भूकंप क्या है? भूकंप (Bhukamp) की उत्पत्ति, कारण, प्रभाव, सुरक्षा उपाय, महत्व

भूकंप क्या है (Bhukamp Kya hai)-

साधारण भाषा में भूकंप (Bhukamp) का अर्थ है – पृथ्वी का कंपन! अर्थात  जब किसी ज्ञात से अज्ञात कारणों से भूपटल पर तीव्र कंपन उत्पन्न होता है तो उसे भूकंप (Earthquake) कहते हैं!!

जिस प्रकार के तालाब में पत्थर फेंकने पर उसमें तरंग उठकर चारों ओर फैलती है, उसी प्रकार भूकंप के मूल केंद्र से चारों ओर तरंगे बाहर ओर फैलती हैं और इन तरंगों के कारण भूकंप का एहसास मूल के अंदर से काफी दूर तक होता है! एक रेलगाड़ी के प्लेटफार्म पर आने पर इसी प्रकार के कंपन का अनुभव होता है! 

भूकंप के उद्भव स्थान को उसका केंद्र कहते हैं! भूकंप केंद्र के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु को भूकंप का अधिकेंद्र कहते हैं! अधिकेंद्र पर सबसे पहले पी तरंगे पहुंचती है

भूकंपीय तंरगे – 

भूकंप के दौरान जो ऊर्जा भूकंप केंद्र से निकलती है उसे प्रत्यास्थ ऊर्जा कहते हैं! भूकंप के दौरान कई प्रकार की भूकंपीय तरंगे उत्पन्न होती है, जिन्हें तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है –

(1) प्राथमिक या लंबवत तरंगे – 

ये अनुदैर्ध्य तरंगे है एवं ध्वनि तरंगों की भांति चलती है! इन्हें P तरंगें भी कहा जाता है! यह सर्वाधिक तीव्र गति से चलने वाली तरंग है और धरातल पर सबसे पहले पहुंचती है! यह ठोस, द्रव एवं गैस तीनों प्रकार के पदार्थों से गुजर सकती हैं! 

(2) द्वितीयक या गौण तरंगे –

ये अनुप्रस्थ तरंगे हैं एवं प्रकाश तरंगों की भांति चलती है! इन्हें S तरंगे भी कहा जाता है! यह सिर्फ ठोस माध्यम में ही चल सकती है! हिना का औसत वेग 4 किमी प्रति सेकंड होता है! 

(3) धरातलीय या एल तरंगे – 

इनकी खोज H. D. Love ने की थी! यह तरंगे मुख्यतः धरातल तक ही सीमित रहती हैं! ये ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यम से गुजर सकती है! इसकी चाल 1.5 से 3 किमी प्रति सेकंड होती है! सतही तरंगे अत्याधिक विनाशकारी होती हैं! यह सबसे लंबा मार्ग तय करने वाली तरंगें हैं! 

भूकंप की माप (Bhukamp ki map) – 

जिन संवेदनशील यंत्र द्वारा भूकंपीय तरंगों की तीव्रता मापी जाती है उन्हें भूकंपलेखी या सीम्सोग्राफ कहते हैं इसके 3 स्केल हैं –

(1) रॉसी फेरल स्केल! 

(2) मरकेली स्केल! 

(3) रिक्टर स्केल! 

समान भूकम्पीय तीव्रता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समभूकम्प रेखा कहते हैं! एक ही समय पर आने वाले भूकंपीय क्षेत्र को मिलाने वाली रेखा होमोसीस्मल लाइन कहलाती है! 

भूकंप के कारण (Bhukamp ke karan)-

यह प्राकृतिक तथा मानवीय दोनों ही कारणों से हो सकता है! प्राकृतिक कारणों में ज्वालामुखी क्रिया, विवर्तनिकी अस्थिरता,संतुलन के प्रयास, वलन एवं भ्रंशन व भूगर्भिक गैसों का फैलाव आदि शामिल किए जाते हैं!  

भूकंप क्यो आते हैं (Bhukamp kyu aate hai) –

प्रत्येक चटटान में तनाव सहने की एक क्षमता होती है उसके बाद यदि तनाव बल और अधिक हो जाए, तो चट्टाने टूट जाती है टूटा हुआ भाग पुनः अपने स्थान पर वापस आ जाता है! इस प्रकार चटटान में भ्रंशन की घटनाएं होती रहती है एवं भूकंप आते हैं!    

भूकंप के प्रभाव (Bhukamp ke prabhaav)- 

भू-कंप का प्रभाव सदैव विध्वंशक होता है! केवल बसे हुए क्षेत्रों में आने वाला भूकंप ही आपदा का संकट बनता है! भू-कंप के कारण प्राकृतिक पर्यावरण में कई तरह के परिवर्तन हो जाते हैं! भूकंपीय तरंगों से धरातल पर दरारे पड़ जाती हैं! क्षेत्र के अपवाह तंत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन भी देखे जा सकते हैं!

