संघात्मक शासन व्यवस्था और एकात्मक शासन व्यवस्था की विशेषताएं

संघात्मक शासन व्यवस्था (federal governance in hindi)-

राजनीति शास्त्रियों ने राष्ट्रीय सरकार एवं क्षेत्रीय सरकार के संबंधों की प्रकृति के आधार पर सरकार को दो भागों में विभाजित किया है एकल एवं संघीय सरकार! 

संघीय सरकार वह है जिसमें शक्तियां संविधान द्वारा केंद्र सरकार एवं क्षेत्रीय सरकार में विभाजित होती हैं! दोनों अपने अपने अधिकार क्षेत्रों का प्रयोग सफलतापूर्वक करते हैं! स्वीटजरलैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस, कनाडा, ब्राज़ील, अर्जेंटीना आदि में सरकार का संघीय मॉडल पाया जाता है! 

संघीय मॉडल में राष्ट्रीय सरकार को संघ सरकार या केंद्र सरकार या संघीय सरकार के रूप में जाना जाता है और क्षेत्रीय सरकार को राज्य सरकार ने प्रांतीय सरकार के रूप में जाना जाता है! 
भारत के संघीय व्यवस्था ‘कनाडाई मॉडल’ पर आधारित है! यह अत्यंत सशक्त केंद्रीय सरकार मॉडल को अपनाते हैं! 

संविधान की संघीय शासन व्यवस्था विशेषताएं (Federal Governance Features of the Constitution in hindi)- 

भारतीय संविधान की संघीय शासन व्यवस्था की विशेषताएं इस प्रकार हैं –

(1) लिखित संविधान – 

भारत का संविधान विश्व का सबसे लिखित संविधान है जिसमें संविधान निर्माण के समय 395 अनुच्छेद 22 भाग 8 अनुसूचियां थी वर्तमान समय में इसमें लगभग 450 से अधिक अनुच्छेद तथा 24 भाग और 12 अनुसूचियां हैं! 

(2) शक्तियों का विभाजन – 

संविधान की सातवीं अनुसूची में केंद्र, राज्य एवं दोनों से संबंधित सूचियों के द्वारा शक्तियों का विभाजन किया गया! इन सूचियों में वर्णित विषयों पर केंद्र, राज्य एवं दोनों मिलकर कानून बनाते हैं और उन्हें लागू करते हैं! 
केंद्र सूची में 100 विषय है ( मूलतः 97), राज्य सूची में 61 विषय है( मूलतः 66), और समवर्ती सूची में 52 सही है( मूलतः 47)! समवर्ती सूची में वर्णित विषयों पर केंद्र एवं राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, परंतु टकराव की स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून ही मान्य होगा

(3) द्वैध पद्धति – 

संविधान में संघ स्तर पर केंद्र एवं राज्य स्तर पर राज्य पद्धति को अपनाया गया है! प्रत्येक को संविधान द्वारा क्रमशः अपने-अपने क्षेत्र में संप्रभु शक्तियां प्रदान की गई! केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के मामलों जैसे- रक्षा, मुद्रा, संचार, विदेश आदि को देखा जाता है, जबकि दूसरी ओर राज्य सरकार द्वारा क्षेत्रीय एवं स्थानीय महत्व के मुद्दों जैसे – सार्वजनिक व्यवस्था, कृषि, स्वास्थ्य, स्थानीय प्रशासन, पुलिस आदि को देखा जाता है! 

(4) संविधान की सर्वोच्चता – 

भारतीय संविधान, संविधान की सर्वोच्चता स्थापित करता है केंद्र या राज्य सरकार द्वारा प्रभावी कानून के विषय में इसकी व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए अन्यथा उन्हें उच्चतम न्यायालय या न्यायालय में न्यायिक समीक्षा के तहत आवेदक घोषित किया जा सकता है! इस तरह सरकारों को संविधान की सीमा में रहकर कार्य करना होता है! 

(5) कठोर संविधान –

संविधान द्वारा शक्तियों का विभाजन एवं संविधान की सर्वोच्चता तभी बनाई जा रखी जा सकती है, जब संविधान में संशोधन की प्रक्रिया कठोर हो! दामिनी संविधान में संशोधन इस सीमा तक कठोर है जिससे पे प्रावधान जो संघ की संरचना से संबंधित है मात्र केंद्र एवं राज्य सरकारों की समान संस्तुति से ही संशोधित किए जा सकते हैं!

