बायोटेक्नोलॉजी क्या है? बायोटेक्नोलॉजी की परिभाषा, इतिहास, प्रकार, महत्व सीमाएँ

बायोटेक्नोलॉजी क्या है (what is Biotechnology in hindi upsc) –

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बायोटेक्नोलॉजी या जैव प्रौद्योगिकी शब्द की उत्पत्ति जीव विज्ञान और प्रौद्योगिकी शब्दों के परस्पर मिलने से हुई है! यह जैविक कारकों, जैसे सूक्ष्म जीवों, जंतुओं और पादप कोशिकाओं अथवा उनके अवयवों में होने वाली क्रियाओं के नियंत्रित उपयोग से मानव के लिए उपयोगी उत्पाद का निर्माण करने वाली प्रौद्योगिकी है! 

बायोटेक्नोलॉजी की परिभाषा (definition of biotechnology in hindi upsc) –

जैव तकनीक जीव विज्ञान का वह प्रभाग है जिसमें जैविक प्रक्रियाओं का उपयोग उन पदार्थों के उत्पादन के लिए किया जाता है, जिनका इस्तेमाल उद्योगों, कृषि तथा अंखियों में होता है, अर्थात यह कहा जा सकता है कि सूक्ष्म जीव विज्ञान, जैव-रसायन तथा जैव रासायनिक अभियांत्रिकी का पूर्ण प्रयोग करते हुए सूक्ष्म जीवों और ऊतक संवर्द्धन से मानव कल्याण से संबंधित विभिन्न तकनीकी का प्रयोग करना ही जैव तकनीकी है! 

बायोटेक्नोलॉजी का इतिहास (history of biotechnology in hindi) – 

हजारों वर्षों से मानव कृषि, खाद्यान्न उत्पादन और औषधि निर्माण में जैव प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करता आया है! परंतु वर्ष 1972 को जैव तकनीक का उद्भव वर्ष कहा जा सकता है क्योंकि इसी वर्ष पॉल वर्ग ने आश्चर्यजनक प्रयोग कर सबको चकित कर दिया! पॉल ने दो भिन्न विषाणुओं के डी.एन.ए. अणुओं को संयुक्त कर एक नवीन डी.एन.ए.का निर्माण किया! वास्तव में इस प्रयोग को जैव तकनीकी का प्रारंभ कहा जा सकता है, क्योंकि इस प्रयोग की सफलता से असीम संभावना का मार्ग प्रशस्त हो गया!  

बायोटेक्नोलॉजी के विभिन्न आयाम – 

वर्तमान में जैव तकनीकी को एक बहुआयामी विज्ञान के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें निम्नलिखित बिंदुओं से संबंधित समस्याओं का अध्ययन एवं उपयोग सम्मिलित है –

(1) कोशिका, जीव द्रव्यक तथा ऊतक संवर्धन 

(2) आनुवंशिक इंजीनियरिंग

(3) जैविक, रासायनिक प्रतिक्रियाओं, जैव अपघटन तथा सूक्ष्म जीवों एवं अन्य जीवधारियों की विभिन्न प्रक्रियाओं का औद्योगिक स्तर पर लाभ उठाना! 

जैव प्रौद्योगिकी के सिद्धांत (jaiv praudyogiki ke siddhant) – 

आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के विकास में नैना दो तकनीकों का सर्वाधिक योगदान है, जो इस प्रकार है –

(1) आनुवंशिक इंजीनियरिंग

(2) रासायनिक इंजीनियरिंग

(1) आनुवंशिक इंजीनियरिंग – 

आनुवांशिक इंजीनियरिंग एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा वैज्ञानिक एक जीव के जीनोम को संशोधित करते हैं! इसमें रिकॉम्बिनेंट डी.एन.ए. तकनीक का उपयोग किया जाता है! इस तकनीक में अनुवांशिक पदार्थों के रासायन में परिवर्तन कर उसे परपोषी जीवो में प्रवेश कराया जाता है, जिससे इनके फीनोटाइप में परिवर्तन आ जाता है! 

(2) रासायनिक इंजीनियरिंग –

इसमें रोग मुक्त वातावरण के निर्माण द्वारा सिर्फ वांछित सूक्ष्मजीवों या यूकैरियोटिक कोशिकाओं में वृद्धि कराकर अधिक मात्रा में जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों, जैसे – प्रतिजैविकों, टीके, एंजाइम आदि का निर्माण किया जाता है! 