नदियों के मार्ग बदल जाने से बाढ़ आ जाती है! जलापूर्ति से संबंधित वितरण संपर्क तथा जलाशयों के टूट जाने से गंभीर समस्या पैदा हो जाती है! आग बुझाने में प्रयुक्त आपूर्ति लाइनें असुरक्षित होने की स्थिति में अग्नि सेवा को प्रभावित करती हैं! पहाडी क्षेत्रों में भूस्खलन हो जाते हैं तथा भारी मात्रा में चट्टानी मलबा नीचे आ जाता है! हिमानी फट जाती है तथा इससे हिमस्त्राव सुदूर स्थित स्थानों तक हो जाता है! 

भूकंप का मानवीय जीवन एवं अन्य जीव जंतु पर व्यापक प्रभाव पड़ता है! सड़कों और पुलों, रेल पटरियों, हवाई पट्टीयों तथा संबंधित बुनियादी सेवाओं के टूट जाने के कारण परिवहन नेटवर्क पर गंभीर प्रभाव पड़ता है! बिजली तथा संचार से संबंधित सभी संपर्क प्रभावित हो जाते हैं, जिसके कारण ट्रांसमिशन, टॉवर, ट्रांसपोर्टर काम करना बंद कर देता है! कभी-कभी नगर तथा गांव पूर्णतया नष्ट हो जाते हैं, हजारों लाखों की संख्या में लोगों की मृत्यु हो जाती है और संपूर्ण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है! 

भूकंप से बचने के उपाय (Bhukamp se bachane ke upay) –

भूकंप एक प्राकृतिक आपदाएं जो मानव के वश में नहीं है! हम अर्थक्वेक को न तो नियंत्रित कर सकते हैं और नहीं उसे रोक सकते हैं! अत: इसके लिए विकल्प यह है कि इस आपदा से निपटने की तैयारी रखी जाए और उसके प्रभाव को कम करने का प्रयास किया जाए! भूकंप न्युनीकरण के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं –

(1) भूकंप संभावित क्षेत्रों में इसके आकलन व सूचना केंद्र की स्थापना की जाए, ताकि वहां के निवासियों को सूचित किया जा सके! 

(2) जीपीएस की सहायता से विवर्तनिकी प्लेटों की हलचल का पता लगाया जा सकता है! 

(3) भवनों की डिजाइन इस प्रकार तैयार करना चाहिए कि वह भूकंप के झटकों को सहन कर सकें! 

(4) ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सस्ते भूकंपरोधी मकानों के निर्माण की दिशा में अनुसंधान पर बल दिया जाना चाहिए! 

(5) सामुदायिक स्तर पर दक्षता निर्माण तथा तैयारी पर बल देना एवं तैयारी की जांच के लिए समय-समय पर छद्म अभ्यास  (Mock Drill) का आयोजन किया जाए! 

(6) समुदाय के कुछ लोगों को प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण देना तथा चलित चिकित्सालय का प्रबंध किया जाना! 

भूकंप के लाभ (Bhukamp ke labh) –

अर्थक्वेक एक प्राकृतिक घटना है और इसके कुछ अप्रत्यक्ष लाभकारी प्रभाव भी है, जो इस प्रकार है –

(1) इससे शैलें कमजोर पड़ जाती है और इस प्रकार यह क्रिया अपक्षय और मिट्टी के निर्माण में सहायक है! 

(2) भूकंपीय तरंगों के अध्ययन के माध्यम से भूगर्भ के बारे में जानकारी प्राप्त होती है!

(3) भूकंप के भयंकर आवेग से कभी-कभी मूल्यवान खनिज सतह के पास आ जाते हैं! 

(4) कुछ भागों में जमीन धंस जाने से झीलों के रूप में नये जल स्त्रोतों का निर्माण होता है! 

भारत में भूकंप – 

भारत में भूकंपो का मुख्य कारण भारतीय प्लेट का यूरेशियाई प्लेट के साथ टकराना है! इसके अतिरिक्त यह धीरे-धीरे वामावर्त दिशा में घूम रही है! इस घूर्णन और स्थानांतरण के परिणामस्वरुप बलूचिस्तान में तथा भारत म्यांमार पर्वतमालाओं में पार्श्विक सर्पण होता है, जिससे इन क्षेत्रों में भूकंप की संभावना बढ़ जाती है! 
हिमालय का पर्वतीय भाग एवं उत्तर का मैदानी भाग भूकंप की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र है, जिससे यहां पर प्राय: भूकंप आते रहते हैं! पिछली एक सदी में इस क्षेत्र में अनेक बड़े भूकंप आ चुके हैं, जिनमें असम, कांगड़ा, बिहार, नेपाल, उत्तरकाशी में आए भूकंप शामिल है! 

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