भारतीय संविधान की प्रस्तावना(preamble)और प्रस्तावना के महत्वपूर्ण शब्द

indian constitution preamble संविधान की प्रस्तावना

प्रस्तावना(preamble)- कोई भी राष्ट्र बिना संविधान की एक व्यवस्थित शासन की कल्पना नहीं कर सकता है! प्राय: प्रत्येक संविधान के प्रारंभ में एक प्रस्तावना(preamble) होती है, जिसमें शासन व्यवस्था के मूल आधारों, उसके दर्शन, उद्देश्यों, लक्ष्यों, आदर्शों, प्रयोजन अधिकार स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाता है!  प्रस्तावना(Preamble) सहित संविधान निर्माताओं की मंशा का पता चल … Read more

भारतीय संविधान और संविधान सभा की आलोचना के कारण बताइए

भारतीय संविधान की आलोचना के  कारण (Bhartiya Samvidhan Ki Aalochana Ke Karan ) – भारतीय संविधान निर्माताओं द्वारा संविधान का निर्माण बहुत सोच समझकर किया गया है उन्होंने इसके निर्माण में काफी समय भी लिया परंतु, भारतीय संविधान की आलोचकों द्वारा निम्न आधार पर संविधान की आलोचना की जाती है!  (1) 1935 के अधिनियम की कार्बन कॉपी – आलोचकों … Read more

मौलिक कर्तव्य(fundamental Rights Hindi)क्या है ? विशेषता एवं आलोचना

fundamental Rights Hindi

मूल या मौलिक कर्तव्य (fundamental Rights Hindi ) –

सरदार स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर संविधान के 42 वें संशोधन अधिनियम 1976 में मौलिक कर्तव्यों (fundamental Rights Hindi) को संविधान में जोड़ा गया. इसे रुस के संविधान से लिया गया! मौलिक कर्तव्य को संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 51 का के तहत जोड़ा गया! वर्तमान में 11 मौलिक कर्तव्य प्राप्त है! मौलिक कर्तव्यों का वर्णन इस प्रकार है –

फंडामेंटल राइट्स इन हिंदी (fundamental rights hindi) –

 
(1) संविधान का पालन करें उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें! 
 
(2) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोय रखे और उनका पालन करें! 
 
(3) भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण रखें! 
 
(4) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उनका परीक्षण करें! 
 
(5) भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का विकास करें जो धर्म ,भाषा और प्रदेश या वर्ग आधारित हुई भेदभाव सभी भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध है! 
 
(6) प्राकृतिक पर्यावरण की इसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव है, रक्षा करें और उसका संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दया का भाव रखें! 
 
(7) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें! 
 
(8) सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करें तथा हिंसा से दूर रहें! 
 
(9) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्र में उत्कृष्ट की ओर बढ़ने का प्रयास करें जिससे राष्ट्रीय निरंतर बढ़ते हुए और उपलब्धि की नई ऊंचाईयों को छू ले! 
 
(10) देश की रक्षा करें और आवाहन किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें! 
 
(11) 6 से 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को माता-
पिता या संरक्षण द्वारा प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराना! 

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Attorney General of India in hindi

Attorney genera of india in hindi
Attorney General of India in hindi

भारत के महान्यायवादी (Attorney general of india in hindi) –

संविधान के आर्टिकल 76 में भारत के महान्यायवादी के पद की व्यवस्था की गई है. यह देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है! इसी प्रकार राज्य का मुख्य कानूनी अधिकारी (Attorney genera of india in hindi)राज्य महाधिवक्ता  कहलाता है!

नियुक्ति (Appointment of Attorney general of india in hindi) –

भारत के अटॉर्नी जनरल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है! उसमें उन सभी योग्यता का होना आवश्यक है, जो उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए आवश्यक होती है!
अन्य शब्दों में उसके लिए आवश्यक है कि वह भारत का नागरिक हो, उसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में काम करने का पांच वर्षों का अनुभव हो या किसी उच्च न्यायालय में वकालत का दस वर्षों का अनुभव राष्ट्रपति के मतानुसार वह न्यायिक मामलों का योग्य व्यक्ति हो!

