मध्यप्रदेश के पठार(Madhay pradesh ke Pramukh pathar)

 

 मध्यप्रदेश के पठार (Madhay Pradesh ke pramukh Pathar) -

 

मध्यप्रदेश के पठार (Madhay Pradesh ke pramukh Pathar) –

मध्य प्रदेश एक पठारी प्रदेश है, क्योंकि यह समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित है, Madhay Pradesh ke pramukh Pathar इस प्रकार है –
 

मालवा का पठार (Malwa Plateau in hindi) –

मालवा के पठार का निर्माण ज्वालामुखी उद्गार से निकलने वाले लावा से हुआ है, इसमें दक्कन ट्रैप शैल भी पाई जाती है! मालवा का पठार मध्य प्रदेश के पश्चिमी भाग में स्थित है! मालवा के पठार का क्षेत्रफल 88,222 वर्ग किमी है जो मध्यप्रदेश की कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 28.62% है.
 
मालवा के पठार में गहरी काली मिट्टी पाई जाती है, यहां कृषि उपज में सोयाबीन, गेहूं, कपास, मूंगफली, गन्ना, चना आदि प्रमुख है! 
 
यहां पर सम जलवायु पाई जाती है जिसमें वर्षा का औसत 100 से 150 सेंटीमीटर तथा तापमान अधिकतम 40°C से 42°C तक रहता है और न्युनतम 10°C तक रहता है 
 
इस पठार पर चंबल, कालीसिंध, क्षिप्रा,बेतवा,पार्वती, नेवाज,सोनार तदोनी, माही, बारना आदि नदियां प्रवाहित होती है! 
 
मालवा के पठार के अंतर्गत मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, सागर, सीहोर, भोपाल, देवास, विदिशा, रायसेन, इंदौर, गुना के साथ झाबुआ और धार का कुछ भाग भी आता है! 
 
पर्यटन की दृष्टि से उज्जैन, सांची, भीमबेटका, उदयगिरि की गुफाएं, आदि इस पठार के मुख्य स्थल है! 
 
सिगार चोटी मालवा के पठार की सबसे ऊंची चोटी है, जिसकी ऊंचाई 881 मीटर है. महू के जानापाव पहाड़ी से चंबल नदी का उद्गम होता है! 
 

मध्य भारत का पठार (plateau of central india in hindi) – 

मध्य भारत के पठार का क्षेत्रफल 32896 वर्ग किमी है जो मध्य प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का 10.68% है! 
 
यहां जलोढ एवं काली मिट्टी पाई जाती है, यहां की कृषि उपजाऊ में सरसों का सर्वाधिक क्षेत्रफल है तथा उसके बाद गेहूं का स्थान आता है! 
 
यहां महाद्वीपीय प्रकार की जलवायु पाई जाती हैं यहां वर्षा 75 सेंटीमीटर से भी कम होती है, सबसे कम वर्षा भिंड में 55 सेंटीमीटर होती है! इस क्षेत्र में वनोपज काफी कम 20 से 27% तक की है! यहां पर कंटीले वन पाए जाते हैं इसमें मुख्यतः खेर, बबूल.शीशम के वृक्ष पाए जाते हैं! 
 
मध्य भारत के पठार के अंतर्गत भिंड, मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, मंदसौर, नीमच का ऊपरी भाग तथा गुना का पश्चिमी क्षेत्र आता है! 
 
पर्यटन की दृष्टि से यहां शिवपुरी,ग्वालियर का किला, गुजरी महल, सास बहू मंदिर, तेली मंदिर, हिंडोला द्वार, मोती महल, जैन मूर्तियां आदि प्रमुख है! 
 

बुंदेलखंड का पठार (Bundelkhand Plateau in hindi) – 

बुंदेलखंड के पठार का क्षेत्रफल 23,733 वर्ग किमी है, जो मध्यप्रदेश के क्षेत्रफल का 7.70% है. ये ग्रेनाइट तथा नीस की चट्टानों से निर्मित है! 
 
यहाँ मिश्रित मिट्टी पाई जाती है, जो लाल और काली के सम्मिश्रण से बनी है.यहां की प्रमुख फसल ज्वार, गेहूं, अलसी, तिल है! 
 
यहां की जलवायु महाद्वीपीय प्रकार की है, यहां वर्षा का औसत 75 से 100 सेमी.है, यहां का अधिकतम तापमान 41°C तथा न्यूनतम तापमान 9°C तक रहता है! वनोपज में यहां सागौन, तेंदूपत्ता, खैर,नीम, महुआ के वृक्ष मुख्यता पाए जाते हैं! 
 
बुंदेलखंड का पठार के अंतर्गत छतरपुर, दतिया, टीकमगढ़, निवाड़ी एवं शिवपुरी, ग्वालियर और भिंड की कुछ तहसीलें तथा उत्तर प्रदेश क्षेत्र शामिल है! 
 
पर्यटन की दृष्टि से मध्य प्रदेश का वेदर बैठक स्थल खजुराहो यही स्थित है खजुराहो के अलावा सतखंडा महल, जौहर महल, नौखण्डा महल, व खूनी दरवाजा बुंदेलखंड के पठार के अन्तर्गत स्थित है!
 

रीवा पन्ना का पठार (Rewa Panna Plateau in hindi) – 

रीवा-पन्ना के पठार का क्षेत्रफल 31,955 वर्ग किमी है, जो प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 10.37% है! यहां विंध्यन शैल पाई जाती है इसलिए इसे विंध्यन का पठारी प्रदेश भी कहा जाता है! 
 
यहां पर बालुई दोमट मिट्टी पाई जाती है,  यहां की कृषि उपज में गेहूं (मुख्य) ज्वार, तिलहन आदि प्रमुख है! 
 
