मध्यप्रदेश की प्रमुख जनजातियां (Madhya Pradesh ki Janjatiya)

मध्यप्रदेश की प्रमुख जनजातियां

मध्यप्रदेश की जनजातियां (Madhya Pradesh ki Janjatiya) –

मध्यप्रदेश में विभिन्न प्रकार की जनजातियां निवास करती है देश में सर्वाधिक जनजाति जनसंख्या मध्यप्रदेश में है मध्यप्रदेश में निवास करने वाली जनजाति (Madhya Pradesh ki Janjatiya)निम्न है –

(1) भील जनजाति –

भील मध्य प्रदेश की प्रमुख और सबसे बड़ी जनजाति है, जिसकी जनसंख्या 59.9 लाख है, जो प्रदेश की कुल जनजाति जनसंख्या का 39% है! भील मुख्यतः धार, झाबुआ,अलीराजपुर में निवास करती है! 
 
‘भील’ शब्द संस्कृत भाषा के भिल्ल शब्द से बना है, परंतु कुछ विद्वानों का मानना की भील द्रविड़ भाषा के शब्द बील या बिल से आया है जिसका अर्थ है – तीर! चूंकि धनुष बाण भीलों का मुख्य शस्त्र है जिसके कारण यह भील कहलाये! 
 
द्रविड़ियन मूल की माने जाने वाली भील जनजाति एक आकर्षक जनजाति है, भील की उपजाति में भिलाला स्त्री-पुरुष, नाक नक्शा, कद-काटी और सुंदर शरीर की बनावट के आधार पर सभी जनजातियों में सबसे सुंदर होते हैं.भील की संसार के सबसे अधिक रंगप्रिय जनजाति है! 
 
भील जनजाति की उपजातियों में भिलाला, पटलिया, बरेला, बैगास, रथियास शामिल है! औरंगजेब के काल में कुछ भीलों ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था ऐसे भीलों को तड़वी भील कहा जाता है! 
भील ताडी पीना पसंद करते हैं तथा मक्का का खाते हैं.शराब अथवा दारु पीना भीलों के जीवन का एक अनिवार्य अंग है! 
 
भगोरिया उत्सव भीलों का प्रमुख त्यौहार है, जिसे प्रेम का उत्सव भी कहा जाता है.भगोरिया उत्सव में ‘गोल गाधेडो’ का आयोजन किया जाता है! भील विश्व की सबसे अधिक गहना प्रिय है एक भील महिला के शरीर पर 5 से 7 किलो वजन के चांदी या गिल्ट के गहने पहनना सामान्य की बातें हैं!  
 
भील जनजाति के सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली देवता राजपंथा है भील जनजाति के लोग अपने घरों को बड़े आकार तक खुले बनाते हैं, जिन्हें क्रू नाम से जाना जाता है तथा इस स्थान को फाल्या कहा जाता है! भील द्वारा की जाने वाली कृषि चिमाता कहलाती हैं! (Madhya Pradesh ki Janjatiya)

गोंड जनजाति –

गोंड देश की सबसे बड़ी जनजाति है, जबकि मध्य प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है परंतु एक जनजाति समूह के रूप में यह सबसे बड़ा जनजाति समूह है! गोंड की उत्पत्ति तेलुगु भाषा के शब्द कोंड से हुई है जिसका अर्थ है पर्वत अर्थात यह जनजाति पर्वतों पर निवास करती है! 
 
गोंड जनजाति का मुख्य संकेंद्रण नर्मदा घाटी और दक्षिण के जिले हैं.गोंड स्वयं को कोयतोर कहलाना अधिक पसंद करते हैं, कोयतोर का अर्थ- मनुष्य या पर्वतवासी मनुष्य से लिया जाता है ! गोंड पारंपरिक रूप से किसान है तथा हल उनका प्रतीक है! (Madhya Pradesh ki Janjatiya)
 
गोंड जनजाति की मुख्य भाषा गोंडी है इसके अलावा डोरली, हलवी, तथा भतरी भाषा भी बोलते हैं अगरिया,प्रधान,ओझा, मडिया, मुड़िया सोलहवीं, नगारची आदि गोंड जनजाति की उपजातियां हैं! गोंड गोत्र समाज है तथा परिवार पितृसत्तात्मक है! 
 
गोंड में अनेक प्रकार की विवाह पद्धतियाँ पाई जाती है जिनमें दूध लौटावा, पठौनी, चढ विवाह, लमसेना विवाह आदि प्रमुख है! दुल्हादेव गोंड जनजाति के प्रमुख देवता है इसके अलावा बुढ़ा देव, नारायण देव, बड़ा देव, ठाकुर देव आदि भी गोंड जनजाति के प्रमुख देवता है! करमा, भडौनी, सैला, बिरहा, कहवा आदि गोंड जनजाति के प्रमुख नृत्य है!(Madhya Pradesh ki Janjatiya)
 
लोहे का काम करने वाले वर्ग को अगरिया, मंदिर में पूजा पाठ करने वाले प्रधान, पंडिताई तथा तांत्रिक क्रिया करने वाले ओझा कहे जाते हैं, नाचने वाले गोंडों को कोइलाभूतिस और बढईगिरि का काम करने वाले गोंडों को सोलाहास कहा जाता है! गोंड गणतंत्र पार्टी की स्थापना हीरालाल मरकाम ने की थी! 