बायोटेक्नोलॉजी के प्रकार (types of biotechnology in hindi) –

(1) कृषि जैव प्रौद्योगिकी

(2) चिकित्सक जैव प्रौद्योगिकी

(3) पर्यावरण जैव प्रौद्योगिकी

(4) औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी

बायोटेक्नोलॉजी का महत्व एवं अनुप्रयोग (importance of biotechnology in hindi) – 

जैव प्रौद्योगिकी का कृषि में महत्व (jaiv praudyogiki ka krishi mein mahatva) –  

कृषि क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के द्वारा कीट प्रतिरोधी फसलों का निर्माण संभव हो सका हैं जो कीटनाशकों की मात्रा को कम प्रयोग में लाती हैं! कृषि के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी का बहआयामी उपयोग किया जा रहा है! इसके द्वारा आज हमें उत्तक संवर्धन, भ्रूण संवर्धन जैसी पौध प्रवर्धन विधियों प्राप्त हुई है!!

जैव प्रौद्योगिकी की मदद से ही आज फसलों की किस्मों एवं उत्पादन की गुणवत्ता में वृद्धि की जा सकती है! फसलों की समय सीमा को कम कर के किसी एक भूखंड पर बार-बार खाद्यान्न फसलों का उत्पादन किया जा सकता है! 

जैव प्रौद्योगिकी का स्वास्थ्य में उपयोग (jaiv praudyogiki ka swasthya kshetra me) – 

जीवाणुओं द्वारा इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन जैव प्रौद्योगिकी के द्वारा ही संभव हो सका है! इंसुलिन एक पॉलिपेप्टाइड हार्मोन है जो रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है! जैव प्रौद्योगिकी से हमें अमीनो अम्ल को  (L) एल रूप में प्राप्त कर सकते हैं जिसकी हमें आवश्यकता होती है, साथ ही इसकी लागत भी कम होती है!  जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से विभिन्न प्रकार के टीकों का निर्माण किया गया है! 

जैव प्रौद्योगिकी का पशुपालन में उपयोग (jaiv praudyogiki ka pashupalan me upyog)-  

पशु जैव प्रौद्योगिकी की विविध विधाओं, जैसे – भ्रूण हस्तांतरण, भ्रूण

 परिवर्द्धन, पोषण, स्वास्थ्य, रोग के उपचार, परखनली निषेचन में उल्लेखनीय प्रगति के माध्यम से पशुओं की नई नस्लें विकसित करने, भ्रूण सुधार एवं स्वास्थ्य सुधार में विशेष सफलता मिली है! भ्रूण स्थानांतरण तकनीक के सफल प्रयोग द्वारा मवेशियों की उत्पादकता बढ़ाई जा रही है! भ्रूण हस्तांतरण तकनीक का प्रयोग गाय, बैल, भैंस, भेड़, बकरी, घोड़ा, ऊंट आदि पशुओं पर सफलतापूर्वक किया गया है! 

रेशम उत्पादन में जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग (resham utpadan me jaiv praudyogiki ka upyog) –

आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के आगमन और इसके अनुप्रयोग ने रेशम उत्पादन के लिए संश्लेषित विज्ञान का एक नया क्षेत्र खोल दिया है। रेशम उद्योग की विशाल क्षमता का प्रभावी ढंग से आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकीय दृष्टिकोणों जैसे – मार्कर असिस्टेड सिलेक्शन और ट्रांसजेनिक दृष्टिकोणों के माध्यम से विदेशी प्रोटीन की अभिव्यक्ति के उपयोग से फायदा उठाया जा सकता है। दूसरी ओर, प्रोबायोटिक्स का उपयोग करके रेशम की गुणवत्ता को बढ़ाया गया है और रेशमकीटों को कृत्रिम चारा प्रदान किया गया है।

जैव प्रौद्योगिकी की सीमाएं (jaiv praudyogiki ki simaye –

(1) जैव प्रौद्योगिकी उद्योगों के लिए आरंभिक अवस्था में वित्त पोषण का अक भाव होता हैं! 

(2) विनियामक एवं अवसंरचनाओं के अभाव के कारण यह क्षेत्र चीन एवं कोरिया से प्रतिस्पर्धा में पिछडता जा रहा हैं! 

प्रश्न :- बायोटेक्नोलॉजी पार्क कहां स्थित है?

उत्तर :- बायोटेक्नोलॉजी पार्क उत्तर प्रदेश के लखनऊ में स्थित है! इस पार्क की स्थापना केंद्र और राज्य सरकारों यानी जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एक साझेदारी के रूप में की गई है! बायो टेक्नोलॉजी विभाग ने आवश्यक अवसंरचना सहायता प्रदान करके उत्पादों और सेवाओं में अनुसंधान का अनुवाद करने के लिए देश भर में बायो टेक्नोलॉजी पार्क/इनक्यूबेटर की स्थापना की है!

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