सत्यनिष्ठा किसे कहते हैं सत्यनिष्ठा (Integrity) के प्रकार एवं महत्व

सत्यनिष्ठा किसे कहते हैं (Satyanishtha kise kahate hain) –

सत्यनिष्ठा (Integrity) से आशय है, जो सत्य है उसके प्रति निष्ठावान रहना या अडिग रहना! जिन सिद्धांतों को आप सही मानते हैं, व्यवहार में भी उन्हीं को अपनाना भले ही परिणाम अलाभकारी हो! सत्यनिष्ठा एक व्यापक अवधारणा है, जिसके विभिन्न रूप हो सकते हैं, जैसे – बौद्धिक सत्यनिष्ठा, व्यवसायिक सत्यनिष्ठा, व्यक्तिगत सत्यनिष्ठा आदि! 

सत्यनिष्ठा (satyanishtha) का तात्पर्य किसी चीज के संपूर्ण रूप से जुड़े होने और आंतरिक सुसंगति से है! सत्यनिष्ठा के अंतर्गत नैतिक सिद्धांतों के बीच में आंतरिक सुसंगति और नैतिक सिद्धांतों तथा व्यवहार में सुसंगति दोनों आते हैं! सत्यनिष्ठा संपन्न व्यक्ति का आचरण लगभग हर स्थिति में उसके नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए और नैतिक सिद्धांतों वस्तुनिष्ठ आधार पर नैतिक होना चाहिए! नैतिक सिद्धांतों का सोपानुक्रम भी नहीं सुनिश्चित होना चाहिए ताकि दो सिद्धांतों में टकराव हो तो वरीय सिद्धांत का चुनाव करना आसान हो सके! सत्यनिष्ठा का आशय व्यक्ति की सच्चरित्रा से भी है!  

सत्यनिष्ठा के प्रकार  (Types of integrity in hindi) – 

satyanishtha ke prakar इस प्रकार है –

(1) बौद्धिक सत्यनिष्ठा (Intellectual Integrity in hindi) – 

बौद्धिक सत्यनिष्ठा का आशय मूल्यांकन करने की पूर्णता से है,अर्थात – स्वयं के कार्यों का मूल्यांकन उन्हें मापदंडों पर करना, जिन मापदंडों के आधार पर हम दूसरों के कार्यों का मूल्यांकन करते हैं! दूसरे शब्दों में आपकी कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए और यदि कोई अंतर्विरोध है, तो उसे आत्मचिंतन द्वारा दूर करने का प्रयास करना चाहिए! 

(2) व्यवसायिक सत्यनिष्ठा (Professional Integrity in hindi) – 

व्यवसायिक सत्यनिष्ठा से आशय व्यवसाय विशेष में स्वीकृत नैतिक सिद्धांतों, मूल्यों, मानकों या निर्देशों के अनुसार कार्य करने से है, जैसे – डॉक्टर, वकील आदि का व्यवसाय! डॉक्टर द्वारा रोगी को बिना जानकारी के क्लीनिकल ट्रायल नहीं करना चाहिए! वकील को पक्षकार के प्रति पूरी सत्य निष्ठा रखनी चाहिए! 

(3) व्यक्तिगत सत्यनिष्ठा (Personal Integrity in hindi) – 

व्यक्तिगत सत्यनिष्ठा जीवन से जुड़ा हुआ है! व्यक्ति द्वारा मान्य मूल्यों, आदर्शों या नैतिक सिद्धांतों से व्यवहार के सुसंगत ही बनाए रखना ही व्यक्तिगत सत्यनिष्ठा है, जैसे – किसी कार्य को करने के लिए झूठ बोलना पड़े तो, वह आप वह कार्य करने की बजाय उसे छोड़ना पसंद करेंगे!  

(4) कलाकार की सत्यनिष्ठा –

कलाकार को वही बात कहना चाहिए जो वह सचमुच में सोचता है! किसी आर्थिक लाभ या दबाव में आकर गलत बात प्रसारित नहीं करना चाहिए, क्योंकि समाज पर का व्यापक प्रभाव होता है!

सत्यनिष्ठा का महत्व या लाभ (satyanishtha ka mahatva) –

satyanishtha का महत्त्व इस प्रकार है –

(1) सत्यनिष्ठा से व्यक्ति की प्रमाणिकता, विश्वसनीयता एवं सम्मान में वृद्धि होती है, जिससे उस व्यक्ति की राजनीति, प्रकाशन या व्यवसाय की सफलता की संभावना बढ़ जाती है !

(2) सत्यनिष्ठा से सम्मान वृद्धि में वृद्धि होती हैं तथा अन्य व्यक्तियों को अच्छे कार्य करने की प्रेरणा मिलती है!

(3) व्यक्ति को अपने वरिष्ठ कनिष्ठ अधिकारियों को जनता का समर्थन प्राप्त होता है जिससे उसे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में आसानी होती है!

(4) इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण बात थी कि सत्यनिष्ठा से स्वयं को आत्म संतुष्टि का अनुभव होता है!

सत्यनिष्ठा की आवश्यकता (satyanishtha ki avashyakta) –

सत्यनिष्ठा आदर्शों एवं व्यवहार के बीच का अंतराल कम करती है अर्थात किसी राज्य या समाज के नागरिक सत्य नष्ट हो, तो उस राज्य समाज में जैसे आदर्श होंगे, वैसा या उसके अनुकूल या आचरण होगा! इससे राज्य अपने सभी लक्ष्यों का सदैव प्राप्त कर पाएगा! इसका सबसे ज्यादा लाभ समाज के वंचित वर्गों को होगा, जो मूल रुप से राज्य की योजनाओं और उनके माध्यम से मिलने वाले लाभों पर निर्भर होते हैं! इसका दूसरा लाभ भ्रष्टाचार की मुक्ति के रूप में प्राप्त होगा, क्योंकि भ्रष्टाचार का आशय ही नियमों के विचलन से है!

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