अभिप्रेरणा (Motivation) किसे कहते हैं? इसके घटक एवं सिद्वांत

अभिप्रेरणा (Motivation in hindi) –

अभिप्रेरणा (Motivation) एक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा एक व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित किया जाता है! यह एक निरंतर जारी होने वाली प्रक्रिया है, जो मूलतः व्यक्तिगत आवश्यकताओं एवं मान्यताओं पर आधारित है! वास्तव में अभिप्रेरणा अथवा प्रोत्साहन का संगठनात्मक कार्यकुशलता से बहुत घनिष्ठ संबंध है!

उच्च अभिप्रेरणा प्राप्त व्यक्ति जो अधिक चुस्त और निष्ठा से काम करते हैं, वे संख्यात्मक और गुणात्मक दोनों की ढंग से उद्योग के लिए अधिक उत्पादन करते हैं! किसी उद्यम में अधिक उत्पादकता कुशलता से प्राप्त की जाती है और कुशलता के लिए संगठन में से क्रमिक होना चाहिए जिन्हें अत्याधिक भी प्रेरणा मिलती हो! 

अंग्रेजी भाषा का शब्द “Motivation” मोटिव (Motive) से बना है!  जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘इच्छा शक्ति को जागृत करना! इस प्रकार अभिप्रेरणा से तात्पर्य उस शक्ति से है, जो व्यक्तियों में काम करने की इच्छा जागृत करती है! मानव शक्ति को निर्देशित करने तथा उसका सहयोग प्राप्त करने की कला को अभिप्रेरणा कहते हैं!  

अभिप्रेरणा की परिभाषाएं (definitions of motivation in hindi) – 

(1) रॉबर्ट डयूबीन का कहना है कि – ‘अभिप्रेरणा उन शक्तियों का समूह है जो किसी संगठन में एक व्यक्ति को काम प्रारंभ करने तथा उस पर बने रहने के लिए प्रेरित करता है! 

(2) जुलियस एवं श्लेडर के शब्दों में अभिप्रेरणा किसी व्यक्ति को उचित कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करने की इच्छा है!  

अभिप्रेरणा के परंपरागत सिद्धांत या विचारधाराएं (traditional theories of motivation in hindi) – 

परंपरागत विचारधारा के अंतर्गत निम्नलिखित तीन विचारधाराएं शामिल है –

(1) भय एवं दंड की विचारधारा (Ideology of fear and ppunishment in hindi) –

यह विचारधारा इस सिद्धांत पर आधारित है कि प्रत्येक व्यक्ति पेट के खातिर ही काम करता है! अत: यदि उसको यह धमकी दी जाए कि काम नहीं करने या धीमे काम करने की दशा में नौकरी से निकाल दिया जाएगा तो घबराकर वह काम करेगा! इस प्रकार दंड का भय भी मनुष्य से बराबर काम करवा सकता है! औद्योगिक क्रांति के चरण में इस विचारधारा ने सफलतापूर्वक काम किया आज का कार्य करना और मानवीय समझा जाता है! 

(2) पुरस्कार का सिद्धांत (Principle of reward in hindi) – 

एक विचारधारा के प्रतिपादक फ्रेडरिक डब्ल्यू टेलर है! इस विचारधारा के अनुसार, काम का संबंध पारिश्रमिक से जोड़ देने से कर्मचारी अधिक काम करने के लिए अभिप्रेरित होगा! इस मान्यता के आधार पर उन्होंने विभेदात्मक भृति पद्धति के अनुशंसा की! एडम स्मिथ की विचारधारा भी इससे मिलती जुलती है! परंतु पीटर ड्रकर के अनुसार मौद्रिक पुरस्कार से संतुष्ट होना पर्याप्त अभिप्रेरणा नहीं है!

(3) केरट व टिस्क विचारधारा (Kerat and Tisch ideology in hindi) – 

इस विचारधारा की मान्यता यह है कि जिन व्यक्ति का कार्य-निष्पादन निश्चित न्यूनतम स्तर से नीचा हो, उनको दंडित किया जाना चाहिए! दूसरे शब्दों में, यह विचारधारा अभिप्रेरणा हेतु पुरस्कारों को शर्तयुक्त बना देती है! यह दृष्टिकोण कतिपय विशिष्ट परिस्थितियों में ही प्रभावशील कहा जा सकता है! यह विचारधारा केवल उन व्यक्तियों को ही प्रभावी ढंग से भी प्रेरित कर सकती है जिसकी मनोवैज्ञानिक एवं सुरक्षा की आवश्यकताएं संतुष्ट नहीं हो सकी है! 

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