मृदा(Soil)

Soil

मृदा की परिभाषा ( definition of Soil) – Soil शब्द लैटिन भाषा के शब्द सोलम से लिया गया है, जिसका तात्पर्य पृथ्वी की ऊपरी सतह से है ! डाकु चैन को मृदा विज्ञान का जनक कहा जाता है ! धरातल पर प्राकृतिक तत्वों के समुच्चय जिसमें जीवित पदार्थ तथा पौधों को पोषित करने की क्षमता … Read more

नदी(RIver),नदियों के प्रकार

River

नदी (River In Hindi) – एक निश्चित मार्ग पर तथा निश्चित दिशा में स्थल पर बहती हुई जल धारा को नदी(Rivers) कहा जाता है! नदी भूतल पर प्रवाहित एक जलधारा है इसका स्त्रोत प्रायः कोई झील, हिमनद, झरना या बारिश का पानी होता है तथा किसी सागर अथवा झील में गिरती है ! नदी शब्द … Read more

पठार(Plateau)किसे कहते है? पठार के प्रकार एवं महत्व

Plateau

पठार (plateau) – वह भूखंड जो आसपास की भूमि से एकाएक उभरे होते हैं तथा जिनके ऊपरी भाग लगभग समतल होते हैं, उन्हें पठार (plateau) कहा जाता है!  सामान्यतः पठार पर्वतों से कम ऊंचे होते हैं परंतु कुछ पठार पर्वतों से भी ऊंचे होते हैं जैसे – तिब्बत का पठार, बोलीविया का पठार ,कोलंबिया का … Read more

कोयला(Koyla),कोयला निर्माण की प्रक्रिया,कोयला के प्रकार, नकारात्मक प्रभाव

  कोयला (Coal) – कोयला (koyla) एक ठोस कार्बनिक पदार्थ है जिसको इंधन के रूप में प्रयोग में लाया जाता है ! ऊर्जा के प्रमुख स्रोत के रूप में कोयला अत्यंत महत्वपूर्ण है! कुल प्रयुक्त ऊर्जा का 35% से 40% भाग कोयले से प्राप्त होता है ! कोयले से अन्य दहनशील तथा उपयोगी पदार्थ भी … Read more

Mountain and Mountain types in hindi

 पर्वत ( Mountain) – पर्वत भूखंड के वे भाग है जो आस-पास के क्षेत्र से ऊँचे होते हैं तथा जिनका अधिकांश क्षेत्रफल तीव्र ढाल के अंतर्गत होता है ! साधारण पर्वतों की ऊंचाई 600 मीटर या उससे अधिक होती है! पर्वतों का निर्माण सामान्यतः कई श्रृंखलाएं से मिलकर होता है ! एक ऐसे ऊंचे क्षेत्र … Read more

Weathering and Erosion in hindi

अपक्षय की परिभाषा (Weathering) अपक्षय वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पृथ्वी की सतह पर मौजूद चट्टाने में टूट-फूट होती है ! इस टूट-फूट से निर्मित भूपदार्थों का एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरण या परिवहन नहीं होता ! अपक्षय के द्वारा चट्टानों का विघटन तथा वियोजन होता है! यह स्थैतिक क्रिया है!  अपक्षय के प्रकार … Read more

चटटान(rocks) की परिभाषा, चटटानो के प्रकार,शैल चक्र

Rocks-hindi

शैल (चटटान) की परिभाषा ( Rocks in hindi) –

पृथ्वी के क्रस्ट में मिलने वाले सभी प्रकार के मुलायम व कठोर पदार्थ जो विभिन्न प्रकार के खनिज तत्वों से बने होते हैं , चट्टान कहलाते हैं! चट्टानों में खनिज घटकों का कोई निश्चित संगठन नहीं होता है!

भू वैज्ञानिकों के अनुसार 2000 खनिजों का पता लगाया जा चुका है किंतु केवल 24 खनिजों को ही चट्टान निर्माता खनिज की संज्ञा दी जाती है ! चटटान निर्माण में 8 प्रमुख तत्वों का सर्वाधिक योगदान होता है!

ऑक्सीजन(47%),सिलिकॉन(28%),एल्यूमिनियम(8%),लोहा(5%),कैल्शियम(3.5%),सोडियम(3%),पोटैशियम(2.5%),मैग्निशियम(2%),कुछ चट्टाने एक ही खाने से निर्मित होती है , जैसे चूना पत्थर ! जबकी कुछ चट्टाने अन्य खनिजों के सम्मिश्रण से निर्मित होती है जैसे ग्रेनाइट, माइका आदिि !

चटटानो के प्रकार / वर्गीकरण ( Type of Rocks in hindi) –

(1)आग्नेय चटटान(Igneous Rocks in hindi) –

आग्नेय चट्टानों को प्रारंभिक चट्टाने या मूल चट्टानने भी कहा जाता है क्योंकि पृथ्वी की उत्पत्ति के पश्चात सर्वप्रथम इन्हीं का निर्माण हुआ ! इनका निर्माण ज्वालामुखी उद्गार के समय वह भूगर्भ से निकलने वाले लावा के ठंडे होने से हुआ!