अगरिया जनजाति –

अगरिया गोंडों की ही उपजाति है यह मंडला, सीधी,और शहडोल जिलों में पाई जाती है! यह लौह अयस्क साफ करने व धातु निष्कर्षण का कार्य करते हैं! लोहासुर अगरिया जनजाति के प्रमुख देवता है, इनका निवास स्थान धधकती भट्टी माना जाता है! (Madhya Pradesh ki Janjatiya)

कोरकू जनजाति –

कोरकू जनजाति मुण्डा या कोलेरियन जाति की प्रशाखा है कोरकू जनजाति का मुख्य निवास स्थान खंडवा, होशंगाबाद, बैतूल और छिंदवाड़ा जिले में है! कोरकू का शाब्दिक अर्थ मनुष्य का समूह है! कोरकू समुदाय गोत्र चिन्ह (टोटम) से बना हुआ होता है! 
 
कोरकू समुदाय में समगोत्र विवाह वर्जित है. मृतको दफनाने की प्रथा पायी जाती है.मृतक की स्मृति में लकड़ी का मृतक स्तंभ मंडा लगाते हैं! कोरकू में मृतक का अंतिम संस्कार में सिडोली प्रथा का प्रचलन है! पडियार और भूमका कोरकूओ के अति सम्मानित व्यक्ति होते हैं! (Madhya Pradesh ki Janjatiya)

बैगा जनजाति –

बैगा एक आदिम संस्कृति संपन्न जनजाति है, बैगा जीवन पूर्णता जंगल पर निर्भर है, जीवन के प्रत्येक वस्तु बैगा जनजाति जंगल से प्राप्त करती है बेगा जन गोदनाप्रिय है बैगा महिलाएं लगभग पूरे शरीर को गुदवाती है! शिकार बैगा का प्रिय शौक है! 
 
बैगा डहिया खेती में आज भी विश्वास करते हैं.बेगा पाराशक्तियों, आदिम विश्वासी और ओझा गुनियाओं के आदेशों से संचालित होते हैं! पुस्तक ‘बेगा’ के लेखक वेरियर एल्विन है! 

कोल जनजाति –

कोल एक प्राचीनतम जनजाति है, जिसका उल्लेख ऋग्वेद से लगाकर उपनिषद, पुराण तथा संस्कृत ग्रंथों में भी प्रमुखता से मिलता है! कोल एक गोत्रिय समाज है, कोल गोत्रों से बंधा होता है! कोल गांव या शहर के समीप अपना अलग मोहल्ला बनाकर रहते हैं इसे टोला कहा जाता है!(Madhya Pradesh ki Janjatiya)

जनसंख्या की दृष्टि से कोल मध्यप्रदेश की तीसरी सबसे बड़ी जनजाति है! कोलो का मुख्य कार्य कृषि मजदूरी है.कोल मुखिया चौधरी कहलाते है! 

सहरिया जनजाति –

सहरिया कोलेरियन परिवार की जनजाति है, सहरिया एक अत्यंत पिछड़ी जनजाति है! सहरिया अपनी अलग कतारबद्ध मकानों की श्रृंखला बनाकर समूह में रहते है, इसे सहयका कहते हैं! सहारिया का मुखिया पटेल होता है! जड़ी-बूटी संग्रह सहरिया का मुख्य आर्थिक स्त्रोत है! 
 
सहरिया अपने आपको भीलो का छोटा भाई कहलाने में गौरव का अनुभव करते हैं! सहरिया कृषि मजदूरी करते हैं और वनोपज संग्रह कर बेचना इनका प्रमुख कार्य है! (Madhya Pradesh ki Janjatiya)

बंजारा जनजाति –

बंजारा एक घुमंतू जनजाति है बंजारा परंपरा से एक घुमंतू व्यवसायिक जाति है, जो ‘बालद’ लाते थे! बंजारा विश्व में प्रथम कंघी के आविष्कारक है! बंजारा महिलाएं स्वाभाविक रूप से अतिश्रृंगार प्रिय  है! बंजारा महिलाएं सिर पर राखड़ी या चुण्डा पहनती है और हाथी दांत की चूड़ियां भी पहनती है! (Madhya Pradesh ki Janjatiya)
 
बंजारो का मूल प्रादुर्भाव राजस्थान है.तलवार और डंडाबेली बंजारा जनजाति के पारंपरिक नृत्य है! 

भारिया जनजाति –

भारिया गोंड जनजाति की शाखा है, वह अन्य द्रविड़ियन अर्थात कोलरियन परिवार की जाति है! भारिया मुख्य रूप से कृषि मजदूर है.भारियाओ का मुख्य भोजन पेज है, बरसात के दिनों में भारिया आम की गुठली के बीजों के आटे की रोटी खाते हैं!
 
भारिया तंत्र-मंत्र, जादू- टोना, भूत-प्रेत पर अधिक विश्वास करते हैं! भारिया जनजाति का मुख्य निवास स्थान जबलपुर,छिंदवाड़ा है! भारिया जनजाति के प्रमुख नृत्य भडम, सैतम, सैला आदि है! भारिया जनजाति में मृत्यु पर गरम रोटी का आयोजन होता है! (Madhya Pradesh ki Janjatiya)

खैरवार जनजाति –

खेरवार मुण्डा समूह की प्रमुख जनजाति है, खेरवार मूलतः कोलेजन समह की जनजाति है! खेरवार जाति पंचायत का मुखिया महतो माझी कहलाता है! पन्ना, छतरपुर में खेरवार कोन्दार के नाम से जाने जाते हैं! खेरवार कत्था बनाने वाली प्रथम जनजाति है! खेरवार जनजाति का निवास स्थान से सीधी, शहडोल,पन्ना और छतरपुर है! 

पनिका जनजाति –

पनिका कबीरपंथी जनजाति है. पनिका का मुख्य रूप से बुनकर जनजाति है.यह पारंपरिक रूप से वस्त्र निर्माण का कार्य करते हैं! इनका निवास मुख्यता शहडोल और सीधी जिले में पाया जाता है! (Madhya Pradesh ki Janjatiya)
 
 
  
 
 
 
 

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