पृथ्वी की आंतरिक संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए (prithvi ki aantrik sanrachna)

 पृथ्वी की आंतरिक संरचना (prithvi ki aantrik sanrachna) – पृथ्वी की आंतरिक संरचना परतदार है! वायुमंडल के बाहरी छोर से पृथ्वी के क्रोड तक जो पदार्थ है वे समान नहीं है! वायुमंडलीय पदार्थ का घनत्व सबसे कम है! पृथ्वी की …

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सुदूर संवेदन क्या है इतिहास, प्रकार, उपयोग, चुंबकीय स्पेक्ट्रम किसे कहते हैं? (Remote Sensing in hindi)

  सुदूर संवेदन क्या है (what is Remote Sensing in Hindi) – सर्वप्रथम रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing in hindi) शब्द का प्रयोग 1960 के दशक में किया गया था,परंतु बाद में सुदूर संवेदन की परिभाषा इस प्रकार दी गई – …

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भूगर्भशास्त्र की परिभाषा,महत्व, शाखाएँ (Geology in hindi )

  भूविज्ञान (भूगर्भशास्त्र Geology in hindi ) – पृथ्वी से संबंधित ज्ञान ही भूविज्ञान (geology) कहलाता है! इसे भूगर्भशास्त्र भी कहते हैं! भूविज्ञान विज्ञान की वह शाखा है जिसमें ठोस पृथ्वी का निर्माण करने वाली शैलों तथा उन प्रक्रियाओं का …

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प्राकृतिक गैस क्या है? प्राकृतिक गैस के उपयोग, प्रकार, प्रभाव

प्राकृतिक गैस क्या है ( Natural Gas in hindi) – खनिज तेल के साथ गैस की कुछ मात्रा संयुक्त रुप में उपस्थित होती है, जिसे प्राकृतिक गैस (Natural Gas) कहते हैं ! यह जीवाश्म ईंधन हैं! यह तटीय क्षेत्रों एवं …

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मैदान एवं उसके प्रकार (Plains and Its type in hindi)

plains

मैदान (Plain in hindi)

 500 फीट से कम ऊंचाई वाले भूपृष्ठ के समतल भाग को मैदान (Plains) कहते हैं मैदान अति कम स्थानीय उच्चावच के क्षेत्र होते हैं तथा इनका ढाल अति मंद होता है! किसी क्षेत्र में सबसे ऊंचे तथा सबसे नीचे स्थानों के बीच ऊंचाई के अंतर को स्थानीय उच्चावच कहते हैं !

मैदान(Plains) धरातल के 55% भाग पर फैले हुए हैं नदियों के अलावा कुछ मैदानों का निर्माण वायु, ज्वालामुखी और हिमानी द्वारा भी होता है! भारत के 43% भूभाग पर मैदान पाए जाते हैं ! 

बनावट के आधार पर मैदान तीन प्रकार के होते हैं

Plains

संरचनात्मक मैदान (structural plains in hindi) –

इन मैदानों का निर्माण मुख्यतः सागरीय तल अर्थात महाद्वीपीय निम्न तट के उत्थान के कारण होता है! ऐसे मैदान प्राय सभी महाद्वीपों के किनारों पर मिलते हैं! मेक्सिको की खाड़ी के सहारे फैला संयुक्त राज्य अमेरिका का दक्षिण पूर्वी मैदान इसका उदाहरण है ! भूमि के नीचे धसने के कारण भी संरचनात्मक मैदानों का निर्माण होता है ! ऑस्ट्रेलिया के मध्यवर्ती मैदान का निर्माण इसी प्रकार से हुआ है !  

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झील किसे कहते हैं? झील (Lakes) की उत्पत्ति एवं वर्गीकरण,महत्व, झीलों से संबंधित कुछ तथ्य

 

झील, उत्पत्ति एवं वर्गीकरण

 

झील किसे कहते हैं (Lakes in hindi) –

सामान्यता एक झील (lakes) कोई स्थल खंड पर स्थित जल से भरे गर्त के रूप में परिभाषित किया जाता है ! झीले आंतरिक भूमि के वह भाग होते हैं जहां जल विद्यमान होता है ! साधारणत: झीले स्थाई होती है! बढ़ती आबादी तथा जल के अभाव में झील लोगों के लिए जल का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है! वे अचानक आई बाढ़ तथा सूखे की स्थिति से भी लोगों को बचाते हैं! 