हटाने की प्रक्रिया (Removal Process of Attorney general of india in hindi) –

महान्यायवादी के कार्यकाल को संविधान द्वारा निश्चित नहीं किया गया है! इसके अलावा संविधान में उसे हटाने को लेकर कोई मूल व्यवस्था नहीं दी गई है! वह अपने पथ पर राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत तक बने रह सकता है! इसका तात्पर्य है कि उसे राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय हटाया जा सकता है और वह राष्ट्रपति को कभी अपना त्यागपत्र सौंपकर पदमुक्त हो सकता है!
परंतु जब सरकार त्यागपत्र देती है या उसे बदल दिया जाता है तो महान्यायवादी को भी त्यागपत्र देना होता है क्योंकि उसकी नियुक्ति भी सरकार की सिफारिश से ही होती है! महान्यायवादी के वेतन को निर्धारित करने की शक्ति राष्ट्रपति को प्राप्त है! 

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संप्रभुता(Samprabhuta)क्या है? संप्रभुता का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, लक्षण

Samprabhuta
संप्रभुता (Samprabhuta) -

संप्रभुता (Samprabhuta) –

संप्रभुता को अंग्रेजी में Sovereignty कहते हैं. Sovereignty शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के शब्द Superanus से हुई है, जिसका अर्थ होता है – सर्वोच्च सत्ता! 
 
संप्रभुता शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग फ्रांसीसी विचारक बोंदा ने अपनी पुस्तक The Six Books of The Republic में किया. इस प्रकार संप्रभुता शब्द 16 वीं शताब्दी में अस्तित्व में आया! 
 

संप्रभुता क्या है(Samprabhuta Kya he )  – 

संप्रभुता शब्द का अर्थ है कि कोई देश अपने आंतरिक और बाहरी मामलों में पूर्ण रुप से स्वतंत्र है और किसी विदेशी सत्ता के अधीन नहीं है! वह देश अपनी नीतियों को बनाने तथा उन्हें लागू करने में पूरी तरह से स्वतंत्र हैं! किसी दूसरे देश के उसके आंतरिक है तथा बाहरी मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं है! 
 

संप्रभुता की परिभाषा ( Samprabhuta ki Paribhaasha) – 

गैटिल – संप्रभुता ही राज्य का वह लक्षण है जो इसे अन्य समुदायों से अलग करता है! 
 
लास्की – संप्रभुता के कारण ही राज्य अन्य मानव समुदायों से भिन्न है! 
 
बोंदो – संप्रभुता  नागरिक और प्रजा के ऊपर सर्वोच्च शक्ती है और कानून इसे नियंत्रित नहीं कर सकता ! 
विलोबी –“संप्रभुता राज्य की सर्वोच्च इच्छा है”
 
डैविड हैल्ड – संप्रभुता का अर्थ समुदाय के अंदर प्राधिकार जिसके पास एक प्रदत क्षेत्र के भीतर नियम, विनिमय और  नियम निर्धारण के लिए अविवादित अधिकार होता है! 

भारतीय संविधान की विशेषताएं बताइए (bhartiya samvidhan visheshta)

 

भारतीय संविधान की विशेषताएं बताइए

 

भारतीय संविधान की विशेषताएं (bhartiya samvidhan visheshta) –

भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा और लिखित संविधान है भारतीय संविधान के निर्माण में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन का समय लगा! संविधान के प्रारूप पर कुल 114 दिन बहस चली.संविधान के निर्माण कार्य में कुल मिलाकर लगभग 64 लाख ₹ का खर्च आया! 
 

Bhartiya samvidhan visheshta –

(1) नम्यता एवं अनम्यता का समन्वय – 

संविधान संशोधन की प्रक्रिया के आधार पर संविधान को
नम्य और अनम्य संविधान में वर्गीकृत किया जाता है! वह संविधान जिसमें संशोधन करने के लिए विशेष या कठोर प्रक्रिया की आवश्यकता होती है, उसे कठोर या अनम्य संविधान कहते हैं! 
 