रीवा-पन्ना के पठार की जलवायु महाद्वीपीय प्रकार की है, यहां वर्षा का औसत 100 से 125 सेमी. है  यहां अधिकतम तापमान 42°C तथा न्यूनतम तापमान 8°C तक रहता है! 
 
यहां बहने वाली नदियों में सोन, केन, टोंस, बीहड, सतना, ब्योरमा आदि प्रमुख है! 
 
इसके अंतर्गत दमोह, रीवा, सतना, पन्ना, सागर जिले की रेहली तथा बण्डा तहसील आती है! 
 
रीवा पन्ना पठार के अंतर्गत आने वाले प्रमुख पर्यटन क्षेत्र चचाई, बहुटी, केवटी जलप्रपात, भरहुत स्तूप सतना, चित्रकूट, मैहर आदि है! 
 
 

नर्मदा-सोन घाटी (Narmada-Sone Valley in hindi)- 

नर्मदा सोन घाटी का क्षेत्रफल 86,000 वर्ग किमी है जो मध्यप्रदेश के क्षेत्रफल का 27.89% है! दक्कन ट्रैप से निर्मित यह पठार मध्य प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र से उत्तर पर्व के भाग तक फैला है! यह प्रदेश का सर्वाधिक निचला भाग है, जिसकी ऊंचाई 300-400 मीटर है! 
 
इस पठार पर गहरी काली मिट्टी पाई जाती है कृषि की दृष्टि से काफी संपन्न अचेत रहे यहां गेहूं का उत्पादन मुख्य रूप से होता है साथ ही चावल, मूंगफली, कपास, सोयाबीन अन्य फसलें भी उगाई जाती है!
 
यहां पर मानसूनी जलवायु पाई जाती है, यहां वर्षा का औसत 125 सेंटीमीटर है, यहां सर्दी में सामान्य सर्दी और गर्मी में अधिक गर्मी पड़ती है!
 
नर्मदा, सोन, और जोहिला इस क्षेत्र में बहने वाली प्रमुख नदियां हैं! 
 
जबलपुर, नरसिंहपुर, हरदा, होशंगाबाद संपूर्ण क्षेत्र तथा धार, झाबुआ, बड़वानी, कटनी के कुछ भाग शामिल है! 
 
नर्मदा सोन घाटी के अंतर्गत आने वाले पर्यटन स्थल में चौसठ जोगनी मंदिर, जबलपुर, ओकारेश्वर, भेड़ाघाट, महेश्वर, सहस्त्रधारा जलप्रपात आदि प्रमुख है! 
 

बघेलखंड का पठार (Baghelkhand Plateau in hindi) – 

बघेलखंड के प्राचीनतम भूखंड का भाग है, बघेलखंड पठार गोंडवाना शैल समूह से निर्मित है! जिसका क्षेत्रफल लगभग 21,000 वर्ग किमी.है, जो मध्यप्रदेश के क्षेत्रफल का लगभग 7% है! 
 
यहां पर मुख्यतः लाल-पीली मिट्टी पाई जाती है.यहां की कृषि उपज में चावल मुख्य फसल है, इसके अलावा आलसी, ज्वार, तिल आदि का भी उत्पादन किया जाता है! 
 
यहां की जलवायु मानसूनी प्रकार की है तथा वर्षा का औसत 125 सेंटीमीटर है यहां पर उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन पाए जाते हैं! 
 
इस क्षेत्र में बहने वाली प्रमुख नदियां सोन, बीहड़, टोंस, जोहिला है! कर्क रेखा किस पठार के बीचो बीच से गुजरती है! 
 
बघेलखंड के पठार के अंतर्गत अनूपपुर, सीधी, शहडोल, सिंगरौली, का निचला हिस्सा तथा उमरिया, डिंडोरी आदि जिले आते हैं! 
 
क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थल बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, अमरकंटक, नर्मदा, सोन, का उद्गम स्थल प्रमुख है! 
 

सतपुड़ा मैकल श्रेणी (Satpura Maikal Range in hindi) –

सतपुड़ा मैकल श्रेणी दक्कन ट्रैप तथा गोडवान शैल समूह से निर्मित है! इसका क्षेत्रफल 34,000 वर्ग किमी है जो प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 11% है! 
 
यहां पर साधारण काली मिट्टी, व छिछली काली मिट्टी पाई जाती है बलुआ मिट्टी भी मिलती है! यहां की कृषि उपज में मुख्यतः ज्वार है  इसके अलावा गेहूं, चावल, कपास आदि का भी उत्पादन होता है! 
 
यहां वर्षा का औसत 125 से 150 सेमी.तक है. सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र पंचमढी यहीं पर स्थित है. यहां सघन वन पाए जाते हैं! 
 
इस क्षेत्र में बहने वाली प्रमुख नदी वर्धा, पूर्णा, ताप्ती, तवा, देनवा, वैनगंगा, पेंच आदि है! 
 
इस क्षेत्र के अंतर्गत मंडला, बालाघाट, डिंडोरी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, बड़वानी, पश्चिम निमाड़-पूर्वी निमाड़ (कुछ भाग), सिवनी, बैतूल बालाघाट, छिंदवाड़ा, आते हैं! 
 
सतपुड़ा मैकल क्षेत्र खनिजों की दृष्टि से संपन्न है यहां मैग्नीज, कोयला, तांबा, बॉक्साइट, लोहा आदि के भंडार पाए जाते हैं! 
 
मध्य प्रदेश का पर्यटन स्वर्ग कहा जाने वाला पंचमढ़ी सतपुड़ा-मैकल श्रेणी पर स्थित है! 

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