जिला न्यायालय क्या है? जिला न्यायालय के कार्य एवं शक्तियां

जिला न्यायालय क्या है (jila nyayalaya kya hai) –

प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय के नीचे अनेक न्यायालय कार्य करते हैं, जिन्हें अधीनस्थ या जिला न्यायालय (jila nyayalaya) कहा जाता हैं! संविधान में इन न्यायालयों को कार्यपालिका के हस्तक्षेप से मुक्त रखने का पर्याप्त उपबंध है! इनका उल्लेख अनुच्छेद एक 233 से 237 में किया गया है! 

जिला न्यायाधीश की नियुक्ति jila nyayadhish ki niyukti) –

अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीश की नियुक्ति, पदस्थापना एवं पदोन्नति राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात की जाती है! जिला न्यायालय के रूप में नियुक्त होने के लिए निम्नलिखित योग्यताओं का होना आवश्यक है –

(1) वह कम से कम 7 वर्ष तक किसी न्यायालय में लगातार अधिवक्ता रहा हो! 
(2) उच्च न्यायालय ने उसकी सिफारिश की नियुक्ति की हो! 
(3) वह केंद्र या राज्य सरकार में किसी सरकारी सेवा में कार्यरत ना हो! 

जिला न्यायालय पर नियंत्रण (jila nyayalaya par niyantran) – 

जिला न्यायालय एवं अन्य न्यायालयों में न्यायिक सेवा से संबंद्भ व्यक्ति की पदस्थापना, पदोन्नति एवं अन्य मामलों पर नियंत्रण रखने का अधिकार राज्य के उच्च न्यायालय को प्राप्त होता है! 

जिला न्यायालय में न्यायाधीश के प्रकार (jila nyayalaya me nyayadhish ke prakar) –

जिला न्यायाधीश के अंतर्गत – नगर दीवानी न्यायाधीश, अपर जिला न्यायाधीश, संयुक्त जिला न्यायधीश, सहायक जिला न्यायाधीश, लघु न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश, मुख्य प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त मुख्य प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट, सत्र न्यायाधीश, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं सत्र न्यायाधीश आते हैं! 

जिला न्यायालय के न्यायाधीश के कार्य एवं शक्तियां (jila nyayalaya ke karya) –

जिला न्यायाधीश, जिले का सबसे बड़ा न्यायिक अधिकारी होता है! उसे सिविल और अपराधिक मामलों में मूल और अपीलीय क्षेत्राधिकार प्राप्त है! अर्थात जिला न्यायाधीश, सत्र न्यायाधीश भी होता है! जब वह दीवानी मामलों की सुनवाई करता है तो उसे जिला न्यायाधीश कहा जाता है तथा जब वह फौजदारी मामलों की सुनवाई करता है तो उसे सत्र न्यायाधीश कहा जाता है! 

जिला न्यायाधीश के पास न्यायिक एवं प्रशासनिक दोनों प्रकार की शक्तियां होती है! उसके पास जिले के अन्य सभी अधीनस्थ न्यायालय का निरीक्षण करने की शक्ति भी होती है! उसके फैसले के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है! 

जिला न्यायाधीश को किसी अपराधी को उम्रकैद से लेकर मृत्युदंड देने तक का अधिकार होता है, इसके द्वारा दिए गए मृत्युदंड तभी अमल में लाया जा सकता है! जब राज्य का उच्च न्यायालय उसका अनुमोदन कर दे! 

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