आचरण संहिता किसे कहते हैं? लोकसेवकों हेतु आचार संहिता महत्व (Code of Conduct)

आचार या आचरण संहिता क्या है (Code of Conduct in hindi)- 

आचार संहिता या कोड ऑफ कंडक्ट (code of conduct) नैतिक संहिता पर आधारित दस्तावेज होता है जो कुछ निश्चित कार्यों या आचरण के बारे में यह बताता है कि किसी अधिकारी को इन्हें करना चाहिए या नहीं! नीति संहिता और आचरण संहिता दोनों का ही संबंध ही प्रशासन या प्रबंधन में नैतिकता की स्थापना से हैं! 

वस्तुतः आचार संहिता नियमों का वह समूह है जो कर्मचारियों को अनुशासन बनाए रखने के लिए उनके आचार-व्यवहार के संबंध में सरकार द्वारा बनाए जाते हैं! सरकारी कर्मचारियों के लिए इन नियमों का पालन अनिवार्य होता है! ये नियम तथा उपनियम लोक कर्मचारियों के व्यवहार का नियमन करते हैं और उन्हें इस बात से अवगत कराते हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए! 

आचार संहिता की आवश्यकता (Need for code of conduct in hindi) – 

लोक सेवकों के लिए आचार संहिता (code of conduct) की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से अपरिहार्य प्रतीत होती है –

(1) यथा राजा तथा प्रजा –

राज कर्मचारी जनता के प्रत्यक्ष संपर्क में आते हैं अत: उनको अपने आचार का नैतिक स्तर ऐसा ऊंचा रखना चाहिए कि वह साधारण जनता के लिए आदर्श हो सके! 

(2) सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए –

सरकारी कर्मचारीयों को नागरिकों के जीवन और उनके कार्यकलापों पर नियंत्रण रखने की शक्ति प्राप्त रहती है! अतः आचार नियमों का होना आवश्यक है जिससे अधिकारी-वृन्द को अपनी शक्ति का स्वार्थरहित दुरूपयोग करने से रोका जा सके! 

(3) राजनीतिक तटस्थता बनाए रखने के लिए –

सरकारी अधिकारियों में राजनीतिक निरपेक्षता अर्थात तटस्थता का होना अपरिहार्य है. इसको लागू करने के लिए भी आचार संहिताआवश्यक है! 

(4) आचरण को नैतिक बनाए रखने के लिए – 

आचार संहिता इसलिए आवश्यक है कि ताकि कर्मचारी अपने आचरण को एक उच्च नैतिक स्तर पर रखे जिससे कोई भी उन पर उंगली न उठा सकें! 

(5) आचार संहिता के अस्तित्व से कर्मचारी अपने दायित्व का निर्वहन कुशलता तथा चुस्ती के साथ करते हैं आचार संहिता के भय से कर्तव्य विमुख और उच्छुंखल नही हो पाते! 

लोक सेवकों हेतु आचरण संहिता (lok sevako hetu aachran sanhita) – 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 309 में राष्ट्रपति यह अधिकार दिया गया है कि वह सरकारी सेवकों के लिए आवश्यक नियम बनाए! वैसे भारत में आचरण की सरकारी संहिताओ का लंबा इतिहास रहा है! इसमें ज्यादा पीछे तक जाएं बिना हम देख सकते हैं कि 1930 के वर्षों में ‘करने’ तथा ‘नहीं करने’ वाली हिदायत का संग्रह जारी किया गया था और इसे समेकित रूप में आचरण नियमावली कहा गया था! 

इस संग्रह को 1955 में विशिष्ट नियमावली का रूप दिया गया! संथानम समिति ऐसे नियमों के काफी विस्तार की सिफारिश की थी! अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों तथा विभिन्न राज्य सरकारों के कर्मचारियों पर सेंट्रल सिविल सर्विसेज नियमावली, 1964 तथा इसी प्रकार की नियम लागू होते हैं!   

वस्तुतः केंद्रीय सरकार ने 1951 में ‘अखिल भारतीय सेवा कानून’ तथा ‘अखिल भारतीय नियम प्रसारित’ किये थे! सन 1964 में केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियम बनाए गए थे! 1969 में प्रशासनिक सुधार आयोग ने भी इस प्रश्न पर विचार किया था! 

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