मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल (Madhya Pradesh ke Pramukh Parytan sthal)

Madhya Pradesh ke Pramukh Parytan sthal)

मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल (Madhya Pradesh ke Pramukh Parytan sthal)-

मध्य प्रदेश अनेक पर्यटन एवं दर्शनीय स्थल है, कुछ प्रमुख पर्यटन स्थल (Madhya Pradesh ke Pramukh Parytan sthal) इस प्रकार है –

(1) खजुराहो –

खजुराहो मध्य प्रदेश का सबसे प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो छतरपुर जिले में स्थित है! खजुराहो की आधारशिला राजा चंद्र वर्मा ने रखी खजुराहो अपने प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है.यहां वर्तमान में 22 मंदिर है! 
 
यहां कंदरिया महादेव मंदिर, चौसठ योगिनी मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, आदिनाथ मंदिर, नदी मंदिर, पारसनाथ मंदिर आदि प्रमुख मंदिर है. राजा चंद्र वर्मा ने खजुराहो नगर की आधारशिला रखी थी.खजुराहो को विश्व धरोहर सूची में 1986 में शामिल किया गया था! 

(2) साॅंची –

सांची बौद्ध धर्म के तीर्थ स्थल के रूप में विख्यात है. ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में बने बौद्ध स्तूप सांची के प्रमुख आकर्षक केंद्र है.इन स्तूपों का निर्माण अशोक ने बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के पश्चात कराया था  यहां रायसेन जिले में है.यहाँ विश्वविख्यात बौद्ध स्तूप स्थित है! 
 
यहां पर 3 स्तूप है, इसमें सबसे बड़ा, पुराना, प्रसिद्ध, महत्वपूर्ण स्तूप को महास्तूप या द ग्रेट स्तूप भी कहा जाता है! यहां पर भगवान बुद्ध की अस्थियाँ रखवाई गई थी
 
स्तूप 3 में भगवान बुद्ध के दो प्रधान शिष्यो सारिपुत्र और महामोगल्यायन की अस्थियाँ रखवाई गई है! इस तू संख्या दो में अन्य बोध आचार्य विश्व की अस्थियों के अवशेष थे जॉब नंदन संग्रहालय में हैं! सांची को 1989 में विश्व धरोहर स्थल में शामिल कर लिया गया था! 

(3) भीमबेटका –

भीमबेटका अपने प्राचीन शैल चित्रों के लिए प्रसिद्ध है भीमबेटिका के शैलाश्रय तथा उनमें उपलब्ध शैलचित्रों की खोज का श्रेय प्रसिद्ध पुरातत्व शास्त्री स्व श्री डाॅ.विष्णु श्रीधर वाकणकर को जाता है, जिन्होंने 1957-58 में भीमबेटका की खोज की थी. यह गुफा नवपाषाण काल से संबंधित है! 
 
यह विश्व का सबसे बड़ा गुफा समूह है.यहां पर आखेट, युद्ध, पक्षी, धार्मिक तथा व्यक्ति के चित्रों का अंकन है! गुफाओ की सबसे प्राचीन चित्रकारी को 12,000 वर्ष पुरानी माना जाता है! भीमबेटका की गुफा में तस्वीर लाल और सफेद रंग की है और इसी के साथ कभी कभार पीले और हरे रंग के बिंदुओं की सजी हुई है, जिनमें दैनिक जीवन की घटनाओं से ली गई विषय वस्तुएं चित्रित है, जो हजारों साल पहले का जीवन दर्शाती है! 

(3) माण्डू –

मांडू को सिटी ऑफ ज्वॉय (आनंद की नगरी) भी कहा जाता है.यह धार जिले में स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है,यह अपने प्राचीन महलों के लिए विख्यात है! 

मांडू स्थित होशंगशाह के मकबरा का निर्माण मोहम्मद खिलजी द्वारा करवाया गया था, यह पूर्णता संगमरमर से निर्मित भारत की पहली इमारत है! 

मांडू के किले का निर्माण होशंगशाह ने करवाया था, इस किले में सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिल्ली दरवाजा है! हिंडोला भवन या दरबार हॉल का निर्माण भी होशंगशाह द्वारा करवाया गया था.

बाज बहादुर एवं रानी रूपमती महल का निर्माण सुल्तान नसरुद्दीन शाह द्वारा करवाया गया था! जहाज महल का निर्माण गयासुद्दीन खिलजी ने मांडू में करवाया था ! 

मांडव में होशंगशाह का मकबरा जामा मस्जिद, अशरफी महल, नीलकंठ महल, जहाज महल, हिंडोला महल, बाज बहादुर महल , रानी रूपमती महल, रेवा कुंड आदि दर्शनीय स्थल है!

(4) ग्वालियर –

ग्वालियर का पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है. ग्वालियर में सबसे महत्वपूर्ण ग्वालियर का किला है इसे “किलो का रत्न” या “जिब्राल्टर ऑफ इंडिया” कहां जाता है.ग्वालियर के किले का निर्माण आठवीं शताब्दी में राजा सूरज सेन द्वारा करवाया गया था. ग्वालियर के किले में अलमगीर दरवाजा,हिंडोला दरवाजा, चतुर्भुज मंदिर दरवाजा, गुजरी महल दरवाजा और हाथीफोड दरवाजा स्थित है!
 
इसके अलावा ग्वालियर में मान मंदिर, गुजरी महल, मोहम्मद गौस का मकबरा गुरु दाता बंदी छोड़ तानसेन का मकबरा सूर्य मंदिर, सहस्त्रबाहु मंदिर और तेली मंदिर आदि दर्शनीय स्थल है तेली का मंदिर एकमात्र द्रविड़ शैली में बना मंदिर है! (Madhya Pradesh ke Pramukh Parytan sthal)

(5) उदयगिरि की गुफाएं –

सांची से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर विदिशा मार्ग पर उदयगिरि एक छोटा सा गांव है, जहां उदयपुर की गुफाएं स्थित है. इन गुफाओं की संख्या 20 है. यह गुफाएं चौथी शताब्दी से 10 वीं शताब्दी ई. में निर्मित की गई! 
 