झीलों की उत्पत्ति एवं वर्गीकरण (Origin And Classifications of Lakes in hindi) –

झीले संसार के लगभग सभी भागों में पाई जाती है! परंतु इसका विश्व वितरण एक समान नहीं है! धरातल पर प्राकृतिक गर्तों का होना, इन गर्तो के तल में अपारगम्य चट्टानों का पाया जाना तथा वर्षा अथवा हिम के पिघलने से समुचित मात्रा में जल की आपूर्ति झीलों की उत्पत्ति तथा वितरण को प्रभावित करने वाले कारक है !

झील कौ उनके पानी की प्रकृति के आधार पर स्वच्छ पानी की झीले तथा खारे पानी की झीलों में वर्गीकृत किया जा सकता है! 

मीठे ( स्वच्छ ) पानी की झीलें (Sweat Water Lakes in hindi) –

इन झीलों का पानी मीठा होता है तथा इनमें पानी की आपूर्ति नदियों अथवा हीम के पिघलने से होती है! उच्च तथा मध्य अक्षांशों के आर्द्र क्षेत्रों में इस प्रकार की झीलें अधिक पाई जाती है! बैकाल, मानसरोवर, टिटिकाका, वुलर, डल, आदि स्वच्छ पानी की झीले हैं!

खारे पानी की झीले (Solt Water lakes in hindi)-

ये झीले सामान्यतः कम वर्षा वाले क्षेत्रों, आंतरिक अपवाह वाले क्षेत्रों अथवा उच्च वाष्पीकरण वाले क्षेत्रों में पाई जाती है! इन झीलों से नदियाँ नहीं निकलती तथा इनके पानी का परिवर्तन अथवा नवीनीकरण नहीं होता, जिसे इन झीलों में लवण एकत्र होते रहते हैं और झीले खारी हो जाती है ! 

उत्पत्ति के आधार पर झीलें दो प्रकार की होती हैं (There are two types of lakes on the basis of origin in hindi) –

प्राकृतिक झीलें (Natural Lakes in hindi) –

natural lakes

प्राकृतिक झीले विवर्तनिकी हलचलों, ज्वालामुखी क्रियाओं तथा विभिन्न अपरदन तथा निक्षेपण के कारकों के कार्यों से बनती है! अभिनतियों में निर्मित रिफ्ट घाटियों में बनी झील, अवशिष्ट झीले झीले तथा भूकंप के कारण नीचे धसे क्षेत्रों में बनी झीले विवर्तनिक हलचलो से उत्पन्न झीलों के उदाहरण हैं! 

उदाहरण – लोनार (क्रेटर) बैकाल, अरल सागर ,मृत सागर, चाड झील आदि ! 

मानव निर्मित या कृत्रिम झीलें (Artificial Lakes in hindi) –

Artificial Lakes

मानव द्वारा निर्मित झीलों को कृत्रिम झील कहते हैं! यद्यपि कृत्रिम झीलों का निर्माण विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है, परंतु सिंचाई तथा जल विद्युत उत्पादन के लिए बनाए गए बांधों से बनी झीलों इनमें सबसे महत्वपूर्ण है! कुछ कृत्रिम झीलों का निर्माण नगरों के लिए जलापूर्ति के लिए तथा प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी किया जाता है! 

उदाहरण – गोविंद सागर, गांधी सागर, जवाहर सागर आदि! 

झीलों का महत्व या लाभ – 

झील मानव के लिए अत्यधिक लाभदायक होती है! एक झील नदी के बहाव को सुचारू बनाने में सहायक होती है! अत्याधिक वर्षा के समय यह बाढ़ को रोकती है तथा सूखे के मौसम में यह पानी के बहाव को संतुलित करने में सहायता करती है! झीलों का प्रयोग जलविद्युत उत्पन्न करने में भी किया जा सकता है! 
 