पृथ्वी का आंतरिक भाग गर्म है, जहां अत्याधिक ताप के कारण सभी तत्व पिघली अवस्था में रहते है! लावा में खनिज एवं अन्य तत्व पिघली अवस्था में रहते हैं इसलिए लावा से बनने वाली इन चटटानो में अनेक खनिज मिलते हैं जैसे ग्रेनाइट एवं बेसाल्ट की चट्टाने ! स्थिति एवं संरचना के दृष्टिकोण से आग्नेय चटटान दो प्रकार की होती है – अंतः निर्मित एवं बाहय निर्मित !

 (A)अंतः निर्मित आग्नेय चटटाने –

जब पृथ्वी के अंदर स्थित मेग्मा सतह के नीचे ठंडा होकर ठोस रूप धारण कर लेता है तो इससे अंतर्निर्मित आग्नेय चट्टानों का निर्माण होता है ! इसके भी दो उपवर्ग है – (1) पाताली चट्टाने (2) मध्यवर्ती चट्टानेे

(B) बाहय निर्मित आग्नेय चट्टानने –

ज्वालामुखी के उदभेदन के समय मेग्मा धरातल पर फैल जाता है तथा इस मेग्मा के धरातल पर आकर ठंडा होने से जिन चट्टानों का निर्माण होता है उन्हें बाहय निर्मित आग्नेय चट्टानने कहा जाता है इन्हें ज्वालामुखी चट्टाने भी कहते हैं – जैसे बेसाल्ट!

आग्नेय चट्टानों की विशेषता/ महत्व –

(1) ये चटटाने रवेदार होती हैं!

(2) आग्नेय चट्टाननें मेग्मा या लावा के जमने से बनती हैं, इसलिए ये अत्यधिक कठोर एवं ठोस होती हैं

(3) आग्नेय चट्टानों में जीवाश्मविहीन होती हैं !

(4) ये चट्टाने परत विहीन होती है लेकिन यांत्रिक एवं भौतिक अपक्षय के कारण इनका विघटन एवं वियोजन प्रारंभ हो जाता है!

(5) आग्नेय चट्टानों में रंद्र या छिद्र नहीं पाए जाते हैं जैसे परतदार चट्टानों में होते हैं!

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पृथ्वी की आंतरिक संरचना (prithvi aantrik sanrachna) को समझाइए

पृथ्वी का आंतरिक संरचना को समझाइए

 

पृथ्वी का आंतरिक संरचना (prithvi aantrik sanrachna) –

पृथ्वी का आंतरिक भाग (prithvi aantrik sanrachna) तीन तरह की परतों से मिलकर बना है जिन्हें भूपर्पटी, मेंटल और क्रोड कहते हैं

भूपर्पटी (Crust) –

यह ठोस पृथ्वी का सबसे बाहरी भाग है! यहां बहुत भंगुर भाग है जिसमें जल्दी टूट जाने की प्रवृत्ति पाई जाती है भूपर्पटी की मोटाई महाद्वीप और महासागरों के नीचे अलग-अलग है यह महाद्वीपों पर 30 किलोमीटर तथा महासागरीय क्षेत्र में 5 किलोमीटर मोटी है इसका निर्माण भारी चट्टानों से हुआ है इसका घनत्व 3 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर है 

महासागरों के नीचे ऊपर पट्टी विशाल चट्टानों से निर्मित है जिसका घनत्व 2.7 ग्राम प्रति सेंटीमीटर है! इसके दो भाग हैं सियाल और सीमा! 

भूकंप की लहरों की गति में अंतर के आधार पर क्रस्ट को दो भागों में ऊपरी क्रस्टऔर निचले कस्टम में विभक्त किया गया है दोनों के मध्य अंतर का कारण घनत्व है ऊपरी वन इसलिए निचले क्रस्ट के बीच यह घनत्व संबंधी असंबद्धता कोनराड असंबद्धता कहलााती है! (prithvi aantrik sanrachna)

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सुदूर संवेदन(Remote Sensing Hindi)क्या है,विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम किसे कहते हैं?

सुदूर संवेदन(Remote Sensing Hindi) क्या है- सर्वप्रथम रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing Hindi) शब्द का प्रयोग 1960 के दशक में किया गया था,परंतु बाद में सुदूर संवेदन की परिभाषा इस प्रकार दी गई – सुदूर संवेदन एक ऐसी प्रक्रिया है जो भूपृष्ठीय वस्तुओं एवं घटनाओं की सूचनाओं का संवेदक, युक्तियों के द्वारा बिना वस्तु के संपर्क … Read more

भूविज्ञान (भूगर्भशास्त्र ),(Geology importance)भूविज्ञान का महत्व

भूविज्ञान (भूगर्भशास्त्र ) – पृथ्वी से संबंधित ज्ञान ही भूविज्ञान कहलाता है भूविज्ञान विज्ञान की वह शाखा है जिसमें ठोस पृथ्वी का निर्माण करने वाली शैलों तथा उन प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है जिनके कारण भूपर्पटी, स्थलरूपों, और शैलों  का विकास होता है! इसके अंतर्गत पृथ्वी संबंधी अनेकों अनेक विषय आ जाते हैं जैसे … Read more

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