लचीला या नम्य संविधान, वह संविधान जिसमें संशोधन की प्रक्रिया वही हो, जैसी किसी आम कानूनों के निर्माण की हो जैसे – ब्रिटेन का संविधान!
 
भारत का संविधान ना तो इतना लचीला है कि कोई भी सत्ताधारी दल अपने स्वार्थ के लिए उसमें संशोधन कर सके नहीं इतना कठोर है कि उसमें जनकल्याण के लिए संशोधन ना किया जा सके! 
भारत का संविधान ना तो लचीला है नहीं ही कठोर है, बल्कि यह दोनों का मिलाजुला रूप है! अनुच्छेद 368 में दो तरह के संविधान संशोधन का प्रावधान है! (bhartiya samvidhan visheshta )
 

(2) सरकार का संसदीय रूप – 

भारतीय संविधान में सरकार के संसदीय स्वरूप को अपनाया गया है जिसकी निम्न विशेषताएं है
(1) बहुमत दल की सरकार! 
(2) वास्तविक व नाममात्र कार्यपालिका की उपस्थिति
(3) विधायिका के समक्ष एक कार्यपालिका की संयुक्त जवाबदेही
(4) विधायिका में मंत्रियों की सदस्यता
(5) प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा सदन का नेतृत्त्व! 
(6) निचले सदन का विघटन होना और उच्चसदन का स्थाई होना! 
 

(3) एकीकृत एवं स्वतंत्र न्यायपालिका –

भारतीय संविधान एक एकीकृत एवं स्वतंत्र न्यायपालिका की स्थापना करता है भारतीय न्याय व्यवस्था में सर्वोच्च न्यायालय शीर्ष पर है इसके नीचे राज्य स्तर पर उच्च न्यायालय है, इसी प्रकार राज्यों में उच्च न्यायालय के नीचे क्रमवार अधीनस्थ न्यायालय है! 
 
सर्वोच्च न्यायालय संघीय न्यायालय है, क्योंकि यह केंद्र और राज्य दोनों के लिए समान है! न्यायालयों का एकल तंत्र केंद्रीय कानूनों के साथ-साथ राज्य कानूनों को भी लागू करता है! सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों का संरक्षक है! (bhartiya samvidhan visheshta)
 

(4) सार्वभौम वयस्क मताधिकार – 

भारतीय संविधान द्वारा राज्य विधानसभाओं और लोकसभा के चुनाव के आधार स्वरूप सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को अपनाया गया है! हर वह व्यक्ति जिसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है, उसे धर्म, जाति, लिंग, साक्षरता अथवा संपदा इत्यादि के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना मतदान करने का अधिकार है! 
 
वर्ष 1990 में 61 वा संविधान संशोधन अधिनियम 1981 के द्वारा मतदान करने की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया था! 

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राज्य महाधिवक्ता(Advocate General hindi)

Advocate General hindi

महाधिवक्ता (Advocate General hindi) –

संविधान के अनुच्छेद 165 में राज्य के महाधिवक्ता की व्यवस्था की गई है वह राज्य का सर्वोच्च एक कानून अधिकारी होता है!  इसी प्रकार के अंदर का सर्वोच्च कानूनी अधिकारी महान्यायवादी होता है
 

नियुक्ति (Appointment Of Advocate General hindi) – 

महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है. राज्यपाल उस व्यक्ति को महाधिवक्ता नियुक्त करता है जिसमें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यता हो.इसके अलावा वह भारत का नागरिक होना चाहिए उसे 10 वर्ष तक न्यायिक अधिकारी का या उच्च न्यायालय में 10 वर्ष तक वकालत करने का अनुभव भी होना चाहिए! 
 

