अभिवृत्ति का अर्थ क्या है? अभिवृत्ति के प्रकार और विशेषताएं

अभिवृत्ति का अर्थ क्या हैं (abhivriti ka arth) – 

अभिवृत्ति (Attitude) चीजों का एक खास ढंग से मूल्यांकन करने की विद्वतापूर्ण  प्रवृत्ति है! इसमें लोगों, वस्तुओं, मुद्दों या घटनाओं का मूल्यांकन शामिल है! ऐसे मूल्यांकन अक्सर सकारात्मक या नकारात्मक हो सकते हैं पर वे कभी-कभी अनिश्चित भी होते हैं! इसलिए हम किसी भी व्यक्ति के लिए मिली-जुली अनुभूति की बात करते हैं! अभिवृत्ति एक व्यक्ति, स्थान या घटना के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक होने की अभिव्यक्ति है!

अभिव्यक्ति (abhivriti) मनुष्य की वह सामान्य प्रतिक्रिया है जिसके द्वारा वस्तु का मनोवैज्ञानिक ज्ञान होता है! 

अभिवृत्ति की प्रकृति एवं विशेषताएं (Nature and Characteristics of Attitude in hindi) – 

मनोवृत्ति या अभिवृत्ति को व्यवहार से पूर्व की मनोदैहिक अवस्था या प्रवृत्ति कहा जाता है! इसकी निम्न विशेषताएं हैं-

(1) किसी भी विशेष वस्तु, व्यक्ति समूह, संस्था मूल्य अथवा मान्यता के प्रति बनी हुई अभिव्यक्ति इन सभी के प्रति व्यक्ति का कैसा संबंध है, यह स्पष्ट करती है! 

(2) कोई भी अभिव्यक्ति जन्मजात नहीं होती बल्कि वातावरण में उपलब्ध अनुभवों के आधार पर अजित की जाती है! 

(3) किसी वस्तु के प्रति व्यक्ति की स्वाभविक तत्परता जिसे अभिव्यक्ति के नाम से जाना जाता है उसका स्वरूप बहुत ही स्थायी होता है!

(4) अभिवृत्तियों के विकास में किसी अभिप्रेरणा का हाथ होता है जबकि आदत आदि अन्य प्रवृत्तियों में यह आवश्यक नहीं! 

(5) अभिवृत्ति की चरम सीमा यह इंगित करती है कि अभिव्यक्ति किस सीमा तक सकारात्मक या नकारात्मक है! 

(6) मनोवृत्ति में दिशा और परिणाम दोनों ही पाए जाते हैं! 

अभिवृत्ति के प्रकार (Types of Attitude in hindi) –

अभिवृत्ति (मनोवृत्ति) को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है – व्यक्त (प्रत्यक्ष) और अंतर्निहित (अप्रत्यक्ष) दोनों में मौलिक अंतर यह है कि जहां मनुष्य व्यक्त मनोवृत्ति का निर्माण के प्रति सजग रहता है अर्थात उसे अपनी मनोवृत्ति का ज्ञान रहता है. वहीं अंतर्निहित (अप्रत्यक्ष) मनोवृत्ति के प्रतिभा सचेत नहीं रहता बल्कि भूतकाल की यादें इस मनोवृत्ति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है! 

व्यक्त या प्रत्यक्ष मनोवृत्तियॉं (Explicit Attitude in hindi) – 

इस मनोवृत्ति की खास बात यह है कि व्यक्ति इस मनोवृति के प्रति सचेत रहता है अर्थात ऐसी मनोवृत्तियॉं सोच समझकर बनाई जाती है! व्यक्ति अपने आसपास की घटनाओं से अवगत रहता है और उन्हीं से प्रभावित होकर वह एक खास दिशा में विशिष्ट तरीके से सोचता है या फिर व्यवहार करता है! उसके इसी व्यवहार में उसकी मनोवृति परिलक्षित होती है और इस बात का भी संज्ञान उसे रहता है! 

अंतनिर्हित या प्रत्यक्ष मनोवृत्तियॉं (Implicit Attitude in hindi) –

अंतर्निहित या अप्रत्यक्ष मनोवृत्तियॉं का स्त्रोत हमारी भूतकाल की घटनाएं है! यह घटनाएं यादों के रूप में हमारे अवचेतन मन में अपना पैठ बना देती है! अवचेतन मन में बैठकर इन्हीं बातों से प्रेरित होकर हम किसी खास वस्तु या व्यक्ति के विषय में एक विशेष तरीके से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं! यह हमारी अंतर्निहित अथवा अप्रत्यक्ष मनोवृत्ति का ही परिचायक है!

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