लोकसेवा में निष्पक्षता (Impartiality) का अर्थ क्या है?

निष्पक्षता (Impartiality in hindi)-

किसी भी विषय या मुद्दे के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के उसके गुण-दोष के आधार पर निर्णय करना ही निष्पक्षता (Impartiality) है! वस्तुतः लोकसेवा में कार्य करने वाले व्यक्ति भी समाज का अंग होते हैं, उनका जुड़ाव भी किसी न किसी धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा आदि से होता है! 

अतः लोक सेवक के रूप में उनसे अपेक्षा की जाती है कि वह लोक नीतियों, कार्यो  योजनाओं का कार्यान्वयन बिना पक्षपात के करें! यदि उसमें निष्पक्षता (Impartiality) के मूल्य का अभाव होगा, तो वह जनता में शासन या प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ेगा, जो राज्य के लिए खतरा हो सकता है! इस प्रकार समाज व राष्ट्र में न्याय की स्थापना हेतु लोकसेवक को निष्पक्ष होना बेहद आवश्यक है! 

सूक्ष्म रूप में देखे तो निष्पक्षता (Impartiality) में दो पक्ष नहीं होते हैं – (1) जिस व्यक्ति से हम संबंधित है या जिसे पसंद करते हैं! उसे अवैध रूप से कोई लाभ न देना और जिसे हम नापसंद करते हैं उसे अवैध रूप से कोई हानि न पहुंचाना (2) यह भी जरूरी है कि निष्पक्षता (Impartiality) साबित करने के लिए अपनी पसंद के या अपने निकट के व्यक्ति के साथ अन्याय ना करें! 

यदि एक परीक्षक उत्तर पुस्तिकाएं जांच रहा है व उत्तर पुस्तिकाओं  में उसकी बेटी की उत्तर पुस्तिका भी है जो वास्तव में योग्यता के अनुसार दूसरे स्थान पर है, ऐसे में निम्नलिखित परिस्थितियां हो सकती है! 

(1) वह बेटी को 2 अंक बढ़ा दे ताकि उसे पहला स्थान प्राप्त हो जाए यह पक्षपात हैं! 

(2) परीक्षक को लग सकता है कि बेटी का ऊंचा स्थान आने पर लोग उसे संदेह से देखेंगे! वह अपनी निष्पक्षता प्रमाणित करने के लिए बेटी के अंक कम कर सकता है! ताकि उसका स्थान पांचवा छठवां हो जाए! यह भी नकारात्मक अर्थों में पक्षपात है जिसमें व्यक्ति खुद को निष्पक्ष दिखाने के लिए अपना या अपने निकटस्थ का नुकसान करता है! 

(3) उत्तर पुस्तिका जाॅंचते समय यह ध्यान नहीं रखना कि किस को कौन सा स्थान मिलने वाला है! 
निष्पक्षता हमेशा का काम नहीं है! कभी-कभी थोड़ा पहुंच पक्षपात सामाजिक हित में वांछनीय हो सकता है! परंतु यह किसी व्यक्ति विशेष के हित में न होकर समाज के हित में होना चाहिए हालांकि वह किसी व्यक्ति के हित के माध्यम से ही पूरी होगी! यह भी जरूरी है कि जिस व्यक्ति विशेष का नुकसान हो उसकी तुलना में सामाजिक लाभ की मात्रा बहुत अधिक हो! आरक्षण की नीति का मूल आधार यही है! 

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