(6) स्वतंत्र न्यायपालिका –

भारतीय संविधान द्वारा स्वतंत्र न्यायपालिका की स्थापना की गई है! संविधान में दो कारणों से उच्चतम न्यायालय के नेतृत्व में स्वतंत्र न्यायपालिका गठन किया है! एक, अपनी न्यायिक सीमा के अधिकार का प्रयोग कर  संविधान की सर्वोच्चता को स्थापित करना और दूसरा, केंद्र एवं राज्य के बीच विवादों के निपटारे के लिए!

संविधान द्वारा न्यायालय को न्यायाधीशों के कार्यकाल की सुरक्षा, निश्चित सेवा शर्तें, अपने कर्मचारियों की नियुक्ति आदि की स्वतंत्रता प्रदान की गई है! 

 

शासन व्यवस्थासंघात्मक शासन व्यवस्था और एकात्मक शासन व्यवस्था की विशेषताएं

एकात्मक शासन व्यवस्था (Unitary government in hindi) – 

एकल य एकात्मक सरकार वह है जिसमें समस्त शक्तियां एवं कार्य केंद्र सरकार और क्षेत्र सरकार में निहित होती हैं! फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, चीन, इटली, बेल्जियम, नार्वे, स्वीडन, स्पेन आदि में सरकार का एकात्मक स्वरूप पाया जाता है! 

संविधान की एकात्मक शासन व्यवस्था की विशेषताएं (Features of the unitary government system of the constitution in hindi) – 

उपरोक्त संघीय ढांचे के अलावा भारतीय संविधान की निम्नलिखित एकात्मक या गैर- संघीय शासन व्यवस्था की विशेषता इस प्रकार है –

(1) एकल संविधान – 

सामान्यता एक संघ में राज्यों को केंद्र सेट कर अपना संविधान बनाने का अधिकार प्राप्त होता है परंतु भारत में राज्यों को इस प्रकार की कोई शक्ति प्रदान नहीं की गई है! भारत का संविधान सिर्फ केंद्र के लिए नहीं, बल्कि राज्यों के लिए भी समान रूप से लागू होता है! राज्य एवं केंद्र दोनों को इसी एक ढांचे का पालन करना अनिवार्य है! 

(2) सशस्त्र केंद्र – 

संविधान द्वारा शक्तियों का विभाजन केंद्र के पक्ष में है, जो कि संघीय दृष्टिकोण से काफी विरुद्ध है! प्रथमतः  केंद्र सूची में राज्य के मुकाबले ज्यादा विषय है! दूसरा, केंद्रीय सूची में ज्यादा महत्वपूर्ण विषय शामिल है! तीसरा, समवर्ती सूची में केंद्र को पर रखा गया है तथा आपातकालीन स्थिति में केंद्र सरकार को संपूर्ण शक्तियां प्राप्त होती है! इस तरह संविधान केंद्र को सशक्त बनाता है! 

(3) संविधान का लचीलापन – 

अन्य संघीय प्रणाली की तुलना में भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया कम कठोर है! संविधान को एक बड़े हिस्से को, संसद द्वारा साधारण या विशेष बहुमत द्वारा एकल प्रणाली से संशोधित किया जा सकता है! यानी संविधान संशोधन की अधिकतम शक्ति केंद्र के हाथ में है! 

(4) आपातकालीन उपबंध – 

भारतीय संविधान में तीन तरह के आपातकाल की व्यवस्था की गई है राष्ट्रीय, राज्य एवं वित्त! आपातकाल के दौरान केंद्र सरकार के पास समस्त शक्तियां आ जाती है और राज्य, केंद्र के पूर्ण नियंत्रण में आ जाते हैं! यह बिना किसी संविधान संशोधन के संघीय ढांचे को एकल ढांचे में बदल देता है! ऐसी व्यवस्था किसी अन्य संघ में नहीं पाई जाती है! 

(5) एकल नागरिकता – 

दोहरी शासन व्यवस्था के बावजूद भारत का संविधान, कनाडा की तरह एकल नागरिकता व्यवस्था को अपनाता है! यहां केवल भारतीय नागरिकता है, कोई अन्य पृथक राज्य नागरिकता नहीं है! विश्व के अन्य संघीय व्यवस्था वाले देशों में जैसे- अमेरिका, स्विजरलैंड एवं आस्ट्रेलिया में दोहरी नागरिकता ( केंद्र एवं राज्य नागरिकता) का प्रावधान है! 

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