कार्यकाल (Tenure Of Advocate General hindi) – 

संविधान द्वारा महाधिवक्ता के कार्यकाल को निश्चित नहीं किया गया है इसके अतिरिक्त संविधान में उसे हटाने की व्यवस्था का भी कोई वर्णन नहीं है. वह अपने पद पर राज्यपाल के प्रसादपर्यंत बना रहता है अर्थात उसे राज्यपाल द्वारा कभी भी हटाया जा सकता हैं! 
 
वह अपने पद से त्यागपत्र देकर भी कार्य मुक्त हो सकता है सामान्यतः वह त्यागपत्र तब देता है, जब सरकार त्यागपत्र देती है या पुनर्स्थापित होती है क्योंकि उसकी नियुक्ति सरकार की सलाह पर होती है! 
 
महाधिवक्ता को वे सभी विशेष अधिकारों भत्ते मिलते हैं जो विधान मंडल के सदस्य को मिलते हैं. संविधान में महाधिवक्ता के वेतन भत्तों को निश्चित नहीं किया गया है, उसके वेतन और भत्तों का निर्धारण राज्यपाल द्वारा किया जाता है! 

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भारतीय संविधान के विभिन्न स्त्रोत (Bhartiya Samvidhan Strot)

भारतीय संविधान के स्त्रोत ( Bhartiya samvidhan strot) – भारतीय संविधान में अनेकों उपबंधों को अन्य देशों के संविधान से अपनाया गया है, Bhartiya Samvidhan Strot इस प्रकार है –       स्त्रोत अन्य देशों से ली गई विशेषताएँ भारत शासन अधिनियम, 1935 न्यायपालिका, संघीय तंत्र, राज्यपाल का कार्यालय, लोक सेवा आयोग, आपातकालीन उपबंध … Read more

संसदीय समितियां (Parliamentary Committees)

Parliamentary Committees

    Parliamentary Committees in hindi –  संसद बहुत बड़ी अथवा भारी-भरकम संस्था है वह अपने समक्ष लाए गए विषय को प्रभावकारी ढंग से स्वयं निष्पादन नहीं कर सकती! संसद के कार्य विविध, जटिल और वृहद होते हैं! साथ ही संसद के पास न तो इतना समय है, न हीं आवश्यक विशेषज्ञता, जिससे कि समस्त … Read more

दबाव समूह (Pressure Group)क्या है? इनके प्रकार,कार्य,दोष और महत्व

Pressure group in hindi

दबाव समूह (Pressure Group) –

दबाव समूह (Pressure Group) से आशय समान हित वाले ऐसे लोगों के संघ या संगठन से है जिनका उद्देश्य अपने संगठन प्रयासों के द्वारा अपने हितों की पूर्ति के लिए राजनीति सत्ता को प्रभावित करना है और अपने हितों पूर्ति के लिए उस पर दबाव डालना है!

 

दबाव समूह को हितैषी समूह या हितार्थ समूह भी कहा जाता है! यह राजनीतिक दलों से भिन्न होते हैं ये न तो चुनाव में भाग लेते हैं और न ही राजनीतिक शक्तियों को प्राप्त करने की कोशिश करते हैं! यह कुछ खास कार्यक्रमों और मुद्दों से संबंधित होते हैं और इनकी इच्छा सरकार में प्रभाव बनाकर अपने सदस्यों की रक्षा और हितों को बढ़ाना होता है! 

 

दबाव समूह के लक्षण (characteristics Of Pressure Group) –

(1) दबाव समूह का उद्देश्य सार्वजनिक हित के स्थान पर अपने सदस्यों का हित कल्याण करना होता है! 
(2) दबाव समूह का उद्देश्य सीमित होता है, किसी वर्ग विशेष के हितों की रक्षा करना इनका उद्देश्य होता है! 
 
(3) दबाव समूह अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संवैधानिक और असवैधानिक साधनों का प्रयोग आवश्यकतानुसार करते हैं! 
 
(4) Pressure Group का स्वरूप संगठित या असंगठित प्रकार का हो सकता है! 
 
(5) दबाव समूह पूंजीवादी राष्ट्र तथा लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में अधिक फलीभूत होते हैं! 

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