गुफा नंबर 1,तीन दिशाओं में शैलकृत और एक दिशा में प्रस्तर खंडों से बनी है, इसे सूरज वह भी कहते हैं! गुफा नंबर 5 में भगवान विष्णु के वराह अवतार का चित्रण है, इस गुफा को वराह गुफा भी कहते हैं! 

(6) पचमढ़ी –

पंचमढी एक पर्वतीय पर्यटन स्थल है जिसकी खोज का श्रेय कैप्टन जे. फारसोथ को जाता है.सौंदर्य के कारण ही पंचमढी को “सतपुड़ा की रानी” और “मध्यप्रदेश का कश्मीर” कहा जाता है! मध्य प्रदेश का पहला जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र पंचमढी है! 
 
मध्य प्रदेश की सबसे ऊंची चोटी धूपगढ़(1350मी.) पंचमढी में ही स्थित है, पंचमढी मध्यप्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है!  अप्सरा विहार, जटाशंकर, पांडव की गुफा, धूपगढ़, चौरागढ़, महादेव पर्वत प्रियदर्शनी पॉइंट, हांडी खो, बिग फाल, राजेंद्र गिरी, डचेस फॉल आदि पंचमढी के प्रमुख दर्शनीय स्थल है! 

(7) भेडाघाट –

नर्मदा और बावन नदी के संगम पर स्थित होने के कारण से भेड़ाघाट कहा जाता है. यह सफेद संगमरमर की चट्टानों के लिए प्रसिद्ध है. यह जबलपुर में स्थित है!
 
शिव पार्वती मंदिर, चौसठ योगिनी मंदिर, बंदर कूदनी, धुआंधार जलप्रपात आदि भेड़ाघाट के प्रमुख पर्यटन स्थल है! ऊंचाई से जल गिरने के कारण पानी की बूंद को कोहरे का सृजन कर देती है, इसलिए इसका नाम धुआंधार पड़ा है! (Madhya Pradesh ke Pramukh Parytan sthal)

(8) उज्जैन –

उज्जैन को मंदिरों और मूर्तियों का नगर कहां जाता है, उज्जैन को धार्मिक राजधानी भी कहा जाता है! उज्जैन को 2005 में पवित्र नगर घोषित किया गया था. उज्जैन में क्षिप्रा के किनारे महाकाल का एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग वाला महाकालेश्वर मंदिर स्थित है.यह ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से एक है! उज्जैन में कुंभ के मेले का आयोजन प्रत्येक 12 वर्ष में किया जाता है!  
 
उज्जैन में जंतर मंतर का निर्माण महाराजा सवाई जयसिंह ने करवाया था. मंगलनाथ मंदिर में सर्वप्रथम हिंदुओं ने भूगोल को समझा था! नागचंद्रेश्वर उज्जैन का ऐसा मंदिर है जिसके कपाट साल भर में एक बार नागपंचमी के दिन ही खुलते हैं !
 
उज्जैन के प्रमुख दर्शनीय स्थल महाकालेश्वर मंदिर, हरसिद्धि देवी मंदिर, गोपाल मंदिर,संतोषी माता मंदिर, चौबीस खंबा मंदिर, भर्तृहरि गुफा, काल भैरव मंदिर, गढ़कालिका देवी मंदिर, नागचंद्रेश्वर मंदिर, कालियादेह महल, सांदीपनी आश्रम, मंगलनाथ, चिंतामन गणेश आदि है! (Madhya Pradesh ke Pramukh Parytan sthal)

(9) ओंकारेश्वर –

ओकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में  नर्मदा के किनारे पर स्थित है इस ज्योतिर्लिंग को अमलेश्वर व ममलेश्वर भी कहा जाता है यह 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है यह ज्योतिर्लिंग जिस पर्वत पर स्थित है, वहां ऊॅं की आकृति दिखाई देती है इसलिए ज्योतिर्लिंग का नाम ओकारेश्वर है  2005 में ओकारेश्वर को पवित्र नगरी घोषित किया गया है
 
यहां पर आदि शंकराचार्य की गुफाएं, ओकारेश्वर मंदिर, ममलेश्वर मंदिर, महादेव मंदिर, सिद्धनाथ का मंदिर, ओंकार मंधाता मंदिर, 24 अवतार सममात्रिक मंदिर, गौरी सोमनाथ मंदिर, आदि दर्शनीय स्थल है! 

(10) अमरकंटक –

यह अनूपपुर जिले की पुष्पराजगढ़ तहसील में स्थित पर्यटन स्थल है. नर्मदा नदी का उद्गम स्थल अमरकंटक ही है, पुराणों में अमरकंटक को सर्वतीर्थ नायक्रम कहा गया है इसका अर्थ है कि अमरकंटक सभी तीर्थों में श्रेष्ठ है यहां से तीन नदियां- नर्मदा, सोन, जोहिला, आदि का उद्गम होता है! 
 
अमरकंटक में कुल 24 मंदिर स्थित है.नर्मदा माई के मंदिर में नर्मदा देवी और पार्वती देवी की प्रतिमा है, समीप ही नर्मदा कुंड है, जहां से नर्मदा नदी का उद्गम होता है! माई की बगिया, माई का मंदिर, कपिलधारा, दुग्धधारा, नर्मदा कुंड आदि यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थल है! (Madhya Pradesh ke Pramukh Parytan sthal)
 

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