे नियम से बल का व्यंजक प्राप्त होता है 

Newton's laws of motion

(3) न्यूटन का तृतीय गति नियम(Newton’s third laws of motion) – 

प्रत्येक क्रिया के बराबर, परंतु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है! उदाहरण- नाव से किनारे पर कूदने पर नाव को पीछे की ओर हट जाना, राकेट को उड़ाने में, बंदूक से गोली चलाने पर चलाने वाले को पीछे की ओर धक्का लगना ! 

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