 

झीलों का आर्थिक महत्व –

(1) नौकायन के माध्यम से धन या आय की प्राप्ति होती है! 

(2) झीलों में तैराकी प्रतियोगिता होती है! 

(3) झीलों के आसपास बसे शहरों को जलापूर्ति भी झीलों से ही होती है! 

(4) झीलों में कई प्रकार के जलीय खेलों का आयोजन होता है! 

(5) झीलें पर्यटन को बढ़ावा देती हैं! विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं, जिससे विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती हैं! 

भारत की प्रमुख झीले (Indias Important lakes in hindi) –

 भारत में अनेक सुंदर एवं दर्शनीय झीलें हैं  भारत की प्रमुख झीलें (Bharat ki pramukh jhile) इस प्रकार है –
 

(1)चिल्का झील (Chilka Jhil) –

चिल्का भारत की सबसे बड़ी तटीय झील है जो उड़ीसा में स्थित है यहां खारे पानी की एक लैगून झील है!चिल्का झील की लंबाई 65KM चौड़ाई 9 से 20KM.और गहराई लगभग 2 मी.है! इसे दया और भार्गवी नदी से जल प्राप्त होता है यहां पर नौसेना का प्रशिक्षण केंद्र अवस्थित है ! 
 

(2)वुलर झील(Vular Jhil)-

वूलर झील भारत में सबसे मीठे पानी की झील है यह कश्मीर घाटी (जम्मू कश्मीर) में स्थित है! इसका क्षेत्रफल 160 वर्ग किमी.है! इस पर तुलबुल परियोजना संचालित की जा रहीं हैं! झील की उत्पत्ति प्लास्टोसीन युग में विवर्तनिकी क्रियाओं के कारण हुई है ! इसको झेलम नदी से जल की प्राप्ति होती है
 

(3) सांभर झील(Sambhar Jhil)-

यह भारत की सर्वाधिक खारे पानी की झील है! यह जयपुर के समीप (राजस्थान) में स्थित है, इसका क्षेत्रफल 160 वर्ग किलोमीटर है! एजेंसी नमक की प्राप्ति होती है! हजारों साइबेरिया पक्षी जाड़े के मौसम में प्रवास कर इस झील में आते हैं! सांभर झील को रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है! 
 

(4) लोकटक झील(Lokatak Jhil) –

लोकतक झील (मणिपुर) पूर्वोत्तर भारत में मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है इस झील में केबुललामजाओं नाम का तैरता हुआ राष्ट्रीय पार्क स्थित है! इस झील को विश्व में तैरती द्वीपीय झील के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यहां तैरते हुए फुम्डिज होते हैं! 
 

(5) कोलेरु झील(Koleru Jhil) –

यह आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु की सीमा पर स्थित है, इसका 84% भाग आंध्र प्रदेश में एवं 16% भाग तमिलनाडु में पड़ता है! यह कोरोमंडल तट पर स्थित दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील है इसे अरानी, कालंजी एवं स्वर्णमुखी नदियों से जल की प्राप्ति होती है! 
 
श्रीहरिकोटा द्वीप से बंगाल की खाड़ी से अलग करता है, श्रीहरिकोटा द्वीप पर ही सतीश धवन उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र स्थित है! इस दिल पर एक पक्षी अभ्यारण भी 1980 में स्थापित किया गया था! 
 
 Indias Important lakes in hindi

 

 

(6) डल झील(Dull Jhil)- 

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जीवाश्म क्या है,जीवाश्मीकरण, (Jivashm) जीवाश्म का महत्व/ उपयोग, प्रकार

जीवाश्म क्या है (What is fossil in hindi) – जीवो की मृत्यु के पश्चात उनके शरीर का अपघटन हो जाता है और वह समाप्त हो जाते है परंतु कभी-कभी जीव या उसके कुछ भाग ऐसे वातावरण में चले जाते हैं …

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