मध्यप्रदेश के प्रमुख एवं प्रसिद्ध मेले (Madhya Pradesh pramukh mele)

मध्यप्रदेश के प्रमुख एवं प्रसिद्ध मेले ( Madhya Pradesh ke pramukh mele)

Mp ke pramukh mele  –

मध्यप्रदेश में सर्वाधिक मेलों का आयोजन उज्जैन में किया जाता है मध्य प्रदेश के कुछ प्रमुख मेले (Madhya Pradesh pramukh mele) इस प्रकार है,

Madhya Pradesh pramukh mele –

 सिंहस्थ का मेला (कुंभ का मेला )

 उज्जैन (12 वर्ष में एक बार ) 

 तेजाजी का मेला

 भामावड (गुना) 

 शहीद ( चरण पादुका) मेला

 सनावद (गुना) 

 महामृत्युंजय का मेला

 रीवा 

 रामलीला का मेला

 भाण्डेर (दतिया) 

 संत नागाजी का मेला

 पोरसा (मुरैना) 

 पीरबुधन का मेला

 सॉवरा (शिवपुरी) 

 हीरामन बाबा का मेला

 ग्वालियर

 जोगेश्वरी देवी का मेला

 चंदेरी (अशोकनगर) 

 शिवरात्रि का मेला

 अमरकंटक

 सिंगाजी का मेला

 पिपल्याखुर्द (खण्डवा) 

 कालूजी महाराज का मेला

 पिपल्याखुर्द (खण्डवा)

 मंधाता मेला

 ओंकारेश्वर खण्डवा

 धमोनी का उर्स 

 धमोनी (सागर) 

 शहाबुद्दीन औलिया उर्स 

 नीमच

 मठ घोघरा का मेला

 मॉथन (सिवनी) 

 बरमान घाट का मेला

 बरमान ( नरसिंहपुर) 

 गढाकोटा का रहस्य मेला

 गढाकोटा

 उल्दन का मेला

 उल्दन (सागर) 

 बनेनी घाट मेला

 राहतगढ़ ( सागर) 

 सनोधा का मेला

 सनोधा ( सागर) 

 देवरी का मेला

 देवरी ( सागर) 

 भापेल का मेला

 भापेल ( सागर)

 सलकनपुर मेला

 सलकनपुर ( होशंगाबाद) 

 रामजी बाबा का मेला

 होशंगाबाद

 ग्वालियर का व्यापारिक

 ग्वालियर

 जटाशंकर का मेला

 जटाशंकर ( छतरपुर) 

 जलविहार मेला

 छतरपुर

 कुम्हेण का मेला

 महाराजपुर ( छतरपुर ) 

 मऊ सहानिया का मेला

 मऊ सहानिया ( छतरपुर )   

 अंबार माता का मेला

 छतरपुर

 राम- जानकी का मेला

 बिजावर

 नांदचांद का मेला

 बगवार (पन्ना) 

 कुंआताल का मेला

 कुंआताल (पन्ना)

 प्राणनाथ का शरद समैया मेला

 पन्ना

 गधों का मेला

 चित्रकूट 

 राम नवमी मेला

 ओरछा

 राम विवाह के मेले

 ओरछा

 कुण्डेश्वर का मेला

 कुण्डेश्वर ( ढीकमगढ) 

 बडे बाबा का मेला

 कुण्डलपुर ( दमोह) 

 जोगेश्वरी नाथ धाम का मेला

 बॉदकपुर  ( दमोह)

 शिव मेला 

 भोजपुर ( भोपाल) 

 काना बाबा का मेला

 सोडलपुर (हरदा) 

 चॉदी देवी मेला

 भोथरा (सीधी) 

 चेती मेला

 ब्यावरा

 सनकुआ का मेला

 सेवडा ( दतिया) 

 रतनगढ़ का मेला

 रतनगढ़ ( दतिया) 

सोनगिरि का मेला

 सोनगिरि ( दतिया)

 बसंत पंचमी का मेला

 मांढेर 

 माघ घोघरा का मेला

 भैरोंनाथ

 नौदेवी का मेला

 रावतपुरा गांव ( भिंड) 

 जनकपुर का मेला

 जनकपुर

 बाणगंगा का मेला 

 शिवपुरी

 बांदकपुर का मेला

 दमोह

 मढई का मेला

 डिण्डौरी

 रहस का मेला

 डिण्डौरी

 बालाजी का मेला

 बुरहानपुर

 माँ शारदा मेला

 मैहर (सतना) 

 

 

 

 

Madhya Pradesh pramukh mele –

(1) सिंहस्थ मेला – 

सिंहस्थ मेले का आयोजन मध्य प्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा के तट पर किया जाता है.इस मेले का आयोजन 12 वर्ष में एक बार किया जाता है! इस मेले में साधु संत के अखाड़ों के साथ ही धार्मिक आयोजनों प्रवचन के साथ बड़ी संख्या में व्यापारिक गतिविधियां भी होती है. यह मध्य प्रदेश का संख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा मेला माना जाता है! 

 

(2) ग्वालियर का व्यापारिक मेला –

ग्वालियर का मेला मध्यप्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा मेला है, इस मेले की शुरुआत तत्कालीन शासक माधवराव सिंधियाजी ने 1905 में पशु के मेले के तौर पर की थी! इस मेले में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लोग भी शामिल होते हैं! 
 
यह शहर ग्वालियर व्यापारिक मेला प्राधिकरण मध्यप्रदेश सरकार की एक नोडल एजेंसी है. हाल ही में GTFA द्वारा मेला परिसर में कला निर्यात सुविधा केंद्र की स्थापना की गई है! (Madhya Pradesh pramukh mele)
 

(3) नागाज़ी का मेला –

नागाजी का मेला संत नागा जी की स्मृति में आयोजित किया जाता है. यह मुगल शासक अकबर के समकालीन थे! संत नागा जी की स्मृति में यह मेला मुरैना जिले के पोरसा में अगहन में माह भर चलता है! पहले यहां बंदर बेचे जाते थे अब सभी पालतू जानवर को भेजा जाता है! (Madhya Pradesh pramukh mele)
 

(4) तेजाजी का मेला – 

तेजाजी का मेला गुना जिले के भामावाड जिले में आयोजित किया जाता है. यह मेला पिछले 100 से ज्यादा वर्षों से लग रहा है! तेजा दशमी पर इस मेले का आयोजन किया जाता है! 
 

(5) गढ़ाकोटा का मेला –

इस मेले का आयोजन सन 1958 में मर्दन सिंह नामक राजा के गढ़ाकोटा का उत्तराधिकारी बनने के बाद से आयोजित हो रहा है. गढ़ाकोटा में प्रतिवर्ष फरवरी में बसंत पंचमी से एक माह तक आयोजित होने वाला यह मेला क्षेत्र के प्राचीन मेलों में से एक माना जाता है! (Madhya Pradesh pramukh mele)
 

(6) चरण पादुका का मेला – 

चरण पादुका मेले का आयोजन छतरपुर जिले में मकर संक्रांति के अवसर पर किया जाता है इसे शहीद मेला भी कहा जाता है! ऐसा माना जाता है कि भगवान राम वनवास के समय जिस स्थान पर आए थे और यह चरण चिन्ह उन्हीं के हैं इसलिए इसे चरण पादुका भी कहा जाता है! (Madhya Pradesh pramukh mele)
 

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